बुलैट राजा में एक्शन, पर हिंसा नहीं- फिल्म रिव्यू
सैफ अली खान ने अपनी फिल्म बुलैट राजा के प्रमोशन के दौरान कहा था कि उनकी फिल्म में एक्शन है लेकिन हिंसा नहीं है। फिल्म को देखने के बाद समझ में आया कि वो ऐसा क्यों कह रहे थे। बुलैट राजा से लोग यही एक्सपेक्ट कर रहे थे कि ये एक आम एक्शन फिल्म होगी जिसमें हीरो अपनी हीरोगीरि दिखाने के लिए अपनी शर्ट के बटन तोड़ देगा, एक बार में चार चार को उठा के फेंक देगा, चारों तरफ खून ही खून होगा। लेकिन बुलैट राजा में ऐसा कुछ नहीं था। फिल्म एक एक्शन फिल्म है लेकिन इसमें भी कॉमेडी और रोमांस का जोरदार तड़का है। फिल्म के डायलॉग बेहतरीन हैं जो कि आपको हर एक मिनट के बाद मुस्कुराने पर मजबूर कर देंगे। ये एक पारिवारिक फिल्म है जिसमें रोमांस या कॉमेडी के नाम पर कुछ भी नॉनवेज नहीं परोसा गया है।
बुलैट राजा की कहानी राजा मिश्रा (सैफ अली खान) के इर्द गिर्द घूमती है जो कि एक आम मिडिल क्लास फैमिली से है। एक दिन गलती से वो रुद्र (जिमी शेरगिल) के घर में हो रही शादी में शरीक हो जाता है जहां पर रुद्र के चाचा पर हुए जानलेवा हमले में उनकी जान बचाकर वो एक बड़ी मुसीबत में फँस जाता है। उसके बाद से रुद्र और राजा के पीछे वो गुंडे पड़ जाते हैं जिन्होंने रुद्र के चाचा पर हमला किया था। फिर कुछ ऐसी परिस्थितियां बनती हैं कि रुद्र और राजा भी इसी गुंडागर्दी में शामिल हो जाते हैं और बड़े पॉलिटीशियन राज बब्बर का साथ भी हासिल कर लेते हैं। फिर एक दिन रुद्र की जान चली जाती है और उसकी जान का बदला लेने के लिए राजा पूरे सिस्टम से भिड़ जाता है।
बुलैट राजा फिल्म का फर्स्ट हाफ तो हंसते गाते, मजाक मस्ती में किस तरह बीत जाता है पता ही नहीं चलता। फिल्म पूरी फ्लो में चलती है। एक मिनट भी सोचने का टाइम नहीं देती। रुद्र की मौत के बाद सेकेंड हाफ में पूरी फिल्म राजा मिश्रा यानी सैफ पर केंद्रित हो जाती है। विद्युत के एक्शन सीन्स लाजवाब हैं। एजेंट विनोद यानी सैफ अली खान और कमांडो यानी विद्युत के बीच के एक्शन सीक्वेंस बहुत ही बेहतरीन हैं। विद्युत को एक्शन में कोई मात नहीं दे सकता। फिल्म के गाने थोड़े निराशाजनक हैं लेकिन जिमी शेरगिल, सैफ अली खान, रवि किशन, सोनाक्षी सभी की एक्टिगं ने इस कमी को पूरा कर दिया।


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