Bombairiya Movie Review: रूखी कहानी और ढ़ीले-ढ़ाले किरदार, फिल्म सिर्फ सपने ही दिखाती है
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बॉम्बेरिया के एक सीन में मेघना (राधिका आप्टे) अभिषेक (अक्षय ओबेरॉय) से पूछती है कि क्या वो खुद को कैप्टन अमेरिका समझता है जो शहर को बचाने निकला है। खैर! एक समय के बाद फिल्म देखने और समझने कि लिए ऑडिएंस को सुपरहीरो बनना ही पड़ेगा।

बॉम्बेरिया की शुरूआत एक उलझी हुई पहेली जैसे नैरेशन से होती है। जहां झोपड़ी में छुपे एक बूढ़े आदमी की गोली मारकर हत्या कर दी जाती है। फिर हमें मिलाया जाता है मेघना (राधिका आप्टे) से जिसका सेलफोन एक बाइकर (सिद्धार्थ कपूर) ने चुरा लिया है। मेघना अभिषेक (अक्षय ओबेरॉय) को सड़क के बीच उससे मारपीट करने से रोकती है।
जल्द ही पता चलता है कि मेघना एक हॉटशॉट अभिनेता करन कपूर (रवि किशन) की पीआर एजेंट हैं। जो फिल्म सिटी में हंस शेप के पैडल बोट में बैठकर विस्की पी रहा है।
इस अराजकता के बीच, एक राजनीतिक नेता (आदिल हुसैन) जेल में बंद है जो किसी 'पैकेज' के पीछे पड़ा है। फिल्म का बाकी प्लॉट सिर्फ इसी के कारण हुई कॉमेडी के इर्द-गिर्द घूमता है, जो कि मेकर्स के लिए क्लाइमैक्स से ज्यादा अहम मालूम होता है।
डायरेक्टर पिया सुकन्या ने एक ही कहानी में न जाने कितने फ्लेवर डालने की कोशिश की है लेकिन शायद यही कारण है कि फिल्म बेमजा हो गई। फिल्म का नैरेटिव काफी कंफ्यूज कर देने वाला है। कुछ ही देर में फिल्म का सस्पेंस बाहर आ जाता है और कहानी पकाऊ हो जाती है। इस डार्क कॉमेडी में कैटरेक्टर्स को थोड़ा सच्चाई से जोड़कर दिखाते तो शायद ऑडिएंस कनेक्ट भी कर पाती।
कैरेक्टर्स की बात करें तो राधिका आप्ट कई जगह पर शानदार लगी हैं जो काफी कम ही हैं। शायद मेघना का किरदार ठीक तरीके से गढ़ने में कमी रखी गई है। अक्षय ओबेरॉय भी एक स्वीट लड़के के किरदार में ठीक नहीं लग पाए हैं। डिलिवरी बॉय के किरदार में सिद्धार्थ कपूर का ठीक-ठाक ही लगे हैं। आदिल हुसैन कहानी में कुछ गंभीरता जोड़ने की कोशिश करते हैं लेकिन कुछ हिस्सों में ही सफल होते हैं।


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