बेटी के आशिक को ढूंढना हो या पति की माशूका बॉबी इज ऑन ड्यूटी- फिल्म रिव्यू

By Sonika

विद्या बालन की बॉबी जासूस सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। लोगों को काफी समय से इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार था क्योंकि फिल्म में पहली बार किसी महिला जासूस को दिखाया गया है। विद्या बालन की बात करें तो जैसा कि उनसे फैंस की उम्मीद होती है वो हमेशा ही अपने किरदार को इतनी खूबी से निभाती हैं कि उन्हें देखकर लोग हैरान रह जाते हैं।

Rating:
4.0/5

फिल्म की कहानी की शुरुआत काफी अच्छी है और किरदार दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब भी होते हैं। लेकिन जैसे जैसे कहानी अपने अंत की ओर बढ़ती कहीं ना कहीं किरदारों के हाथों से दर्शकों की डोर छूटने लगती है।

कहानी- बॉबी जासूसी की कहानी शुरु होती हैदराबाद शहर से, बिलकिस अहमद ऊर्फ बॉबी (विद्या बालन) अपने परिवार के साथ रहती है। बॉबी के साथ उसकी दो बहनें, उसके पता और उसकी मां रहती हैं।

बॉबी के पिता को बॉबी का इस तरह से देर रात तक बाहर घूमते रहना और लोगों की जासूसी करना मोबिल्कुल नहीं पसंद। लेकिन बॉबी की मां उसे बहुत सपोर्ट करती है। बॉबी अपने मोहल्ले के आस पास के लोगों द्वारा लाए गये उनके परिवार से जुड़े केसेस की छानबीन करती है और साथ ही एक बड़ी डिडेक्टिव कंपनी में नौकरी पाने के लिए भी कोशिश करती रहती है।

एक दिन बॉबी के पास एक लड़की को ढूंढने का केस आता है और उसके लिए उसे बड़ी रकम दी जाती है। इसके बाद बॉबी के पास और भी कुछ लोगों को ढूंढने के केस आते हैं और उन लोगों को ढूंढने के लिए बॉबी को अच्छी रकम दी जाती है।

लेकिन एक दिन बॉबी को लगता है कि कहीं वो कुछ गलत तो नहीं कर रही है और इस एहसास के आते ही बॉबी की पूरी दुनिया ही बदल जाती है। इसी बीच बॉबी की मदद करने आगे आता है तसव्वुर (अली फजल)। ये केस बॉबी की जिंदगी पूरी तरह से बदल देता है, कैसे ये जानने के लिए देखिये बॉबी जासूस।

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