Blind Movie Review: सोनम कपूर की इस 'कमबैक' क्राइम- थ्रिलर फिल्म में ना रोमांच है ना रहस्य

निर्देशक- शोम मखीजा
कलाकार- सोनम कपूर, पूरब कोहली, विनय पाठक, लिलेट दुबे, शुभम सराफ
प्लेटफॉर्म- जियो सिनेमा
"मेरे दिमाग के अंधेरे में मत घुसो जिया, भटक जाओगी.." एक बेहरम सीरियल किलर फोन पर धमकी देते हुए जिया (सोनम कपूर) से कहता है, जो कि एक नेत्रहीन लड़की है और पूर्व में पुलिस अफसर रह चुकी है।। फिल्म की शुरुआत जिस तरह से की गई है, आप उम्मीद करते हैं कि ये काफी डार्क और रोमांचक होने वाली है। बता दें, ये इसी नाम से बनी एक कोरियन फिल्म की हिंदी रीमेक है। इसी कहानी पर तमिल भाषा में भी फिल्म बन चुकी है, जिसमें मुख्य भूमिका नयनतारा ने निभाई थी।
कहानी
ग्लासगो में रहने वाली जिया सिंह (सोनम कपूर) एक पुलिस अफसर हैं, जो एक रात अपने भाई के साथ एक कार दुर्घटना का शिकार हो जाती हैं। इस दुर्घटना में भाई की मौत हो जाती है, जबकि जिया अपनी आंखों की रोशनी और बाद में अपनी नौकरी खो देती है। वह एक नेत्रहीन लड़की के तौर पर अपनी रोजमर्रा की जिंदगी को सहज बनाने की कोशिश करती ही हैं कि जिंदगी उसे एक पेचीदा केस में घुसा देती है। शहर में युवा लड़कियों के किडनैपिंग और मर्डर की घटनाएं बढ़ने लगती हैं। ऐसे में एक रात जिया एक कैब में लिफ्ट लेती है, जब उसे अहसास होता है कि सारी घटनाओं का आरोपी ये ड्राइवर ही है। वहां से किसी तरह से बचकर वह निकलती है। और फिर पुलिस (विनय पाठक) के साथ मिलकर उस मनोरोगी हत्यारे (पूरब कोहली) को पकड़ने की कोशिश में लग जाती है। इसके बाद कहानी बिल्ली- चूहे वाली खेल की तर्ज पे आगे बढ़ती है।
निर्देशन व तकनीकी पक्ष
ब्लाइंड के निर्माता सुजॉय घोष हैं, जिन्होंने 'कहानी' और 'बदला' जैसी संस्पेंस- थ्रिलर फिल्में दी हैं। लिहाजा, इस फिल्म से भी काफी उम्मीदें थीं। लेकिन ब्लांइड की पटकथा में रोमांच, प्रत्याशा और रहस्य का काफी अभाव है। निर्देशक शोम मखीजा फिल्म की शुरुआत काफी बेहतरीन करते हैं। किलर के घर से भागती हुई लड़की को देखकर आप दम साधे आगे की कहानी का इंतजार करते हैं। लेकिन जैसे जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, कहानी सपाट होती जाती है। किसी संस्पेंस- थ्रिलर फिल्म में यदि आप किलर से शुरुआत में ही रूबरू कराते हैं, तो आगे की कहानी बांधने का दवाब निर्देशक पर काफी बढ़ जाता है। वही, दवाब यहां भी था।
कहानी में एक बड़ी कमी है कि मनोरोगी हत्यारे की मोटिव को सामने रखा ही नहीं गया। कुछ एक दृश्य में किलर के मां की तस्वीर दिखाई गई है और उस पर काफी फोकस भी किया गया है। एक दृश्य में वो किडनैप की हुई एक लड़की को बेतरतीबी से मारता है और कहता है, "अब तुम मां की तरह दिखती हो,".. ये संवाद एक गहरी पृष्ठभूमि की ओर इशारा करता है। लेकिन लेखक - निर्देशक ने इस ओर ध्यान देना जरूरी ही नहीं समझा। तनुप्रिया शर्मा द्वारा फिल्म की एडिटिंग थोड़ी और चुस्त हो सकती थी। गैरिक सरकार की सिनेमेटोग्राफी अच्छी है और कहानी में एक थ्रिल फैक्टर बनाए रखनी है।
अभिनय
एक नेत्रहीन पुलिस ऑफिसर के किरदार में सोनम कपूर ने अच्छा काम किया है। ब्लाइंड के साथ एक्ट्रेस लगभग 4 सालों के बाद फिल्मों में नजर आई हैं। यहां उनके किरदार में संजीदगी थी, जिसे उन्होंने पकड़कर रखा। इस दफा सोनम के हिस्से में कुछ एक्शन सीन्स भी आए हैं, जहां अभिनेत्री को पूरे नंबर मिलते हैं। लेकिन इनके किरदार में एक गहरेपन की जरूरत थी, जो राइटिंग में मिसिंग थी। पुलिस इंस्पेकर पृथ्वी खन्ना में किरदार में विनय पाठक जंचे हैं। वहीं, निगेटिव रोल में पूरब कोहली शुरुआत में थोड़ा सरप्राइज पैकेज की तरह लगते हैं। लेकिन लेखक- निर्देशक ने उनके किरदार को काफी अधपका छोड़ दिया। आप इंतजार करते हैं कि फिल्म की नायिका और विलेन जब आमने सामने आएंगे तो कुछ दमदार होगा, लेकिन यहां निराशा हाथ लगती है। दोनों के बीच का सीक्वेंस काफी सपाट गुजर जाता है। सपोर्टिंग कलाकारों में लिलेट दुबे और शुभम सराफ ने अपने किरदार के साथ न्याय किया है।
रेटिंग
सोनम कपूर स्टारर क्राइम- थ्रिलर 'ब्लाइंड' एक दिलचस्प नोट पर शुरु होती है, लेकिन ढ़ीली पटकथा इसे नीरस बना देती है। फिल्म में रोमांच की भारी कमी खलती है, हालांकि सभी कलाकारों के परफॉर्मेंस अच्छे हैं। फिल्मीबीट की ओर से ब्लाइंड को 2 स्टार।


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