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    'भूत' फिल्म रिव्यू: विकी कौशल और बॉलीवुड का हॉरर मसाला एक साथ

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    Rating:
    3.0/5

    निर्देशक- भानु प्रताप सिंह

    कलाकार- विकी कौशल, भूमि पेडनेकर, आशुतोष राणा

    भूत है, रोमांस है, नफरत है, फरेब है, गुड़िया है और चर्च है.. हॉरर फिल्म के लिए ये पर्याप्त मसाला है। लंबे समय से बॉलीवुड में एक pure हॉरर फिल्म का इंतज़ार था। लिहाजा, 'भूत' को लेकर काफी उम्मीदें बंध गई थीं। सच्ची घटना पर आधारित यह फिल्म दिल दहलाने वाली शुरुआत करती है। पहली सीन से ही निर्देशक भुतहा माहौल बनाने की कोशिश करते हैं, लेकिन अंत तक जाते जाते लड़खड़ा जाते हैं। फिल्म में प्रोफेसर बने आशुतोष राणा कहते हैं- 'उसकी आत्मा को मुक्त करना है तो हमें उसके पीछे की कहानी पता करनी होगी, तभी हम उसकी मदद कर पाएंगे..' और सच कहा जाए तो, यह सुनकर दिमाग में बॉलीवुड की पिछली सभी हॉरर फिल्में दौड़ने लगती हैं।

    फिल्म की कहानी

    फिल्म की कहानी

    मुंबई के जुहू बीच पर जहाज Sea Bird आकर किनारे लग गई है, जिसमें कोई इंसान नहीं है। इस जहाज के भूतिया होने के किस्से चर्चित हैं। शिपिंग अफसर पृथ्वी (विकी कौशल) जांच पड़ताल करने के लिए जहाज पर जाते हैं, जहां उसे अहसास होता है कि जहाज पर उनके अलावा भी कोई और है। कुछ अनहोनी घटनाएं होती हैं और पृथ्वी किसी भी तरह उन घटनाओं के पीछे की कहानी जानना चाहता है। अपनी बीवी (भूमि पेडनेकर) और बेटी को एक दुर्घटना में खो देने के बाद पृथ्वी एक अपरोध बोध में ज़िंदगी जी रहा होता है, लेकिन यह जहाज उसे एक उद्देश्य देता है। इसमें उसका साथ देते हैं एक प्रोफेसर जोशी (आशुतोष राणा)। जहाज में फंसी एक आत्मा की कहानी के इर्द गिर्द पूरी फिल्म घूमती है।

    अभिनय

    अभिनय

    पृथ्वी के किरदार में विकी कौशल ने अच्छा काम किया है। फिल्म पूरी तरह से ही उनके कंधों पर है, लिहाजा अभिनेता ने कोई कमी नहीं छोड़ी। लेकिन कमजोर पटकथा की मार विकी के किरदार में भी नजर आई। कई दृथ्य दोहराए जैसे लगते हैं, जिस वजह से विकी के हाव भाव में भी भिन्नता नहीं दिखी है। नतीजतन डर का भी अभाव है। प्रोफेसर जोशी बने आशुतोष राणा के किरदार को बेहद अनमने ढ़ंग से लिखा गया है। फिल्म के क्लाइमैक्स में मंत्र चिल्लाने के अलावा उनके हाथों में कोई भी अहम दृश्य नहीं है। भूमि पेडनेकर ने अपने छोटे से किरदार के साथ न्याय किया है।

    निर्देशन

    निर्देशन

    फिल्म का लेखन- निर्देशन भानु प्रताप सिंह ने किया है। बतौर निर्देशक यह उनकी पहली फिल्म है। फिल्म के पहले दृश्य से ही निर्देशक ने डर का साया बनाकर रखने की कोशिश की है। फर्स्ट हॉफ तक वह सफल भी रहे हैं। इंटरवल तक फिल्म जिस ऊंचाई पर पहुंचती है, सेकेंड हॉफ में नीचे ढ़लकती जाती है। महज दो घंटे की यह फिल्म लंबी लगने लगती है क्योंकि कई दृश्यों में दोहराव है। वहीं, काफी ज्यादा मसाला डालने की भी कोशिश की गई है। क्लाईमैक्स तक पहुंचते हुए फिल्म सारे राज सामने रख देती है, लिहाजा क्लाईमैक्स बेहद ठंडा बन पड़ा है।

    तकनीकि पक्ष

    तकनीकि पक्ष

    स्क्रीनप्ले के अलावा.. हॉरर फिल्म के तीन सबसे मजबूत पक्ष होते हैं- बैकग्राउंड स्कोर, मेकअप और ग्राफिक्स.... भूत इन तीनों डिपार्टमेंट में अच्छी रही है। पुष्कर सिंह की सिनेमेटोग्राफी दृश्यों को एक ऊंचाई देती है। लेकिन बोधादित्य बैनर्जी की एडिटिंग औसत है। कई दृश्यों को बीच में ही छोड़ दिया गया है। आप उम्मीद करते हैं कि इसे अगले किसी दृश्य के साथ जोड़ा जाएगा, लेकिन नहीं.. ऐसा कुछ नहीं होता। यह बहुत ही निराशाजनक है।

    संगीत

    संगीत

    फिल्म में सिर्फ एक ही गाना है- चन्ना वे.. जिसका संगीत दिया है अखिल सचिदेवा ने। यह एक रोमांटिक गाना है लेकिन फिल्म में कहीं भी बाधित नहीं करती है। बल्कि कहानी को आगे बढ़ाती है। वहीं, केतन सोधा द्वारा दिया गया बैकग्राउंड स्कोर बढ़िया है।

    देंखे या ना देंखे

    देंखे या ना देंखे

    इस जॉनर की फिल्में पसंद करते हैं तो 'भूत' एक बार थियेटर में जरूर देखी जा सकती है। लगभग पूरी फिल्म जहाज पर फिल्माई गई है तो उसे बड़े पर्दे पर देखने का रोमांच अलग होता है। फिल्मीबीट की ओर से 'भूत' को 3 स्टार।

    English summary
    Vicky Kaushal starring Bhoot The Haunted Ship gives you few spooky moments and lacks crisp screenplay. Film directed by Bhanu Pratap Singh.
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