भूल भुलैया 2 फिल्म रिव्यू- पूरी तरह से कार्तिक आर्यन की है ये हॉरर कॉमेडी, करते हैं इंप्रेस

Rating:
3.0/5

निर्देशक- अनीस बज़्मी
कलाकार- कार्तिक आर्यन, कियारा आडवाणी, तब्बू, राजपाल यादव, संजय मिश्रा, राजेश शर्मा

साल 2007 में आई प्रियदर्शन की फिल्म 'भूल भुलैया' एक साइकॉजिकल- थ्रिलर कॉमेडी थी। जबकि उससे इतर 'भूल भुलैया 2' को एक हॉरर- कॉमेडी बनाकर पेश किया गया है। दोनों फिल्मों में किरदार के नाम और गानों के अलावा कोई समानता नहीं दिखेगी। लिहाजा, हम भी यहां तुलना नहीं करेंगे।

"मंजुलिका की कहानी भी तुम्हारी कहानी की तरह झूठी है.. वहम है सबका.." लोगों से छिपते भागते हुए रीत (कियारा आडवाणी) रूहान (कार्तिक आर्यन) से कहती है और हवेली में सालों में बंद पड़े दरवाजा का ताला खोल देती है। इसके साथ ही उस कमरे में 18 सालों से कैद में रही मंजोलिका की आत्मा हवेली के लोगों से अपना बदला लेने के लिए निकलती है। क्या है मंजुलिका की कहानी और क्या इस बार वो अपने इरादों में कामयाब हो पाएगी? इसी के इर्द गिर्द घूमती है पूरी कहानी।

कहानी

कहानी

फिल्म की शुरुआत होती राजस्थान के भवानीगढ़ की हवेली से, जहां मंजुलिका की आत्मा कोहराम मचा रही है। लेकिन एक बाबा मंत्र- तंत्र की मदद से उसे हवेली के ही एक कमरे में बंद कर देते हैं और पूरे ठाकुर खानदान को हिदायत देते हैं कि इसे कभी ना खोला जाए। इसके बाद पूरा परिवार हवेली छोड़कर निकल जाता है। लेकिन 18 साल उसी भूतहा हवेली में वापसी होती है रीत ठाकुर की, जो उस घर की बेटी है। रीत का मानना है कि कोई भूत नहीं होता और मंजुलिका की कहानियां झूठ हैं। वह किसी कारणवश परिवार वालों से छिपकर कुछ दिनों तक वहां रहना चाहती है। इसमें उसकी मदद करता है रूहान। लेकिन जैसे ही ठाकुर परिवार को खबर लगती है कि हवेली में कोई घुस आता है, पूरा परिवार वापस वहां आ जाता है। जब रीत के लिए अपने परिवारवालों से छिपना मुश्किल हो जाता है.. तो वो उसी कमरे में छिपने का फैसला लेती है, जिसे 18 साल पहले मंत्र- तंत्र के साथ बंद किया गया था। कमरे का दरवाजा खोलते ही मंजुलिका की आत्मा आज़ाद हो जाती है। और एक बार फिर शुरु हो जाती हैं भूतिया घटनाएं। ऐसे में रीत और रूहान खुद को और पूरे परिवार को मंजुलिका से कैसे बचा पाएंगे.. यही बनाती है पूरी कहानी।

अभिनय

अभिनय

अक्षय कुमार से लगातार तुलना करते हुए दर्शकों ने कार्तिक आर्यन पर भारी जिम्मेदारी डाल दी थी। लेकिन अभिनेता ने सभी तुलनाओं को दरकिनार करते हुए मुख्य किरदार को अपने अंदाज में निभाया है और पूरी तरह से न्याय किया है। कॉमेडी दृश्य हो या हॉरर.. कार्तिक ने अपने हाव भाव से दिल जीत लिया है। कियारा अपने किरदार में अच्छी लगी हैं। लेकिन उन्हें उनकी दूसरी फिल्मों से अलग कुछ नहीं दिया गया। वहीं, तब्बू का किरदार फैंस के लिए एक सरप्राइज पैकेज हो सकता है। उनके किरदार में ट्विस्ट है, जिसे उन्होंने बड़ी ही सहजता के साथ निभाया है। सहयोगी भूमिकाओं में राजपाल यादव, अमर उपाध्याय, संजय मिश्रा, मिलिंद गुनाजी, राजेश शर्मा आदि ने अच्छा काम किया है। साथ ही पोटलू के रूप में बाल कलाकार सिद्धांत घेगदमल अपनी छाप छोड़ते हैं।

निर्देशन

निर्देशन

अनीज बज्मी कॉमेडी फिल्मों के अपने अलग अंदाज़ के लिए जाने जाते हैं। लिहाजा, भूल भुलैया 2 में भी हॉरर की अपेक्षा कॉमेडी का हिस्सा थोड़ा बढ़ा हुआ लगता है। निर्देशक की खास बात है कि उन्होंने मूल फिल्म (भूल भुलैया) से अलग इसे अपने तरीके का ट्रीटमेंट दिया है। लेकिन फिर उस फिल्म से दो गाने क्यों उधार लिये गए.. यह समझ से बाहर है। भूल भुलैया में "आमी जे तोमार" को जिस तरह शामिल किया गया था, वह गाना फिल्म की पहचान बन गया। लेकिन यहां वह फिजूल लगा है। बहरहाल, फिल्म की शुरुआत काफी दमदार तरीके से होती है, लेकिन क्लाईमैक्स तक जाते जाते कहानी ट्रैक से हटकर डगमगाने लगती है। कोई दो राय नहीं कि कहानी में बहुत कमियां हैं, लेकिन स्टारकास्ट उसकी भरपाई कर देते हैं।

तकनीकी पक्ष

तकनीकी पक्ष

फिल्म के संवाद लिखे हैं फरहाद सामजी और आकाश कौशिक ने, जो कि अच्छे हैं। हालांकि कॉमेडी के नाम पर किसी बच्चे के मोटापे पर ताने मारना फिल्मों में कब बंद किया जाएगा, पता नहीं। मनु आनंद की सिनेमेटोग्राफी अच्छी है और कहानी में एक टोन सेट करती है। हवेली की खूबसूरती और मायाजाल को वो अपने कैमरे में बेहतरीन कैद करते हैं। वहीं, बंटी नागी का संपादन सराहनीय है।

संगीत

संगीत

फिल्म का संगीत दिया है प्रीतम ने, जो कि औसत है। फिल्म में कुल चार गाने हैं, जिसमें से दो पुरानी से फिल्मों से लिए गए हैं। कंपोजिशन ही नहीं, बल्कि कहानी में गाने को जिस तरह फिट किया गया था, वह भी ध्यान भटकाने वाला था। कह सकते हैं कि गाने फिल्म की लंबाई को बढ़ाने का काम करती है।

देंखे या ना देंखे

देंखे या ना देंखे

साल 2007 में आई फिल्म 'भूल भलैया' की अगली कड़ी के तौर पर आई ये फिल्म नए ढर्रे से उसी कड़ी को पकड़ने की कोशिश करती है.. और शायद यही फिल्म की सबसे अच्छी बात है। कार्तिक आर्यन के फैन हैं तो ये फिल्म थियेटर में जरूर देंखे। फिल्मीबीट की ओर से 'भूल भुलैया 2' को 3 स्टार।

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