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    'बाला' फ़िल्म रिव्यू: दमदार अभिनय और इंटरटेनमेंट के साथ एक बड़ा संदेश- हिट हैं आयुष्मान खुराना

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    Rating:
    4.0/5

    निर्देशक- अमर कौशिक

    कलाकार- आयुष्मान खुराना, भूमि पेडनेकर, यामी गौतम

    ''हम आपकी खूबसूरती का राज़ हैं, आपके सिर का परमानेंट ताज हैं.. सर की ढ़ाल हैं, लगते कमाल हैं..'' बालों का यह वर्णन आपका ध्यान आकर्षित करता है। और यहीं से शुरु होती है बाला की कहानी।

    'बदलना क्यों है?' फिल्म में उठा यह सवाल सभी दर्शकों के दिल में एक जगह बना लेता है। और यही है निर्देशक अमर कौशिक की जीत। यह फिल्म आपको खुद से प्यार करना सिखाएगी क्योंकि दुनिया में परफेक्शन की कोई एक परिभाषा नहीं है। सबके परफेक्शन की परिभाषा अलग है, लिहाजा हमें समाज के लिए खुद को बदलने की जरूरत नहीं है। कसी हुई पटकथा, उम्दा निर्देशन, व्यंग से भरपूर हास्य संवाद और दमदार अदाकारी इस फिल्म को मजबूत बनाते हैं।

    कहानी

    कहानी

    लहराते बालों के साथ बालमुकुंद शुक्ला स्कूल का हीरो है। वह स्कूल ड्रामा में भगवान कृष्ण बनता है और लड़कियां उस पर जान छिड़कती हैं। बॉलीवुड सुपरस्टार्स की मिमिकरी करता बाला खुद को सुपरस्टार से कम नहीं समझता। स्कूल में अपने सर को टकला बोलना हो, या क्लास की सांवली लड़की को चिढ़ाना.. बाला हमारे समाज का सटीक उदाहरण है। लेकिन 2005 में लहराते बालों पर इतराने वाले बाला पर गाज़ 2016 में आकर गिरती है, जब उसके बाल दिन ब दिन झड़ते जाते हैं और वह लगभग गंजा हो जाता है। बाला कहता है- ''मेरा hair loss नहीं, identity loss हो रहा है..'' बाल उगाने के 200 से भी ज्यादा उपचार करने के बाद, बाला के हाथों एक जुगाड़ लगता है.. लेकिन क्या उससे बाला का सच्ची खुशी मिलेगी?

    शादी के मामले में कई लड़कियों से रिजेक्ट होने के बाद बाला की मुलाकात परी मिश्रा (यामी गौतम) से होती है, दोनों में प्यार होता है और जल्द ही शादी भी हो जाती है। लेकिन एक झूठ के साथ शुरु हुए रिश्ते में तूफान तब आता है जब परी को मालूम पड़ता है कि उसका पति यानि की बाला गंजा है। वह कहती है- ''स्कूल में मेरे 45 प्रतिशत से ऊपर नंबर कभी नहीं आए, लेकिन फिर भी मैं स्टार थी.. क्योंकि मैं अच्छी दिखती हूं। मेरे लिए अच्छा दिखना मायने रखता है।'' ऐसे में बाला की मदद उसकी बचपन की दोस्त और वकील लतिका (भूमि पेडनेकर) करती है, जो कि अपने सांवलेपन को लेकर बचपन से ताने सुनती आई है, लेकिन उसे खुद पर विश्वास है और दूसरों की सोच से उसे फर्क नहीं पड़ता।

    बाला गंजेपन की हीनभावना से निकल पाएगा या क्या उसे अपने गंजेपन का परमानेंट इलाज मिलेगा? फिल्म की पूरी कहानी इसी के इर्द गिर्द घूमती है।

    अभिनय

    अभिनय

    बालमुकुंद शुक्ला बने आयुष्मान खुराना ने एक बार फिर जता दिया है कि वह किसी भी किरदार में अपना 100 प्रतिशत लगा देते हैं। एक दृश्य में गंजेपन को लेकर झुंझलाहट दिखती है, तो दूसरे दृश्य में अकड़.. कहीं रोमांस का जादू चलाया है, तो कहीं दोहरी मानसिकता दिखी है। कानपुर के 25 वर्षीय युवा के किरदार में आयुष्मान परफेक्ट हैं। लखनऊ की टिकटॉक स्टार के रोल में यामी गौतम बेहद खूबसूरत दिखी हैं। वहीं, एक सांवलेपन से जूझती लड़की के किरदार में भूमि पेडनेकर ने कमाल की अदाकारी दिखाई है। फर्स्ट हॉफ में उन्हें ज्यादा जगह नहीं मिली है, लेकिन फिल्म के सेकेंड हॉफ में वकील बनीं भूमि काफी दमदार दिखी हैं। बतौर सह कलाकार सौरभ शुक्ला, सीमा पाहवा, अभिषेक बैनर्जी और धीरेन्द्र कुमार गौतम ने अपने किरदारों के साथ न्याय किया है। लेकिन जावेद जाफरी को निर्देशक ने काफी कम इस्तेमाल किया है, इसका शिकवा रहेगा।

    निर्देशन

    निर्देशन

    स्त्री की बेजोड़ सफलता के बाद निर्देशक अमर कौशिक के लिए वही जादू दोहराना आसान नहीं रहा होगा। लेकिन 'बाला' के साथ शत प्रतिशत उन्होंने एक बार फिर दिल जीत लिया है। गंजेपन और समाज में फैली दोहरी मानसिकताओं पर सवाल उठाती यह फिल्म खुद से प्यार करना सिखा जाएगी। गंजे, मोटे, काले, नाटे होने में कोई शर्म नहीं होनी चाहिए क्योंकि यह कोई दोष नहीं है। समाज की मानसिकता को हम तभी बदल सकते हैं, जब हम खुद अपने आप को पूरे विश्वास के साथ अपनाते हैं। फिल्म सिर्फ गंजेपन पर ही नहीं, बल्कि रंगभेद और सोशल मीडिया एडिक्शन जैसे कई सामाजिक- मानसिक मुद्दों को छूती हुई निकल जाती है। फिल्म का फर्स्ट हॉफ बहुत ही मजबूत है, सेकेंड हॉफ में कहानी थोड़ी खिंची सी लगने लगती है, लेकिन शानदार क्लाईमैक्स के साथ फिल्म सिर्फ अच्छी यादें छोड़ती हैं। फिल्म में भरपूर इंटरटेनमेंट हैं, लेकिन साथ ही साथ कई बातें ऐसी भी कही गई हैं जो युवाओं के लिए समझना बेहद जरूरी है।

    तकनीकि पक्ष

    तकनीकि पक्ष

    निरेन भट्ट ने दिखा दिया कि बढ़िया लेखन में कितना दम होता है। फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष है इसके संवाद (डायलॉग्स)। बाला के एक एक डायलॉग इतने मजेदार और व्यंग से भरे हैं कि आप शुरूआती कुछ मिनटों में ही कहानी से जुड़ जाते हैं। एक सीन में लतिका ढांढस बंधाते हुए बाला को कहती हैं- ''जब पूरा उत्तर प्रदेश भगवान के नाम पर चल रहा है तो तुम्हारी भी कट ही जाएगी..''। फिल्म की बेहतरीन एडिटिंग के लिए हेमंती सरकार की तारीफ भी जरूर होनी चाहिए।

    संगीत

    संगीत

    सचिन जिगर का संगीत काफी अच्छे तरीके से फिल्म में पिरोया गया है। गाने कहीं भी फिल्म को रोकती नहीं है। 90s के गानों पर हीरो हीरोइन का थिरकना दिल जीत लेता है।

    देंखे या ना देंखे?

    देंखे या ना देंखे?

    आयुष्मान खुराना की फिल्में ज्ञान के साथ साथ इंटरटेनमेंट का पूरा ख्याल रखती है और 'बाला' भी कुछ ऐसी ही फिल्म है। 'स्त्री' के बाद अमर कौशिक ने एक बार फिर अपने सधे हुए निर्देशन से दिलों को जीता है। एक अच्छी कहानी, अर्थपूर्ण मैसेज और सभी कलाकारों की बेहतरीन अदाकारी के लिए 'बाला' जरूर देंखे। फिल्मीबीट ओर से बाला को 4 स्टार।

    English summary
    Ayushmann Khurrana, Bhumi Pednekar and Yami Gautam starrer film Bala is inspiring and entertaining. The film is directed by Amar Kaushik.
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