Baaghi 2 Review: टाइगर श्रॉफ का जबरदस्त एक्शन धमाका, लेकिन फिल्म खा गई मात
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बागी 2 में एक सीन है जिसमें एक कैरेक्टर कहता है "वन मैन आर्मी के बारे में सुना है, वो अकेला ही पूरी फौज के बराबर है।" ये आदमी टाइगर श्रॉफ है, जो अपनी एक्स गर्लफ्रेंड की मदद के लिए मार-धाड़ और खून-खराबा करता है और पुलिस लॉकअप में बंद होकर जमकर मार खाने के बाद "जो तेरा टॉर्चर है.. वो मेरा वॉर्मअप है" जैसी लाइनें बोलता दिख जाता है। जहां एक तरफ बागी 2 प्रभास की फिल्म वर्षम से काफी इंस्पॉयर्ड लगती है। वहीं इसकी जड़ें 2016 में आई तेलुगु फिल्म क्षनम से जुड़ी हैं। टाइगर की इस फिल्म में आपको जबरदस्त एक्शन और शक्ति का प्रदर्शन देखने को मिलेगा लेकिन फिल्म आपको मिक्सड फीलिंग के साथ छोड़ेगी।

प्लॉट की बात करें तो बागी 2 शुरू होती है गोवा में एक सीन से जहां नेहा (दिशा पटानी) को दो मास्क पहने हुए आदमी बुरी तरह पीटते हैं। इसी बीच, कश्मीक में पोस्टेड रनवीर प्रताप सिंह aka रॉनी (टाइगर श्रॉफ), जो कि स्पेशल फोर्स कैप्टन हैं, वे अपने देश प्रेम में व्यस्त होते हैं।
अपनी एक्स नेहा के एक कॉल पर हमारा हीरो कई वादियों से होते हुए सीधा गोवा पहुंच जाता है। अपने टूटे दिल को अब तक संभार रहा रॉनी नेहा की एक कॉल पर उसके पास जाने का डिसीजन ले लेता है। वहां जाकर पता चलता है कि नेहा की बेटी को किडनैप कर लिया गया है। वहीं इस पर नेहा कहती है कि "मैं सेलफिश नहीं हूं, मैं बस डेस्परेट हूं" ये डायलॉग सच में कंफ्यूज करने वाला था।
खैर, एक अच्छे एक्स ब्वॉयफ्रेंड की तरह रॉनी नेहा की खोई हुई बेटी को खोजने में मदद करता है। इसी बीच रॉनी को नेहा के साथ बिताए अपने पुराने दिन याद आते हैं। वहीं दूसरी तरफ फिल्म में ट्विस्ट तब आता है, जब रॉनी के सामने ही नेहा बिल्डिंग से कूद कर जान दे देती है और इसी के बाद रॉनी बन जाता है 'प्यार के लिए बागी।' नेहा ने आत्महत्या क्यों की और रिया कहां है, बाकी की फिल्म इन्हीं सवालों के जवाब ढूंढ़ते हुए निकलती है।
वहीं जब बात हड्डियां तोड़ने की आती है तो टाइगर श्रॉफ अपने पंच और एयर स्ट्राइक से ऑडिएंस को स्क्रीन पर चिपकाए रखते हैं। फिल्म देखकर एक बात को साफ है कि टाइगर श्रॉफ अपनी परफॉर्मेंस पर काफी काम कर रहे हैं लेकिन हम उन्हें एक सलाह जरूर देना चाहेंगे कि प्लीज अपने कॉमेडी सीन्स पर भी थोड़ा ध्यान दें! जब बात एक्शन की आती है तो टाइगर वाकई दहाड़ते हैं और उनके स्लोमोशन शॉट्स भी बेहतरीन हैं।
दिशा पटानी बेहद खूबसूरत लगी हैं और दोनों की कैमिस्ट्री भी खूब जमी है। वहीं उनकी एक्टिंग कुछ खास इंप्रेस नहीं करती।
मनोज वाजपेई इस फिल्म में हमेशा की तरह शानदार लगे हैं। ड्रग एडिक्ट के किरदार में क्रेजी हरकतें हुए प्रतीक बब्बर काफी अच्छे लगे हैं। मजाकिया पुलिस वाले के किरदार में रणदीप हुड्डा की कॉमेडी और उनका एक्शन दोनों की बेहतरीन लगे हैं। वहीं दर्शन कुमार को कुछ खास रोल नहीं मिल पाया है और दीपक डोबरियाल भी अच्छे लगे हैं।
कोरियोग्राफर से डायरेक्टर बने अहमद खान ने फूल एंड फाइनल के बाद 8 साल के लंबे गैप के बाद वापसी की है। 8 साल पहले आई उनकी फिल्म फूल एंड फाइनल ने काफी निराश किया था। वहीं क्या वे ऑडिएंस को इस बार इंप्रेस कर पाए? जवाब है- कुछ हद तक ही! फिल्म में उनका डायरेक्शन काफी कंफ्यूजन क्रिएट करता है। कह सकते हैं कि रोमैंस, एक्शन और थ्रिल को परफेक्ट तरीके से दिखाने में अहमद खान फेल हुए हैं।
वहीं इप्रेस नहीं कर पाने के पीछे दूसरा कारण है फिल्म बागी 2 का बेहद खराब म्यूजिक। फिल्म के गाने सिचुएशन पर फिट बैठते नहीं नजर आते वहीं जैक्लीन फर्नांडीस का आइटम सॉन्ग एक दो तीन तो कानों में चुभता मालूम होता है। वहीं मुंडिया और ओ साथी ठीक-ठाक हैं तो लो सफर अच्छा कहा जा सकता है।
सनातन कृष्णन रविचंद्रन की सिनेमैटोग्राफी बेहतरीन लगती है। हालांकि रामेश्वरम एक भगत की एडिटिंग कुछ सीन्स में काफी खराब दिखती है।
फिल्म की बात करें तो बागी 2 पूरी तरह से टाईगर श्रॉफ की फिल्म है। वे वाकई वन मैन आर्मी साबित हुए हैं। वहीं फिल्म की नय्या डायरेक्शन और लेखन ने डुबाई है। टाईगर की एक्शन के लिए फिल्म देखी जा सकती है। वहीं जैक्लीन फर्नाडीस ने एक दो तीन गाने के साथ बागी 3 का काउंटडाउन शुरू कर दिया है। वहीं "अभी तो मैनें बस स्टार्ट किया है" जैसे डायलॉग्स के साथ किक, पंच और फ्लाई करते हुए टाइगर श्रॉफ बेहतरीन दिखे हैं।


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