#FilmReview: अज़हर, 1 करोड़...मैच फिक्स...बिका या टिका!
फिल्म - अज़हर
इमरान हाशमी स्टारर मोहम्मद अज़हरूद्दीन पर बनी फिल्म इसी एलान के साथ शुरू होती है कि ये बायोपिक नहीं है। टोनी डीसूज़ा ने अज़हरूद्दीन की ज़िंदगी के उन पन्नों को पलटा है जहां कुछ लिखा ही नहीं था।
कोई भी चीज़ अच्छी या बुरी नहीं हो सकती। इस दुनिया में सब कुछ सफेद या सब कुछ काला भी नहीं हो सकता। वैसे ही सही या गलत भी हर चीज़ नहीं हो सकती। सब कुछ होता है तो बीच में जिसे अंग्रेज़ी में कई मर्तबा ग्रे कह दिया जाता है। और इसी 'बीच' की कहानी है अज़हर की ज़िंदगी।

मोहम्मद अज़हरूद्दीन, भारतीय क्रिकेट के इतिहास के सबसे सफल कप्तान। लेकिन सफलता जितनी जल्दी फलक पर पहुंचाती है उतनी ही तेज़ी से नीचे ज़मीन पर लाकर पटकती है और इस ऊठापटक की जीती जागती मिसाल थे मोहम्मद अज़हरूद्दीन।
1996 में एक मैच फिक्सिंग के इल्ज़ाम ने उनकी ज़िंदगी और करियर दोनों ही तबाह कर दिए। अज़हर ने देश को बेचा था? अज़हर ने अपने प्रोफेशन के साथ गद्दारी की थी? अज़हर ने सट्टेबाज़ों से पैसे लिए थे? अज़हर ने मैच फिक्स किया था?
इन सब सवालों की कलई एक एक कर ये फिल्म खोलती है जो कि एक बेहतरीन ड्रामा के सारे फ्लेवर देती है। जानिए फिल्म रिव्यू -


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