AMKDT Review: स्लो फिल्म को अजय देवगन और तब्बू की जोड़ी ने बचाने की कोशिश की, नीरज पांडे का एक्सपेरिमेंट फेल!

Auron Mein Kahan Dum Tha

Rating:
2.5/5

Cast: Ajay Devgn, Saiee Manjrekar, Tabu, Shantanu Maheshwari

Director: Neeraj Pandey

Auron Mein Kahan Dum Tha Review: जैसा कि फिल्म का टाइटल बताता है- 'औरों में कहा दम था', वाकई औरों में कहां ही दम था क्योंकि अपना बुरा करने के लिए खुद अजय देवगन यानि कृष्णा जो बैठा था। जी हां, फिल्म में एक प्रेम कहानी है और वो कहानी कृष्णा और वसुधा के ईर्द-गिर्द घूमती है। कृष्णा का रोल निभाया है- शांतनु महेश्वरी और अजय देवगन ने और वसुधा का रोल निभाया है- साई मांजरेकर और तब्बू ने।

क्या है कहानी

फिल्म की कहानी शुरू होती है एक सीन से जहां कृष्णा वादा करता है कि वो अपने और वसुधा के बीच किसी को नहीं आने देगा। फिर शॉट आता है जेल का जहां कृष्णा डबल मर्डर के इल्जाम में 25 साल की सजा भुगत रहा है। लेकिन उसके अच्छे बर्ताव की वजह से उसे दो साल पहले ही रिहा किया जाना है। लेकिन वो जेल से बाहर नहीं जाना चाहता क्योंकि वो वसुधा की शादीशुदा जिंदगी में कोई दखलअंदाजी नहीं देना चाहता।

पूरी की पूरी फिल्म बैकग्राउंड स्टोरी पर चलती है। वसुधा और कृष्णा की प्रेम कहानी को लैला-मजनू, हीर-रांझा जैसा महान दिखाने की भी कोशिश की गई है। एक आशिक जो बिना किसी शर्त प्यार करता है और वो अपनी वसुधा के लिए खुद का अस्तित्व भी खत्म करने को भी तैयार है। फिल्म काफी ज्यादा स्लो है और फिल्म का बस एक ही इमोशन नजर आता है, जो एक समय के बाद फिल्म को काफी बोर बना देता है। हालांकि, इसमें हंसी-मजाक के कुछ एलीमेंट जोड़ने के लिए कृष्णा के दोस्त का सहारा लिया गया है लेकिन वो भी बस दो-तीन सीन तक ही सीमित है। फिल्म में कई लूपहोल भी हैं और अगर आप थोड़ा दिमाग लगाएंगे तो आपको लगेगा कि इनकी प्रेम कहानी का अंजाम हैप्पी एंडिंग भी हो सकता था।

इस फिल्म में एक सीन है, जहां से कृष्णा और वसुधा की जिंदगी बदल जाती है। उस सीन को एक बार नहीं, दो बार नहीं बल्कि चार-चार बार दिखाया है और उस सीन को बार-बार देखकर आपको भी ऊबाऊपन महसूस होने लगेगा।

कैसी है एक्टिंग

फिल्म में सभी किरदारों ने अच्छी एक्टिंग की है। साई मांजरेकर अपने रोल में काफी फिट बैठी हैं और उनके इमोशन ऑन पॉइंट नजर आए। शांतनु ने कृष्णा के यंगर वर्जन में अपने टोन को पकड़कर रखा और उन्होंने भी अच्छी तरह से अपना किरदार निभाया। अजय देवगन को आप पूरी फिल्म में सिर्फ एक ही इमोशन में देखेंगे लेकिन उनकी डायलॉग डिलीवरी कमाल की है। तब्बू ने भी फिल्म में शानदार काम किया है और जिम्मी शेरगिल की जरा सी स्क्रीन प्रेजेंस ने भी फिल्म में एक हल्का सा स्पाइस एलीमेंट ऐड किया है।

कैसा है डायरेक्शन

नीरज पांडे जिन्हें स्पेशल 26, बेबी, ए वेडनसडे जैसी बेहतरीन फिल्मों के लिए जाना जाता है, उनसे इस तरह की स्लो फिल्म की उम्मीद नहीं थी। नीरज पांडे ने पहली बार एक शुद्ध प्रेम कहानी का निर्देशन किया है और उनका ये एक्सपेरिमेंट कुछ ज्यादा सफल होता नहीं दिख रहा है। नीरज पांडे बेहद अच्छे डायरेक्टर हैं और इस बार उन्होंने अपनी लीक से हटके कुछ करने की कोशिश की है और फिल्म को देखकर लग रहा है कि उन्हें इस फिल्म में थोड़ा और मसाला और सस्पेंस जोड़ने की जरूरत थी।

फाइनल रिव्यू

अगर आप अजय देवगन और तब्बू की केमिस्ट्री के फैन हैं तो आपको यह फिल्म देखनी चाहिए लेकिन अगर आप इन एक्टर्स की वजह से एक अच्छी कहानी की उम्मीद कर रहे हैं तो यहां आपकी भावनाएं आहत हो सकती हैं। अगर आप फ्री हैं और थिएटर में जाकर आपको मूवी देखना पसंद है तो आप ये फिल्म देख सकते हैं वरना इस इस फिल्म को छोड़ भी सकते हैं। फिल्मीबीट हिंदी की तरफ से इस फिल्म को मिलती है 2.5 रेटिंग।

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