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    'अंतिम: द फाइनल ट्रूथ' फिल्म रिव्यू - सलमान खान और आयुष शर्मा के 6 पैक एब्स से आगे भी है कहानी

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    निर्देशक- महेश मांजरेकर

    कलाकार- सलमान खान, आयुष शर्मा, महिमा मकवाना, महेश मांजरेकर, सचिन खेडेकर

    Rating:
    3.0/5

    "तू जानता है क्या अपुन है पूना का नया भाई" राहुल अकड़ के साथ पुलिस इंस्पेक्टर राजवीर सिंह से कहता है, तो राजवीर कहता है, "तू पूना का नया भाई है.. तो मैं पहले से ही पूरे हिंदुस्तान का भाई हूं"। राजवीर सिंह का किरदार निभा रहे सलमान खान के इस डायलॉग को सुनते ही हॉल में कुछ सीटियों की आवाज आई। जाहिर है यह डायलॉग सलमान फैंस को ध्यान में रखकर ही शामिल किया होगा और निर्देशक उनका ध्यान आकर्षित करने में सफल रहे।

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    'अंतिम: द फाइनल ट्रुथ' हिट मराठी फिल्म 'मुल्शी पैटर्न' की आधिकारिक रीमेक है। यह गांव के एक युवा राहुल (आयुष शर्मा) की कहानी है, जो पुणे के सबसे खूंखार भू-माफियाओं में से एक बन जाता है। लेकिन पॉवर हासिल करने के इस रास्ते में वह कई दुश्मन बना लेता है। इन्हीं में से एक है पुलिस इंस्पेक्टर राजवीर सिंह (सलमान खान)। राहुल से माफिया बने राहुलिया का रास्ता कौन और कैसे रोकता है, यही है फिल्म की कहानी।

    कहानी

    कहानी

    राहुल अपने परिवार के साथ महाराष्ट्र के मुलशी में रहता है, जहां उसके गरीब किसान पिता सत्या (सचिन खेडेकर) को मजबूरी में अपने खेत भू-माफियों को बेचना पड़ता है। निर्देशक पहली सीन से ही राहुल का बागीपन दिखा देते हैं। वहां के जमींदार से हाथापाई होने के बाद, पूरे परिवार को गांव से पुणे आना पड़ता है। पुणे में जहां उसके पिता मजदूरी कर कुछ पैसे कमाते हैं, राहुल माफियाओं से टक्कर लेने और उन्हें खत्म करने के चक्कर में उन्हीं के साथ क्राइम के दलदल में उतरता चला जाता है। जल्द ही वो शहर के बेरोजगार राहुल से पुणे का सबसे खतरनाक गैंगस्टर राहुलिया बन जाता है। राहुलिया को पॉवर का चस्का ऐसा लगता है कि वो गैंगस्टर से लेकर महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री तक बनने का ख्वाब बुनने लगता है। लेकिन उसके इस ख्वाब को भंग करने कहानी में आते हैं पुलिस इंस्पेकर राजवीर सिंह, जिनका मानना है कि क्राइम को क्राइम से ही खत्म करो। वो सभी माफियाओं को एक दूसरे से भिड़ाकर शहर की गंदगी कम करते हैं, लेकिन राहुलिया का रास्ता कौन रोकेगा- उसके कर्म या कानून?

    निर्देशन

    निर्देशन

    महेश मांजरेकर ने साल 1999 में संजय दत्त के साथ मिलकर एक जबरदस्त फिल्म बनाई थी- 'वास्तव', जिसमें एक युवा लड़के के गैंगस्टर बनने की कहानी थी। 'अंतिम' कहीं ना कहीं उसकी याद दिलाती है। लेकिन अच्छी बात है कि यहां फिल्म का ट्रीटमेंट बिल्कुल अलग रखा गया है। इस फिल्म से आप इमोशनल कनेक्ट नहीं हो पाते हैं, लेकिन फिल्म के किरदार शुरु से अंत तक बांधे रखते हैं। कहानी का फ्लो कहीं नहीं टूटता है। एक्शन, ड्रामा, मसाला के साथ साथ उन्होंने कहानी के मुख्य आधार को पकड़कर रखा है। कहानी महाराष्ट्र की है, लिहाजा कई मराठी कलाकारों को शामिल किया गया है, जो एक पॉजिटिव पक्ष में काम करता है। साथ ही आयुष शर्मा और सलमान खान को अलग अंदाज में पेश करने के लिए महेश मांजरेकर की तारीफ होनी चाहिए। वहीं, कमियों की बात करें तो सबसे बड़ी कमी है कि फिल्म मौजूदा समय में पिछड़ी हुई लगती है। गलती से क्राइम की दुनिया में आए युवाओं की कहानी हमने देखी है और मूल कहानी यहां भी अलग नहीं है। शायद इसीलिए फिल्म भावनात्मक तौर पर जुड़ नहीं पाती।

    अभिनय

    अभिनय

    साल 2018 में फिल्म 'लवयात्री' से फिल्मों में कदम रखने वाले आयुष शर्मा को महेश मांजरेकर ने इस फिल्म में बिल्कुल ही अलग लुक में पेश किया है। आंखों में गुस्सा और 6 पैक एब्स लिये आयुष ने अपने किरदार के लिए कितनी मेहनत की है, यह पर्दे पर साफ दिखता है। राहुल के दर्द, भावुकता और ढ़ीठता को उन्होंने जीने की बेहतरीन कोशिश की है। हालांकि अभी उन्हें अपने एक्सप्रेशन पर और काफी काम करना है। वहीं, अभिनेत्री महिमा मकवाना ने इस फिल्म से बॉलीवुड में कदम रखा है। उन्होंने अच्छा काम किया है, लेकिन आयुष और महिमा की कैमिस्ट्री कुछ नीरस लगती है। बहरहाल, फिल्म की खास बात है कि सलमान खान की पर्सानैलिटी के सामने आयुष कहीं भी दबे नजर नहीं आए हैं। पुलिस इंस्पेकर राजवीर सिंह बने सलमान खान एक बार फिर अपने दबंग अवतार में हैं। शर्ट फाड़ते, गुडों को दौड़ा दौड़ाकर पीटते और डायलॉगबाजी करते सलमान ने अपने फैंस को सीटियां बजाने का काफी मौका दिया है।

    तकनीकी पक्ष

    तकनीकी पक्ष

    महाराष्ट्र के ग्रामीण और शहरी परिवेश को सिनेमेटोग्राफर करण रावत ने बढ़िया दिखाया है। वहीं, एडिटर बंटी नागी कुछ दृश्यों में दिल जीतते हैं, जैसे कि फिल्म के क्लाईमैक्स में पुणे के सड़कों पर दौड़ता राहुल और फ्लैशबैक में चल रही उसके फैसलों की झलकियां एक बेहतरीन दृश्य है। लेकिन कुछ दृश्य और संवाद काफी ढूंसे गए लगते हैं। खासकर फिल्म का सेकेंड हॉफ बहुत खींचा हुआ लगता है, जिस वजह से क्लाईमैक्स खास प्रभाव नहीं छोड़ता।

    संगीत

    संगीत

    फिल्म का म्यूजिक कंपोज किया है रवि बसरूर और हितेश मोदक ने। फिल्म में कुल चार गाने हैं और चारों ही औसत हैं। गणपति वर्सजन वाले गाने विघ्नहर्ता में वरुण धवन का कैमियो है, जो थोड़ी दिसचस्पी जगाती है। बाकी गाने कोई छाप नहीं छोड़ते।

    क्या अच्छा क्या बुरा

    क्या अच्छा क्या बुरा

    फिल्म की कहानी, किरदार, परफॉर्मेंस, एक्शन सीन्स और बैकग्राउंड स्कोर इसके पॉजिटिव पक्ष हैं। वहीं, जो सबसे बड़ी कमी है वो है इमोशनल कनेक्शन। फिल्म के मुख्य किरदार राहुलिया को दर्शकों से सहानुभूति चाहिए, लेकिन औसत क्लाईमैक्स की वजह से वह उसे मिल नहीं पाता।

    देंखे या ना देंखे

    देंखे या ना देंखे

    90 के दशक में बनी गैंगस्टर ड्रामा फिल्में यदि आपको आज भी पसंद आती हैं, तो 'अंतिम: द फाइनल ट्रूथ' आपको काफी पसंद आएगी। भू माफियाओं द्वारा किसानों को सताए जाने जैसे मुद्दों पर बनी इस फिल्म में कमियां हैं, लेकिन यह एक बार थियेटर में जरूर देखी जा सकती है। फिल्मीबीट की ओर से फिल्म को 3 स्टार।

    English summary
    Mahesh Manjrekar delivered a typical gangster action- drama with a flavour of 90s in it. Aayush Sharma and Mahima Makwana are sincere in their efforts. And Salman Khan is full of swag.
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