Aankhon Ki Gustaakhiyan Movie Review: विक्रांत मैसी का सबसे कमजोर काम, शनाया के साथ नहीं जमी जोड़ी

Aankhon Ki Gustaakhiyan

Rating:
2.0/5

Aankhon Ki Gustaakhiyan Movie Review: फेमस राइटर रस्किन बॉन्ड की कहानी 'The Eyes Have It' पर बेस्ड फिल्म 'आंखों की गुस्ताखियां' का ट्रेलर जब सामने आया, तो दर्शकों को इससे काफी उम्मीदें थीं। ट्रेलर में विक्रांत मैसी और शनाया कपूर की जोड़ी काफी अच्छी लगी थी और लोगों को लगा कि एक सधी हुई रोमांटिक फिल्म देखने को मिलेगी। तो क्या आपको ये फिल्म देखनी चाहिए या स्किप करनी चाहिए आइए इस रिव्यू में जानें।

क्या है कहानी

फिल्म की कहानी दो अजनबियों - जहान और सबा - के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनकी मुलाकात एक ट्रेन के डिब्बे में होती है। जहान एक ऐसा म्यूजिशियन है, जिसे दिखता नहीं है। जबकि सबा एक थिएटर आर्टिस्ट है जो अंधे शख्स के किरदार को निभाने के लिए खुद आंखों पर पट्टी बांध लेती है। दोनों का सफर मसूरी की ओर होता है, जहां बातचीत के दौरान उनकी नजदीकियां बढ़ती हैं। लेकिन अचानक ही जहान, सबा को बिना कुछ बताए छोड़कर चला जाता है। फिल्म यहीं से धीमी पड़ जाती है और फिर कहानी वह पकड़ नहीं बना पाती जो शुरुआत में नजर आ रही थी।

कैसी है फिल्म

फिल्म का डायरेक्शन संतोष सिंह ने किया है, जो इससे पहले 'ब्रोकन बट ब्यूटीफुल' जैसी वेब सीरीज बना चुके हैं। लेकिन लगता है इस बार वह कहानी की गहराई को स्क्रीन पर उतारने में चूक गए। फिल्म का पहला आधा घंटा तो काफी एक्साइटिंग लगता है, लेकिन इसके बाद फिल्म धीरे-धीरे बिखरने लगती है। क्लाइमेक्स का भी अंदाजा आपको फिल्म देखते-देखते लग ही जाएगा। इस फिल्म में कोई भी सरप्राइजिंग एलिमेंट नहीं है।

फिल्म में कई जगह पर लॉजिक की कमी लगी। जैसे- सबा ने आंखों पर पट्टी बांधी होती है, लेकिन उसे ये महसूस नहीं होता कि जहान छड़ी के सहारे चल रहा है। एक गाने में वह उसकी वॉकिंग स्टिक के साथ डांस करती है, लेकिन उसे ये पता ही नहीं है कि ये वॉकिंग स्टिक का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है।

कैसी है एक्टिंग

विक्रांत मैसी हमेशा अपने एक्टिंग से इंप्रेस करते हैं, लेकिन यहां वह एक अंधे शख्स के रोल में पूरी तरह फिट नहीं हो पाए। कुछ सीन में वह सीधे कैमरे की ओर देखते नजर आते हैं। शनाया कपूर की यह पहली फिल्म है और उन्होंने कुछ सीन में ठीक-ठाक काम किया है, लेकिन जैसे ही उनकी आंखों से पट्टी हटती है, उनके एक्सप्रेशन खोखले से दिखने लगती है। दोनों कलाकारों के बीच रोमांटिक केमिस्ट्री की भी आपको कमी महसूस हो सकती है।

फाइनल रिव्यू

'आंखों की गुस्ताखियां' एक ऐसी फिल्म है जो शुरुआत में काफी उम्मीदें देती है, लेकिन अंत में अधूरी-सी लगती है। कहानी में दम था, लेकिन उसे पर्दे पर सही तरीके से पेश नहीं किया गया। अगर आप रोमांटिक ड्रामा के शौकीन हैं और कुछ अलग देखना चाहते हैं, तो इसे एक बार देखा जा सकता है, लेकिन आप इस फिल्म से ज्यादा उम्मीद ना लगाएं तो ही बेहतर होगा। फिल्मीबीट हिंदी की तरफ से इस फिल्म को मिलते हैं 2 स्टार।

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