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    83 फिल्म रिव्यू- कबीर खान, रणवीर सिंह और पूरी टीम की शानदार पारी, गर्व से भर देती है फिल्म

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    Rating:
    4.5/5

    निर्देशक- कबीर खान

    कलाकार- रणवीर सिंह, पंकज त्रिपाठी, ताहिर राज भसीन, जीवा, साकिब सलीम, जतिन सरना, चिराग पाटिल, दिनकर शर्मा, निशांत दहिया, हार्डी संधू, साहिल खट्टर, अम्मी विर्क, आदिनाथ कोठारे, दीपिका पादुकोण

    "35 साल पहले हमलोग आज़ादी जीते, लेकिन इज्ज़त जीतना अभी बाकी है कप्तान", जब भारतीय क्रिकेट टीम के मैनेजर पीआर मान सिंह (पंकज त्रिपाठी) कपिल देव (रणवीर सिंह) से ये कहते हैं, तो आपको अहसास हो जाता है कि ये कहानी सिर्फ विश्व कप जीतने की नहीं, बल्कि इज्ज़त कमाने की है।

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    कप्तान कपिल देव के नेतृत्व में भारतीय क्रिकेट टीम, जिसे अंडरडॉग के रूप में देखा गया था, ने वर्ष 1983 में देश का पहला विश्व कप खिताब जीता। कबीर खान के निर्देशन में बनी '83' एक ऐसी टीम की यात्रा दिखाती है, जिसने संपूर्ण राष्ट्र को विश्वास करना और सपनों को हासिल करना सिखाया। और यह यात्रा आपकी आंखें खुशी के आंसू और दिल गर्व से भर देगा। कहना गलत नहीं होगा कि एक ऐतिसाहिस जीत को बड़े पर्दे पर बखूबी दिखाने में कबीर खान पूरी तरह से सफल रहे हैं।

    कहानी

    कहानी

    फिल्म की शुरुआत होती है बीसीसीआई के कार्यलय से, जहां भारतीय टीम के लिए विश्व कप का निमंत्रण पत्र आया है। वहां हुए संवादों के जरीए पहले कुछ मिनटों में निर्देशक दिखा देते हैं कि देश को भारतीय क्रिकेट टीम के विश्व कप जीतने की कोई उम्मीद नहीं है। विश्व कप से पहले भारतीय टीम का अन्य सीरीज में बेहद खराब प्रदर्शन रहा था। पूरी दुनिया के नजरों में वह नगण्य टीम थी, जो कि पहले दो मैच हारने के बाद और भी सच साबित होने जैसा था। एक मोड़ पर टीम से उम्मीद इतनी कम रह गई थी कि भारत और जिम्बाब्वे के बीच के एक मैच को ब्रॉडकास्ट भी नहीं किया गया था। यह वही मैच था जहां कप्तान कपिल देव ने 175 रनों की शानदार पारी खेलकर इतिहास रचा था।

    टीम के कप्तान कपिल देव को खुद पर और अपनी टीम पर पूरा भरोसा था। जब पूरी दुनिया टीम का मजाक बना रही थी, उनकी जीत को तुक्का बताना और हार पर फब्तियां कस रही थी, उनका कहना था कि जो जवाब देना है मैदान में देंगे, वर्ल्ड कप जीत कर देंगे। यही भरोसा था कि पूरी टीम ने वर्ल्ड कप का नजारा ऐसा बदला.. कि पूरी दुनिया फटी आंखों से देखती रह गई। भारतीय टीम ने 1983 विश्व कप में दो बार विजेता रह चुकी वेस्ट इंडीज टीम को फाइनल में हराकर खिताब अपने नाम किया।

    निर्देशन

    निर्देशन

    एक फिल्म जिसके क्लाईमैक्स से सभी परिचित हैं, निर्देशक कबीर खान ने उस क्लाईमैक्स तक जाने के सफर को इतना बखूबी दिखाया है कि आप अंत तक सीट से बंधे रहने को मजबूर हो जाएंगे। यह सिर्फ एक अंडरडॉग टीम के विनर बनने के बारे में नहीं है, बल्कि निर्देशक ने बड़ी खूबसूरती से विश्व कप के सफर साथ साथ खिलाड़ियों की छोटी छोटी खुशियां, जीत का जश्न, हार का अफसोस, आंतरिक उथल-पुथल और व्यक्तिगत अनुभवों को भी कहानी में शामिल किया है। फिल्म के लेखन की जितनी तारीफ की जाए, कम है।

    फिल्म की शुरुआती सीन में निर्देशक ने पार्सपोर्ट के जरीए पूरी टीम का परिचय दिया है, वह बेहद शानदार दृश्य बन पड़ा है।

    अभिनय

    अभिनय

    रणवीर सिंह अपने हर किरदार में इस कदर रच- बस जाते हैं कि वह किरदार ही उनकी पहचान बन जाती है। 83 के साथ भी ऐसा ही है। क्रिकेट कप्तान कपिल देव की भूमिका में रणवीर ने बेमिसाल काम किया है। चाहे वो नटराज शॉट खेलना हो, कपिल देव जैसी गेंदबाजी का एक्शन करना या उनके जैसी चाल ढ़ाल को रीक्रिएट करना। रणवीर सिंह ने अपनी भूमिका की इमोशन को भी पूरी तरह से पकड़े रखा है। जब वो हाथों में विश्व कप पकड़ते हैं, तो आपके भी आंखों में आंसू आ जाते हैं। हर फ्रेम में वो दिल जीतते हैं। रणवीर के अलावा पंकज त्रिपाठी, ताहिर राज भसीन, जीवा, साकिब सलीम, जतिन सरना, चिराग पाटिल, दिनकर शर्मा, निशांत दहिया, हार्डी संधू, साहिल खट्टर, अम्मी विर्क, आदिनाथ कोठारे भी अपनी अपनी भूमिकाओं में चमकते हैं और फिल्म को मजबूत बनाने में अपना पूरा योगदान देते हैं।

    तकनीकी पक्ष

    तकनीकी पक्ष

    फिल्म का तकनीकी पक्ष बेहद मजबूत है। नितिन बैद की एडिटिंग फिल्म को एक स्तर ऊपर ले जाती है। फिल्म में कई मौकों पर निर्देशक ने वास्तविक मैच के रील को अपनी फिल्म के साथ जोड़ा है। यह दर्शकों को फिल्म से और ज्यादा जोड़ देता है। वास्तविक मैच और कबीर खान की फिल्म के मैच में इतनी समानता दिखती है कि लगता है आप किसी मैदान में बैठकर क्रिकेट देख रहे हैं। हर बॉल, हर विकेट को दिखाया गया है। वहीं, असीम मिश्रा की सिनेमेटोग्राफी भी काफी जबरदस्त रही है।

    संगीत

    संगीत

    फिल्म का संगीत दिया है प्रीतम ने। फिल्म में दो गाने हैं 'लहरा दो' और 'बिगड़ने दे' ; जो बैकग्राउंड में चलते हैं। इस डिपार्टमेंट में थोड़ा और काम किया जा सकता था। अच्छा संगीत किसी भी फिल्म की जज्बात को और भी बखूबी दर्शकों तक पहुंचा सकता है।

    देंखे या ना देंखे

    देंखे या ना देंखे

    बहरहाल, 83 जैसी फिल्में बार बार नहीं बनतीं। कबीर खान के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक ऐसी महत्वपूर्ण जीत को दिखाती है, जिसके बारे में हम सबने पढ़ा या सुना है, उसे बड़े पर्दे पर देखने का अनुभव रोंगटे खड़े कर देता है। कबीर खान के शानदार निर्देशन, रणवीर सिंह के बेजोड़ अभिनय और 1983 विश्व कप की यादें ताजा करने के लिए ये फिल्म जरूर देंखे। फिल्मीबीट की ओर से 83 को 4.5 स्टार।

    English summary
    83 Film Review - Director Kabir Khan delivers a great innings with Ranveer Singh and team. With story of India’s first world cup victory, he touches the right strings of audiences heart.
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