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    1921 रिव्यू..हॉरर फिल्म...लेकिन डर से ज्यादा कॉमेडी..एक और मजाक

    By Madhuri
    |
    1921 Public Review: Zareen Khan | Karan Kundra | Movie Review | FilmiBeat

    Rating:
    1.5/5
    Star Cast: जरीन खान, करण कुंद्रा, विक्रम भट्ट, सोनिया आर्मस्ट्रांग, निधि चित्रकार
    Director: विक्रम भट्ट

    प्रोड्यूसर- विक्रम भट्ट

    लेखक-विक्रम भट्ट

    क्या है खास- म्यूजिक, सिनेमैटोग्राफी

    क्या है गलत- धीमी गति से फिल्म का बढ़ना, स्क्रीनप्ले, वीएफक्स

    आईकॉनिक मोमेंट - कुछ भी नहीं

    विक्रम भट्ट की हर फिल्म की कहानी लगभग वैसी ही होती है। 1921 में भी कुछ वैसा ही है। प्यार - सेक्स - धोखा और भूत। इसी के इर्द गिर्द पूरी फिल्म घूमती है। लेकिन दिक्कत ये है कि फिल्म घूमती ही रह जाती है। आगे बढ़ती ही नहीं है।

    एक लड़का - एक लड़की एक पुरानी हवेली, के पुराने बॉलीवुड फॉर्मूला को विक्रम भट्ट ने शराब और शबाब के साथ पेश करने की कोशिश की है। अब आपको कितना नशा चढ़ता है पता नहीं। लेकिन 1921 को नशे में की गई गलती ही समझ लीजिए तो बेहतर है।

     प्लॉट

    प्लॉट

    साल है 1927, जहां दर्शक जाने माने पेंटर आयुष अस्थाना (करण कुंद्रा) के ग्रैंड परफॉर्मेंस का इंतजार कर रहे हैं। आयुष ने खुद को एक रूम में बंद कर रखा है और नशे में धुत्त वो अपनी कलाई काटकर आत्महत्या करने की कोशिश करता है। इसके बाद फिल्म 1921 का साल दिखाया जाता है।

    मुंबई को छोड़कर आयुष इंगलैंड में एक बहुत बंगले का केयरटेकर बनकर जाता है और न्यूयॉर्क म्यूजिक स्कूल से मास्टर्स करता है। चीजें आयुष के लिए अच्छे से चलती हैं और तीन महीने बीत जाते हैं।अचानक एक रात उसे इतने बड़े बंगले में एक दरवाजा मिलता है और वो इस संदेहास्पद दरवाजे को समझने की कोशिश करता है और दरवाजे को खोल देता है। दरवाजा खुलते ही आत्मा अंदर से बाहर आता है।

    वो स्थिति को समझ पाता आत्मा आ चुकी होती है। अगले दिन आयुष देखता है उसके पेट के पास काले रंग का ध्ब्बा है। इससे डरकर आयुष एक लॉ के छात्र और भूतों को जानने वाली रोज (जरीन खान) से मदद मांगता है। रोज में शक्ति होती है कि वो भूतों से बात कर सकती है। जल्द ही दोनों में प्यार होता है और

    वो भूत आयुष को परेशान करती है और उनसे बदला लेना चाहती है।लेकिन इस बदले के पीछे क्या राज है ये देखने के लिए आपको सिनेमाघर जाना होगा।

    डायरेक्शन

    डायरेक्शन

    विक्रम भट्ट इस विधा में महारथ हासिल कर चुके हैं और एक बार फिर वो रूह की एक कहानी लेकर आए हैं। 1921 में हॉरर फिल्म के लिहाज से कुछ गलतियां हैं, चरमराते दरवाजे, डरावनी हंसी आदि का है। कैंडल लाइट फ्रेम, पोजेस्ड प्रेमी आदि दिखाई देंगे लेकिन शुक्र है कि इस बाद exorcism scenes लगभग ना के बराबर हैं।फिल्म इतने धीमे चलती है कि आपको बोरियत महसूस करेंगे।

    परफॉर्मेंस

    परफॉर्मेंस

    कमजोर स्क्रिप्ट के बाद भी करण कुंद्रा ने अच्छी परफॉर्मेंस दी है और स्क्रीन पर वो दिखने में अच्छे लगे हैं।अक्सर 2 के बाद जरीन खान एक बार 1921 में नजर आई हैं। इस बार वो सिर्फ पाउट करते नजर नहीं आई हैं लेकिन हां उन्हें अपनी एक्टिंग सुधारने की जरुरत है। उनकी करण कुंद्रा के साथ फिल्म में बिल्कुल ठंढी केमेस्ट्री नजर आई है।

    इस फिल्म में विक्रम भट्ट का कैमियो भी है।

    तकनीकी पक्ष

    तकनीकी पक्ष

    प्रकाश कुट्टी ने अपने कैमरे से Vintage Era को बखूबी दिखाया है। हालांकि फिल्म का वीएफएक्स कमजोर जरुर है। 1921 काफी बोरिंग फिल्म है।

    म्यूजिक

    म्यूजिक

    फिल्म में बैकग्राउंड स्कोर हमेशा आपको सुनाई देगा। सुन ले जरा और कुछ इस तरह आपको जरुर इंप्रेस करेंगे।

    Verdict

    Verdict

    हम सिर्फ इतना कह सकते हैं कि 1921 में आपको कुछ फनी डरावने सीन नजर आएंगे और आप चाहें तो इस फिल्म को अपने रिस्क पर देखें।

    English summary
    1921 Movie review story plot and rating.
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