12th Fail Movie Review: विक्रांत मैसी के साथ विधु विनोद चोपड़ा लेकर आए हैं एक शानदार फिल्म, मस्ट वॉच

निर्देशक- विधु विनोद चोपड़ा
कलाकार- विक्रांत मैसी, प्रियांशु चटर्जी, मेधा शंकर, विकास दिव्यकीर्ति, अंशुमान पुष्कर, हरीश खन्ना आदि
"हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा.." चारपाई पर बैठा एक पिता अपने बच्चे को ये पाठ पढ़ा रहा है। छत पर बैठे दूसरे बच्चे के कानों में भी ये लाइनें बरबस चली जाती हैं और ऐसा घर कर जाती हैं कि लाख मजबूरियों और संघर्ष के बावजूद वो चंबल से निकलकर आईपीएस अफसर बन जाता है। '12वीं फेल' की कहानी आपको भावुक करते हुए एक जज्बा दे जाती है। फिल्म के अंत में आप तालियां पीटे बिना शायद ही रह पाएं।
यह फिल्म सिर्फ शिक्षा या छोटे शहरों के बारे में नहीं है - यह कभी हार न मानने के बारे में है। यह रिश्तों के बारे में है, कर्तव्य के बारे में है। 12वीं फेल भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी मनोज कुमार शर्मा की वास्तविक कहानी से प्रेरित है।
कहानी
चंबल में रहने वाला मनोज गांव के आम लड़कों की तरह जिंदगी गुजार रहा होता है। पिता ईमानदार हैं, जिस वजह से निलंबित हैं। परिवार गरीबी से जूझ रहा है। मनोज का एक ही ख्वाब होता है कि जैसे तैसे 12वीं पास कर चपरासी की नौकरी पानी है। लेकिन इस बीच उसका पाला एक पीसीएस अधिकारी से पड़ता है, जिसकी ईमानदारी उसे इस कदर प्रभावित कर जाती है कि उसकी जिंदगी का धुव्र ही बदल जाता है। जिंदगी में पहली बार कोई उससे कहता है कि चीटिंग करना अच्छी बात नहीं है। वह उस बात को गांठ बांध लेता है। 12वीं की परीक्षा में फेल हो जाता है। दूसरी बार में थर्ड डिवीजन पास होता है। स्नातक करता है और दादी की पूरी जमा पूंजी के साथ पीसीएस करने ग्वालियर के लिए निकल पड़ता है। लेकिन जिंदगी जब परीक्षा लेने की ठानती है तो रास्ता कठिन से कठिन बनाती जाती है। मनोज का सफर उसे दिल्ली लाकर खड़ा कर देता है। जहां वो संघ लोक सेवा आयोग की तैयारी करता है। क्या वो खाकी वर्दी पहनकर अपना और अपने परिवार का ख्वाब पूरा कर पाता है? इसी के इर्द गिर्द घूमती है कहानी।
अभिनय
विक्रांत मैसी एक दमदार कलाकार हैं, इसमें कोई दो राय नहीं। लेकिन मनोज के किरदार में वह जिस तरह रच बस गए हैं, आप उनके फैन हुए बिना नहीं रह पाएंगे। पहले फ्रेम से लेकर अंत तक, विक्रांत ने किरदार को इतनी मजबूती के साथ पकड़कर रखा है.. कि आप उनके पूरे सफर में खुद को उनके साथ ही पाएंगे। गांव के मनोज का एक आला अधिकारी की ईमानदारी से प्रभावित होना, दिल्ली की भीड़ में खुद को गुम सा महसूस करना, मेहनत करने का असाधारण जज्बा रखना, रिश्तों में भरोसा जताना और सपनों को पूरा करने जिद करना.. आप हर कदम पर खुद को महसूस करेंगे। कोई शक नहीं कि विक्रांत इस फिल्म को अपने करियर के लिए इतना खास मानते हैं। विक्रांत के अलावा, फिल्म के अन्य कलाकार भी बेहद प्रभावी हैं। गौरी भईया के किरदार में अंशुमान पुष्कर भावुक करते हैं, वहीं, मनोज के पिता के रोल में हरीश खन्ना कमाल करते हैं। प्रियांशु चटर्जी, अनंत जोशी, मेधा शंकर अपने किरदारों से छाप छोड़ते हैं।
निर्देशन व तकनीकी पक्ष
फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका लेखन है। इसकी पटकथा इतनी कसी हुई है कि पल भर भी आपका ध्यान स्क्रीन से भटकाती नहीं है। रंक से राजा बनने की कई कहानियां हमने हिंदी फिल्मों में देखी हैं, लेकिन '12वीं फेल' भावनात्मक स्तर से आपको जोड़ती है। वह किरदारों से आपको लगातार बांधे रखती है। परिंदा, 1942 ए लव स्टोरी, शिकारा जैसी फिल्मों के बाद, विधु विनोद चोपड़ा ने एक बार फिर निर्देशन की कुर्सी संभाला है, और कमाल का काम किया है। फिल्म के संवाद जितने दमदार हैं, उतनी ही बेहतरीन इसकी सिनेमेटोग्राफी है। गांव- देहात से लेकर दिल्ली के मुखर्जी नगर तक, रंगराजन रामबद्रन ने बेहद खूबसूरती से अपने कैमरे में कैद किया है। फिल्म का संपादन जसकुंवर कोहली के साथ मिलकर विधु विनोद चोपड़ा ने किया है, और फिल्म की गति का बखूबी ध्यान रखा है। संगीत के मामले में फिल्म थोड़ी पीछे रह जाती है।
रेटिंग
आईपीएस मनोज कुमार शर्मा की रियल लाइफ पर आधारित फिल्म '12वीं फेल' आपको भावुक करती है, लेकिन साथ ही चेहरे पर एक मुस्कान और इरादों में मजबूती छोड़ जाएगी। शानदार कहानी और दमदार अभिनय के लिए ये फिल्म जरूर देंखे। फिल्मीबीट की ओर से '12वीं फेल' को 4 स्टार।


Click it and Unblock the Notifications













