120 Bahadur review: 120 बहादुर vs चीन की पूरी फौज! फरहान की एक्टिंग पड़ी फीकी, बाकी एक्टर्स ने दिखाया दम

Cast: Farhan Akhtar, Raashii Khanna, Vivan Bhatena, Ankit Siwach, Brijesh Karanwal, Devendra Ahirwar, Digvijay Pratap
Director: Razneesh Ghai
120 Bahadur movie review: भारत की धरती हमेशा से वीरता, साहस और बलिदान की कहानियों का घर रही है। जिन्हें हम बचपन से किताबों में पढ़ते आए हैं और बड़ों से सुनते रहे हैं, अब वही किस्से फिल्मों के जरिए सामने आ रहे हैं। करगिल पर बनी फिल्मों से लेकर बॉर्डर जैसी लोकप्रिय फिल्म तक। अब इस लिस्ट में फरहान अख्तर की नई फिल्म '120 बहादुर' भी शामिल हो गई है। यह फिल्म 1962 में चीन द्वारा किए गए हमले की सच्ची कहानी पर आधारित है।
क्या है कहानी?
'120 बहादुर' 1962 के भारत-चीन युद्ध की सच्ची घटना पर आधारित फिल्म है। कहानी शुरू होती है 18 नवंबर 1962 से, जब एक भारतीय सैनिक बर्फीली पहाड़ियों से घायल हालत में नीचे आता है और बेहोश हो जाता है। इसके बाद फिल्म फ्लैशबैक में पहुंचती है और दिखाती है कि चुशूल में तैनात 13वीं कुमाऊं रेजिमेंट युद्ध की तैयारी कर रही थी।
इस रेजिमेंट के लीडर मेजर शैतान सिंह भाटी और उनके 120 जवान चीन की चालों पर नजर रखते हैं। चीन की योजना चुशूल एयरबेस पर कब्जा कर लद्दाख और जम्मू-कश्मीर पर अपना कंट्रोल बढ़ाने की थी। लेकिन इन 120 जवानों ने अपनी जान देकर इस योजना को नाकाम कर दिया। फिल्म उसी ऐतिहासिक जंग- बैटल ऑफ रेजांग ला की कहानी है।
कैसी है फिल्म?
फिल्म का इमोशनल और पैट्रियोटिक हिस्सा मजबूत है, लेकिन सिनेमाई प्रेजेंटेशन हर जगह इतनी इंपैक्टफुल नहीं दिखती। फिल्म की सबसे बड़ी खूबी है इसकी असली लोकेशंस। इस फिल्म में आपको लद्दाख की खूबसूरती देखने को मिलेगी, जिसे देखकर आपको लगेगा कि एक बार तो लद्दाख जरूर जाना चाहिए। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी काफी अच्छी है। वॉर के सीन काफी बेहतरीन है और क्लाइमैक्स तो आपको एक बार सीटी बजाने पर मजबूर कर देगा।
फिल्म में कई कमिया भी हैं जैसे स्क्रीनप्ले कई जगह धीमा और खिंचा हुआ सा लगता है। कहानी का ट्रीटमेंट रियलिस्टिक जरूर है, लेकिन कुछ सीन इतने फीके हैं कि उसमें इमोशंस का असर कम हो जाता है। तकनीकी रूप से फिल्म अच्छी है, पर ड्रामा और इम्पैक्ट में कमी रह जाती है। फिल्म दर्शकों को वॉर के एनवायरमेंट में लेकर जाती है, लेकिन कुछ जगह इमोशनल जुड़ाव उतना गहरा नहीं बन पाता, जितना एक वॉर मूवी में होना चाहिए।
कैसी है एक्टिंग?
फरहान अख्तर इस फिल्म में लीड रोल मेजर शैतान सिंह के किरदार में नजर आ रहे हैं। फरहान ने किरदार को ईमानदारी से निभाया है, लेकिन कई सीन्स में वह मिसफिट लगते हैं। उनकी डायलॉग डिलीवरी कई बार फ्लैट महसूस होती है।
राशी खन्ना का इस फिल्म में स्क्रीन टाइम कम है लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अच्छा काम किया है। उनका रोल छोटा है पर असरदार।
स्पर्श वालिया, देवेंद्र अहिरवार, दिग्विजय प्रताप, ब्रिजेश करनावल और साहिब वर्मा जैसे नए चेहरे फिल्म की जान बनते हैं। उनकी एक्टिंग नैचुरल है और कई जगह वे फरहान से भी बेहतर दिखाई देते हैं।
फाइनल रिव्यू
'120 बहादुर' एक सच्ची घटना पर आधारित फिल्म है। यह भारतीय सैनिकों की बहादुरी, त्याग और देशभक्ति को ईमानदारी से दिखाती है। लेकिन फिल्म में मौजूद धीमी रफ्तार, कई जगहों पर फीके सीन और लीड एक्टर की थोड़ी कम इपैक्टफुल एक्टिंग की वजह से यह पूरी तरह प्रभाव नहीं छोड़ पाती। ये फिल्म एक बार देखने लायक है, खासकर उन दर्शकों के लिए जो इतिहास और वॉर स्टोरीज पसंद करते हैं। परिवार के साथ देखी जा सकती है, लेकिन यह उतनी दमदार वॉर फिल्म नहीं बन पाई, जितनी इसकी कहानी बनने की क्षमता रखती है। फिल्मीबीट हिंदी की तरफ से फिल्म को मिलते हैं 3 स्टार।


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