एक विवाह ऐसा भी

कहानी है भोपाल में रहने वाली चाँदनी (ईशा कोप्पिकर) की, जो एक मध्यमवर्गीय परिवार से संबद्ध है। नैतिक मूल्यों और संस्कारों में विश्वास करने वाली चाँदनी के परिवार में उसके पिता और दो छोटे भाई-बहन अनुज और संध्या हैं। अपने भाई-बहन से चाँदनी को बेहद स्नेह है।
एक कार्यक्रम में चाँदनी की मुलाकात होती है प्रेम (सोनू सूद) से और दोनों में प्रेम हो जाता है। प्रेम एक अमीर परिवार से है और गाने का उसे सिर्फ शौक है।
चाँदनी और प्रेम की सगाई तय हो जाती है, लेकिन उसी दिन चाँदनी के पिता की मृत्यु हो जाती है। चाँदनी पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ता है। अचानक वह घर की सबसे बड़ी सदस्य बन जाती है।
स्वार्थ से परे जाकर चाँदनी शादी नहीं करने का निर्णय लेती है, ताकि वह अपने छोटे भाई-बहनों की परवरिश कर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा कर सके। चाँदनी के निर्णय को प्रेम अपना समर्थन देता है। वह चाँदनी के संघर्ष, अच्छे और बुरे समय में उसका साथ है।
अपने भाई-बहन को काबिल बनाने में चाँदनी को बारह वर्ष लगते हैं, फिर भी प्रेम बारह वर्ष तक उसका इंतजार करता है। एक लड़की का महिला बनकर संघर्ष की कठिन राह चुनना तथा पुरुष-स्त्री के रिश्ते को इस फिल्म में महत्व दिया गया है।


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