अकेलेपन से हैं परेशान तो देखें सेकेंड मेरिज डॉट कॉम
निर्माताः विन मेहता फिल्म्स
निर्देशकः गौरव पंजवानी
संगीतः मनन मुंजाल और आदित्य अग्रवाल
कलाकारः मोहित चौहान, विशाल नायक, सायानी गुप्ता, चारु रोहतगी, मंजीत टायगर और निकिता मोरे
भारत में शादियों का बहुत महत्त्व है। यहाँ शादी बहुत ही बड़ा उत्सव है पर इसके बावजूद दूसरी शादी को बुरी नजर से देखा जाता है। लेकिन बदलते समय और हालात के साथ लोगों के सोच में भी बदलाव आ रहा है, उनकी सोच विकसित हो रही है। एक ऐसी ही अवधारणा 'दूसरी शादी' पर आधारित है फिल्म " सेकेंड मैरेज डाट कॉम"।

फिल्म के निर्माता विनोद मेहता का कहना है कि "युवा निर्देशक गौरव ने जब मुझे फिल्म की कहानी सुनाई तो मैं अपने आप को हाँ कहने से रोक नहीं पाया क्योंकि फिल्म का कंसेप्ट बिलकुल ही अलग था। इस फिल्म में यह समझाने को कोशिश की गई है कि दूसरी शादी कोई मुसीबत नहीं है बल्कि बहुत सारी मुसीबतों का हल है जो कि अकेलेपन की वजह से होती है। इस फिल्म में कोई बड़ी स्टार कास्ट नहीं है लेकिन मुझे विश्वास है कि फिल्म की कहानी और कंसेप्ट के सामने सितारों की कमी नहीं खलेगी। "
फिल्म की कहानी शुरू होती है दिल्ली के एक युवा आई टी प्रोफेशनल अक्षय से जो अपने विधुर पिता सुनील नारंग के अकेलेपन को खत्म करने के इरादे से उनके लिए एक जीवनसाथी की तलाश मे निकल जाता है।
फिल्म की कहानी आगे बढ़ती है जब उसे एक वेबसाइट "सेकेंड मैरेज डाट कॉम" से एक तलाकशुदा महिला शोमा मिलती है जो की एक लड़की की माँ है।
अक्षय, सुनील का बेटा और पूनम, शोमा की बेटी दोनों अपने माता-पिता को नजदीक लाने के लिए कोशिश करते है और एक दूसरे के साथ एक नये बंधन मे बंधन मे बांध जाते है। जब उन को लगता है की सब कुछ ठीक होने वाला है तब अचानक कहानी में मोड आता है। पूनम और अक्षय को महसूस होता है की वो एक दूसरे के काफी नजदीक आ गए है और एक दूसरे से प्यार करने लगे है।
इस फिल्म की कहानी समाज को एक चुनौती देती है इसलिए बहुत ही रिसर्च करने के बाद काफी सत्य तथ्यों को ध्यान मे रख कर बनायीं गई है। इसमें एकसाथ कई भावनाओं जैसे ड्रामा, कॉमेडी, रोमांस आदि को पर्दे पर उतारने की कोशिश की गई है।
फिल्म के निर्देशक गौरव पंजवानी जिनकी ये पहली फीचर फिल्म है कहते है कि "हमारा भारत हमेशा विचारों मे प्रगतिशील रहा है पर हमारे समाज मे दूसरी शादी को कभी भी अच्छा नहीं माना गया। हालाँकि अभी पिछले कुछ सालों मे इस सोच मे बदलाव आया है । अब खास कर महानगरों मे लोग दूसरी शादी के बारे मे सोच रहे है। सच क्या है जानने के लिए मैं कई मध्यम उम्र के विधवाओं और तलाकशुदा लोगों से मिला और उन के समस्यों के बारे मे जाना। उन से मिल कर मुझे लगा की मुझे इस विषय पर जरुर फिल्म बनानी चाहिए। "
फिल्म जल्दी ही सिनेमा घरों मे प्रदर्शित होगी.


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