संकट सिटी: चोरों का कारनामा
निर्देशक पंकज आडवानी की फिल्म संकट सिटी कार चोरों के इर्द गिर्द घूमती है। गुरू (केके मेनन) कार चोर है उसका दोस्त गनपत (दीलिप प्रभावलकर) चोरी की गई कार का हुलिया बदलता है फिर दोनों उसे बेचकर आधे-आधे रूपए बांट लेते है।
एक दिन गुरू एक मर्सिडीज चुराता है जो कि एक डॉन फौजदार (अनुपम खेर) की होती है। गुरू कार को बदलने के लिए गनपत के पास भेजता है। गनपत को मर्सिडीज में करोड़ रूपए मिलते है। वह पैसे को छुपा देता है और कार को बदल देता है। फिर दोनों कार को सुलेमान सुपारी (राहुल देव) को बेचने जाते है। सुलेमान कार को पहचान लेता है और फौजदार को इत्तला कर देता है।
फौजदार अपने एक गुंडे को भेजकर पैसा वापस मंगवाता है लेकिन इसी बीच गनपत एक दुर्घटना में घायल हो जाता है। उसकी याददाश्त चली जाती है। गुरू को पता नही है कि गनपत ने पैसे कहां छुपाएं है। गुरू एक करोड़ इकट्ठा करने के लिए मोना (रिमी सेन) की मदद लेता है जो कि पहले गुरू के साथ चोरियां कर चुकी है। दोनों किसी तरह पैसा इकट्ठा कर लेते है लेकिन दुर्भाग्य से वह पैसा भी चोरी हो जाता है।


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