शाहिद कपूर की पाठशाला

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टीचर जी की सोच कई मायने में दूसरे टीचर्स से अलग है। वह दूसों के मुकाबले काफी प्रगतिशील और आधुनिक ख्यालों का इंसान है। वह बच्चों से बेहद प्यार करता है और उनमें कुछ नया करने के लिए उत्साह भी भरता है। वह बच्चों के लिए बेहद जिम्मेदार है। इसलिए उसे बच्चों के खिलाफ हो रहा अन्याय बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होता।
उसके किरदार के माध्यम से निर्देशक ने बच्चों के जीवन में टीचर का क्या रोल है इसे बड़ी बारीकी से प्रस्तुत किया है। आजकल के समाज में जहां हमारे नीति नियंताओं ने शिक्षा को दुकान और शिक्षक को दुनकानदार बना दिया है। इस माहौल में हमारा समाज अपनी आने वाली पीढ़ियों से क्या छीन रहा है, यही बात पूरी फिल्म में संजीदगी से उभारी गयी है। तारे जमीं पर से काफी अलग ये फिल्म आपके बच्चों के जीवन के जीवन की बंद किताब खोलने जा रही है। जहा हर रोज अपने बच्चे को भेजने के बाद आप अपने काम में व्यस्त हो जाते हैं। वह स्कूल बच्चों के जीवन से कैसे खेलते हैं, यही पाठशाला की कहानी है।


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