क्या खास है संजय गुप्ता की दस कहानियां में
निर्माता संजय दत्त और संजय गुप्ता की नई फिल्म दस कहानियां का सभी को बेसब्री से इंतजार है. इसकी एक वजह तो यही है कि अपनी पिछली फिल्मों बतौर निर्देशक मुसाफिर तथा जिंदा व बतौर निर्माता शूटआउट एट लोखंडवाला में संजय गुप्ता ने काफी अपेक्षाएं जगाई हैं
मगर दूसरी बड़ी वजह यह है कि इस बार वे एक बड़ा प्रयोग करने जा रहे हैं. उन्होंने एक ही फिल्म में 15 से 20 मिनट की अवधि वाली 10 कहानियों को समेटा है. इसके फिल्मांकन में पांच निर्देशकों और कई पटकथा लेखकों की टीम है. कहानियों का चुनाव भी खास तरह का है, जो इसे आम कामर्शियल फिल्मों से अलग करता है. इस सबके बावजूद इसका निर्माण तो एक कामर्शियल सेटअप के भीतर हो रहा है, लिहाजा इसमें संजय दत्त, सुनील शेट्टी जैसे कई बड़े सितारे भी देखने को मिल जाएंगे.
हालांकि यह अपने-आप में कोई नया प्रयोग नहीं है. हॉलीवुड में ही नहीं बल्कि बॉलीवुड में भी यह हो चुका है. ताजा उदाहरण के लिए बहुत पीछे जाने की जरूरत नहीं, रामगोपाल वर्मा की डरना मना है और डरना जरूरी है जैसी फिल्में तो अभी दर्शकों के जेहन मे ताजा ही हैं, मगर 1957 में श्याम-श्वेत सिनेमा के दौर में ही ऋषिकेश मुखर्जी ने अपनी फिल्म मुसाफिर में तीन अलग-अलग कहानियों को प्रस्तुत किया था. इस फिल्म को दिलीप कुमार, किशोर कुमार और सुचित्रा सेन के अभिनय के लिए आज भी याद किया जाता है. अभिनेता डेविड इस फिल्म में बतौर सूत्रधार नजर आते हैं.
फिल्म के निर्देशकों की टीम में जसमीत, मेघना गुलजार, संजय गुप्ता, अपूर्व लखिया, हंसल मेहता और सूधीर मेहता जैसे नाम हैं, जो उम्मीदों को और बढ़ा देते हैं. इतना ही नहीं लिखने वालों में भी जावेद अख्तर, विशाल भारद्वाज, एस.फरहान और संजय गुप्ता शामिल हैं. इसमें शामिल की गई अलग-अलग फिल्मों के शीर्षक भी उत्सुकता जगाते हैं- जैसे स्ट्रेंजर इन द नाइट, राइज़ एंड फॉल, सेक्स ऑन द बीच, राइस प्लेट आदि. फिल्म अगले सप्ताह रिलीज हो रही है.


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