आम आदमी की कहानी है 'माधोलाल कीप वॉकिंग'

रोज सुबह माधोलाल अपने साथियों के साथ रेल का सफर शुरू करता है. उसके मित्रों में एक मजाकिया चपरासी राजन. एक वकील वर्मा, शेयर दलाल जयेश, रोमांटिक युवा अधिकारी सतीश और एक रिटायर जोशी काका हैं. ये सभी एक-दूसरे से रोज रेल में मिलते हैं व एक दूसरे से हँसते व बात करते हुए अपना सफ़र पूरा करते हैं.
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और अचानक एक दिन ऐसी दुर्घटना होती है, जिस से उसकी और उसके परिवार की जिन्दगी बदल जाती है, माधोलाल खामोश हो जाता है. उसे अपने साथ हुई दुर्घटना रह-रह कर याद आती है. जरा सी भी आवाज उसे चौकाती है, डराती है, वो घर से बाहर नही जा पाता. उसके डर को निकालने की वह खुद और उसके घर वाले, यार दोस्त तमाम कोशिश करते हैं लेकिन कामयाब नही हो पाते. अंतत माधोलाल ही स्वयं के डर पर विजय पाता है वहीँ पंहुच कर जहाँ से उसके डर की शुरुआत होती है वहीं से वह अपनी जिन्दगी फिर से शुरू करता है यानि.
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फ़िल्म में आम आदमी की कहानी है और आम आदमी का प्रतिशत हमारे देश में सबसे ज्यादा है और यही आम आदमी जिन्दगी को जीने की जद्दो जहद में रहता है लेकिन यह दुर्घटना उसे रुकने नही देती. अगले दिन फिर खड़े होना व चलना उसकी मजबूरी नही जरुरत है. फ़िल्म में माधोलाल की मुख्य भूमिका अभिनीत की है सुब्रत दत्त ने , उनकी पत्नी की भूमिका में हैं नीला गोखले और बड़ी बेटी की सशक्त भूमिका निभायी है स्वरा भास्कर ने व एक महत्वपूर्ण भूमिका में हैं प्रणय नारायण.
इस फ़िल्म में कुछ ही गाने हैं लेकिन सब बेहतरीन हैं. बहुत दिनों बाद किसी फ़िल्म में कव्वाली भी दर्शको को दिखाई व सुनायी देगीं. फ़िल्म में संगीत दिया है नायाब राजा ने. विज्ञापन की दुनिया से फ़िल्म निर्देशन में कदम रखने का साहस किया है युवा जय टांक ने, ड्रींम कट्स और मकबूल व रावण जैसी फिल्मों में अभिनय कर चुके अजय घई द्वारा निर्मित इस फ़िल्म को दर्जनों फ़िल्म समारोहों में विशेष प्रशंसा मिल चुकी है.


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