आमिर की नई फिल्म 'तारे जमीन पर'
अभिनेता से निर्माता और अब निर्देशक बने आमिर खान ने अपने पहले रचनात्मक प्रयास में बच्चों के मन में झांकने का प्रयास किया है. फिल्म की कहानी बच्चों के अपने निजी संसार और उनकी परवरिश से जुड़े मुद्दे उठाती है. अगर दर्शकों को याद हो तो कई साल पहले गुलजार ने फिल्म किताब में बच्चों के मन में झांकने का प्रयास किया था. बच्चों को फिल्म की सेंट्रल थीम बनाना काफी मुश्किल और व्यवसायिक दृष्टि से खासा जोखिम भरा होता है.
कहानी का मुख्य पात्र है आठ साल का ईशान अवस्थी. उसके पापा-मम्मी की अपने बच्चे को लेकर ढेर सारी महत्वाकांक्षाएं हैं. उनकी इच्छा है कि ईशान एक होनहार विद्यार्थी बने और परीक्षा में अच्छे नंबर लाए. ईशान का अपना एक निजी संसार है. इस संसार में पतंग, रंग और मछलियों का महत्व है. वह इनके बीच बेहद खुश रहता है. उसे पता नहीं है कि वयस्कों की जिंदगी में इन्हें महत्वहीन माना जाता है. लाख समझाने के बावजूद भी जब ईशान अपने माता-पिता की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाता तो वे उसे बोर्डिंग स्कूल भेजने का निर्णय लेते हैं.
ईशान नए स्कूल में जाता है, और उसे अपने घर की याद सताती है. एक दिन स्कूल में नए आर्ट टीचर आते हैं जो आम अध्यापकों से बिल्कुल अलग हैं. वे बच्चों से उनकी कल्पनाएँ, उनके सपने और उनके विचार पूछते हैं. आर्ट टीचर का किरदार निभाया है आमिर खान ने. एक दिन आमिर ईशान से मिलते हैं और उसकी दुनिया में झांकने की कोशिश करते हैं.


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