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जिंदगी हसीन है, नजर उठा के तो देख. अक्सर कहती थीं जोहरा...

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जिंदगी हसीन है, नजर उठा के तो देख, जी हां जिंदगी बेहद हसीन है बस जरूरत है इसे दिल से बिंदास होकर जीने की... यही फलसफा था  गुरूवार को दुनिया को अलविदा कहने वालीं 102 साल की प्रतिभाशाली अभिनेत्री जोहरा सहगल का।

जोहरा ने यह अल्फाज पिछले साल अपने जन्मदिन के मौके पर लोगों के सामने कहे थे। जोहरा ने कहा था कि भले ही आज मैं 101 साल की हो गई हूं तो क्या.. मैं आज भी अपने जीवन के हर एक पल का लुत्फ उठा रही हूं।

अपने जन्मदिन के मौके पर दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में केक काटती हुईं जोहरा की खुशी के अंदाज और ऊर्जा ने उस समय सबका दिल जीत लिया था। इस मौके पर उनकी बेटी किरण सहगल की लिखी किताब 'जोहरा सहगल फैटी' का विमोचन पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पत्नी गुरशरण कौर ने किया था। किताब में उनके जीवन से जुड़ी खट्टी-मीठी यादों का जिक्र है।

अभी तो मैं जवान हूँ: जोहरा सहगल

अपने खुशमिजाज अंदाज के लिए मशहूर जोहरा ने वहां मौजूद सभी लोगों को अपनी बातों से खूब गुदगुदाया था। लोगों को एहसास दिलाया कि जिंदगी एक खूबसूरत किताब है, जिसे खुशी के साथ पढ़ना चाहिए।

जोहरा ने अपने बीते दिनों को याद करते हुए बताया था कि पृथ्वीराज कपूर श्रेष्ठ कलाकार होने के साथ साथ एक अच्छे इंसान भी थे, जिन्हें अपने साथी कलाकारों का भी पूरा ख्याल रहता था। वह पहले डांसर बनीं, फिर कोरियोग्राफर और तब जाकर कहीं अभिनेत्री बनी।

जोहरा की जिंदगी के और भी दिलचस्प बाते हैं जिनके जानने के लिए नीचे की स्लाइडों पर क्लिक कीजिये...

एक घर की मांग

एक घर की मांग

भारतीय सिनेमा की सबसे बुजुर्ग अभिनेत्री जोहरा सहगल दक्षिणी दिल्ली के मंदाकिनी एवक्लेव में बेटी किरण सहगल के साथ रह रही थीं। उन्होंने 2011 में दिल्ली सरकार को पत्र लिखकर एक घर देने की मांग की थी।

करियर की शुरुआत एक डांसर के रूप में

करियर की शुरुआत एक डांसर के रूप में

जोहरा ने अपने करियर की शुरुआत एक डांसर और डांस निर्देशक के रूप में शुरू की थी। जोहरा थिएटर को अपना पहला प्यार मानती थी। वहीं से उन्होंने अभियन की कई बारिकियां सीखीं। जोहरा ने पृथ्वीराज कपूर के पृथ्वी थिएटर में करीब 14 साल तक काम किया।

पृथ्वीराज कपूर से लेकर रणबीर कपूर तक

पृथ्वीराज कपूर से लेकर रणबीर कपूर तक

जोहरा ने पृथ्वीराज कपूर से लेकर रणबीर कपूर तक, बॉलीवुड के मशहूर कपूर परिवार की चार पीढ़ियों के साथ काम किया था। जोहरा को विशेष रूप से 'भाजी ऑन द बीच' (1992), 'हम दिल दे चुके सनम' (1999), 'बेंड इट लाइक बेकहम' (2002), 'दिल से.'(1998) और 'चीनी कम' (2007) जैसी फिल्मों में बेहतरीन अभिनय के लिए जाना जाता है। उनकी आखिरी फिल्म 'चीनी कम' और 'सांवरिया' थी।

पद्म विभूषण से सम्मानित

पद्म विभूषण से सम्मानित

जोहरा सहगल का जन्म 27 अप्रैल, 1912 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में हुआ था। देहरादून के पास चकराता में पली-बढ़ीं जोहरा को भारत सरकार ने वर्ष 1998 में पद्मश्री और वर्ष 2010 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया था।

सबसे पहले अंतर्राष्ट्रीय मंच का अनुभव

सबसे पहले अंतर्राष्ट्रीय मंच का अनुभव

वह पहली ऐसी भारतीय हैं, जिसने सबसे पहले अंतर्राष्ट्रीय मंच का अनुभव किया। उन्होंने 1960 के दशक के मध्य में रूडयार्ड किपलिंग की 'द रेस्कयू ऑफ प्लूफ्लेस' में काम किया।

टेलीविजन कार्यक्रमों में भी काम किया

टेलीविजन कार्यक्रमों में भी काम किया

वर्ष 1990 के दशक में लंदन से भारत लौटने से पहले जोहरा ने 'द ज्वेल इन द क्राउन', 'माय ब्यूटीफुल लाउंडेरेटे', 'तंदूरी नाइट्स' और 'नेवर से डाइ' जैसे टेलीविजन कार्यक्रमों में भी काम किया।

वर्ष 1998 में पद्मश्री

वर्ष 1998 में पद्मश्री

जोहरा सहगल को वर्ष 1998 में पद्मश्री, 2001 में कालिदास सम्मान, 2004 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी नवाजा गया था।

English summary
From Prithviraj Kapoor to his great grandson Ranbir Kapoor - Zohra Sehgal held the feat of working with the oldest and newest generation of Bollywood. Zohra, who passed away Thursday at the age of 102.Zohra Sehgal's last Words..life is beautiful live your life with full of enjoyment.
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