'बॉलीवुड संगीत को अपना समझते हैं'

अनुभा रोहतगी
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
पाकिस्तान की पहली महिला गीतकार-गायिका जो़ड़ी, ज़ेब-हनिया, इन दिनों भारत में है.
पिछले कई सालों से आतिफ़ असलम और शफ़क़त अमानत अली जैसे पाकिस्तानी पुरुष गायक भारत में लोकप्रिय हुए हैं. लेकिन अस्सी के दशक में नाज़िया हसन के बाद शायद ये पहला मौक़ा है कि कोई पाकिस्तानी महिला पॉप गायिका या ग्रुप इस तरह चर्चा में आया हो.
ज़ेब और हनिया मौसेरी बहने हैं. उन्होंने स्टेज पर पहली बार छह साल की उम्र में स्कूल के एक समारोह में गाया था.
उनके परिवार में संगीत का माहौल होने की वजह से उन्हें हमेशा प्रोत्साहित किया जाता था. हालांकि इनकी बचपन से ही संगीत में रुचि थी लेकिन ज़ेब और हनिया ने खुद गाने लिखना और संगीत बनाना शुरु किया जब वो दोनों अमरीका में पढ़ाई कर रही थीं.
ज़ेब कहती हैं कि शुरुआत में संगीत को करियर के रुप में अपनाने के बारे में उन्हें और उनके माता-पिता को थोड़ा संशय था. लेकिन संगीत का उनका सफ़र काफ़ी आसान रहा.
वे कहती हैं कि उनके परिवार के अलावा पाकिस्तानी म्यूज़िक इंडस्ट्री और मीडिया के लोगों ने भी उन्हें प्रोत्साहन दिया.
हालांकि हनिया पहले भी भारत आ चुकी हैं लेकिन ज़ेब की ये पहली भारत यात्रा है. ये दोनों यहां छुट्टी मनाने और दोस्तों से मिलने आईं हैं. लेकिन इस दौरान वे भारत में म्यूज़िक इंडस्ट्री से जुड़े कई लोगों से मिली हैं.
बचपन से हिंदी फिल्मों के गाने सुनकर बढ़ी हुईं ज़ेब कहती हैं कि वो बॉलीवुड संगीत को ग़ैर नहीं बल्कि अपना समझती हैं.
उनकी नानी मास्टर मदन और केएल सहगल के गाने गाती थीं. वो कहती हैं कि गीता दत्त, किशोर कुमार, आशा भोंसले और लता मंगेशकर जैसे गायकों की वो उतनी ही इज़्ज़त करती हैं जितने यहां के लोग करते हैं.
एस डी बर्मन और ओ पी नैय्यर जैसे चालीस और पचास के दशक के संगीतकारों से प्रभावित हनिया को आज की पीढ़ी में सबसे ज़्यादा एआर रहमान पसंद हैं.
वो कहती हैं, "शंकर-एहसान-लॉय और विशाल-शेखर जैसे संगीतकारों के साथ अगर काम करने का मौका मिले तो ये मेरे लिए सपना साकार होने जैसा होगा."
वहीं ज़ेब को विशाल भारद्वाज पसंद हैं.
बॉलीवुड की ख़ासियत ज़ेब ये मानती हैं कि वहां हमेशा ही नई चीज़ को बढ़ावा दिया गया है. वो कहती हैं कि बॉलीवुड का संगीत दुनिया भर के संगीत को अपनी ज़रुरत के अनुसार ढाल लेता है जिसे सब पसंद करते हैं.
ज़ेब और हनिया कहती हैं कि उन्होंने इंडियन बैंड्स ज्यादा नहीं सुने हैं लेकिन कुछ साल पहले अपने एक दोस्त से उन्हें इंडियन ओशन ग्रुप की सीडी मिलीं और उन्हें इस ग्रुप का म्यूजि़क बहुत पसंद है.
इसके अलावा इन्हें पेंटाग्राम नाम के रॉक बैंड और त्रिलोक गु्र्टू का का काम भी पसंद है.
हालांकि ज़ेब मुख्य रुप से एक रॉक बैंड का हिस्सा हैं लेकिन उन्हें शास्त्रीय संगीत सुनना पसंद है.
वो खाली समय में किशोरी अमोणकर, अश्विनी भीड़े देशापांडे और रोशन आरा बेगम को सुनना पसंद करती हैं. वहीं हनिया को पाकिस्तानी पॉप और फोल्क से लेकर बॉलीवुड, क्लासिक रॉक और वर्ल्ड म्यूज़िक जैसा सभी तरह का संगीत सुनना अच्छा लगता है.
अपना एलबम 'चुप' रिकॉर्ड करने से पहले ज़ेब और हनिया को रिकॉर्डिंग का बिल्कुल भी अनुभव नहीं था.
हनिया कहती हैं कि ये काफी मुश्किल काम था और रिकॉर्डिंग के दौरान उन्होंने प्रोड्यूसर से डांट भी पड़ी और वो रोई भीं.
ज़ेब कहती हैं कि ये अनुभव बहुत चुनौतीपूर्ण मगर साथ ही रोमांचक भी था.
जहां ज़ेब को लोगों से मिलना, पढ़ना और एक्सरसाइज़ करना पसंद है वहीं हनिया ज़्यादा अंतर्मुखी हैं और वो अकेले समय बिताना, पढ़ना और फिल्में देखना पसंद करती हैं.


Click it and Unblock the Notifications