ये साली ज़िंदगी- कैसा है संगीत

By Bbc
ये साली ज़िंदगी- कैसा है संगीत

पवन झा, संगीत समीक्षक

बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

पवन झा के मुताबिक फ़िल्म ये साली ज़िंदगी का संगीत सुनने लायक है.

सुधीर मिश्रा की नई फ़िल्म है 'ये साली ज़िंदगी'. सुधीर हमेशा से ही लीक से हट कर फ़िल्में बनाने के लिये जाने जाते हैं.

संगीत सुधीर की फ़िल्मों में हमेशा एक महत्वपूर्ण किरदार अदा करता है. 'ये साली ज़िंदगी' एक रोमांटिक थ्रिलर है और मुख्य किरदारों के बीच बनते-बदलते रिश्तों और ज़िंदगी के अनिश्चित मिजाज़ की दास्तां बयां करती है.

फ़िल्म का संगीत काफ़ी हद तक फ़िल्म की थीम के अनुरूप है. सितार वादक निशात ख़ान इसके संगीतकार हैं. ये फ़िल्मों में उनका पहला प्रयास है.

निशात, शास्त्रीय संगीत के उस्तादों के परिवार से आए हैं. वो महान सितार वादक उस्ताद विलायत ख़ान के भतीजे हैं और अमरीका में यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया में सितार पढ़ाते भी हैं.

फ़िल्म का टाइटल गीत सुनिधि चौहान ने गाया है.

इस एलबम में कुल आठ ट्रैक हैं. टाइटल गीत 'ये साली ज़िंदगी' सुनिधि चौहान और शिल्पा राव के साथ कुणाल गांजावाला ने गाया है. किरदारों के हाथों से निकलती ज़िंदगी और उसके अनसुलझे सवालों के पशोपेश को स्वानंद किरकिरे के बोल बेहतरीन ढंग से पेश करते हैं.

निशात साहब ने एक अनुभवी संगीतकार की तरह सुनिधि की आवाज़ का इस्तेमाल किया है और शिल्पा राव के सहयोगी स्वर भी गीत को प्रभावी बनाने में योगदान देते हैं. लेकिन कुणाल गांजावाला की आवाज़ में नयापन नहीं है, जो खलता है.

'दिल दर बदर' एलबम का अगला गीत है. शिल्पा राव की गायकी और स्वानंद के बोल गीत की ख़ासियत हैं.

निशात ख़ान की रचना और वाद्य संयोजन असरदार है मगर जावेद अली के वोकल्स के साथ उनका प्रयोग सही नहीं लगता है और मूल गीत के असर को कम करता है. जावेद अली वाला भाग बहुत कुछ फ़ना के 'सुभान अल्लाह' की याद दिलाता है.

अगला गीत 'सारारा सारारा' साउंडट्रैक में दो संस्करण में है. सुखविंदर सिंह के संस्करण की मस्ती और मज़ा जावेद अली के संस्करण से ज़्यादा दमदार बन पड़ा है.

स्वानंद के बोल गली-मोहल्ले की प्रेम कथाओं मे ले जाते हैं. इस दौर के गीतकारों में वे शब्दों से खेलने वाले फ़न के माहिर हैं. गीत एलबम का सबसे लोकप्रिय गीत साबित हो सकता है.

एलबम में एक और टाइटल गीत है जो बोनस के रूप में दिया गया है. गीत अभिषेक रे ने गाया है और धुन भी उन्हीं की है. मगर वे अमित त्रिवेदी-अमिताभ भट्टाचार्य की जोड़ी के हाल ही के गीतों से बहुत प्रभावित लगते हैं और मज़ेदार बोलों के बावजूद इसमें दिए गए विशेष प्रभाव यानी 'स्पेशल इफ़ेक्ट गीत को असरहीन बनाते हैं.

पवन झा 'ये साली ज़िंदगी' के संगीत को देते हैं पांच में से तीन नंबर.

जावेद अली का गाया 'कैसे कहें अलविदा' एलबम की एक ख़ूबसूरत प्रस्तुति है. निशात का संगीत मधुर है और जावेद अली ने गीत को बेहतरीन अंदाज़ में गाया है.

इस गीत के बाद जावेद अली शिल्पा राव के साथ मौजूद हैं एक अलग रंग में 'इश्क़ तेरे जलवे' लेकर, जो एक अच्छी कोशिश के बावजूद असर नहीं छोड़ता.

कुल मिलाकर 'ये साली ज़िंदगी' निशात ख़ान की औसत से बेहतर प्रस्तुति है. अपनी शुरुआत से वे ये उम्मीद जगाने में सफल रहे हैं कि आने वाले दिनों मे कुछ अच्छी रचनाएं सुनने को मिलेंगी.

संगीत थीम के हिसाब से है लेकिन ये भी सच है कि जितनी इस एलबम में गुंजाइश थी संगीत उस स्तर तक पहुंचने में नाकाम रहा है. फिर भी एक अच्छी कोशिश रही है 'ये साली ज़िंदगी'.

नंबरों के हिसाब से पाँच मे से तीन नंबर

More from Filmibeat

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+
X