भाई यश के लिए लता ने बीमारी का भी ख्याल नहीं किया
जी हां दोस्तों, लता मंगेशकर के लिए यश चोपड़ा उनके भाई जैसे ही थे इसलिए तो उनकी हर एक फिल्म में लता जी का एक गाना होता था। दुनिया चाहे इधर की उधर हो जाये लेकिन लता जी कभी यश चोपड़ा को मना नहीं करती थी किसी भी गाने के लिए। इसलिए जब पिछले साल यश चोपड़ा का निधन हुआ तो लता जी ने रोते हुए कहा था कि आज उनका भाई जैसा सच्चा दोस्त उन्हें छोड़कर चला गया।
जिसका ताजा प्रमाण उस समय दिखा जिस समय लता जी आवार्ड मिला और उन्होंने कहा कि वह पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रही हैं लेकिन फिर भी वह आज यहां आयी हैं क्योंकि वह यहां आना चाहती थीं। वह अवार्ड पाकर बहुत खुश हैं क्योंकि लोगों ने उन्हें इस पुरस्कार के लिए चुना। आज के दिन वह यश चोपड़ा बहुत मिस कर रही हैं।
मालूम हो कि दिग्गज फिल्मकार यश चोपड़ा की पहली पुण्यतिथि पर यहां एक भव्य समारोह में स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर को पहला यश चोपड़ा समृति पुरस्कार प्रदान किया गया। यह पुरस्कार उन्हें शनिवार को केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने प्रदान किया।तिवारी ने कहा, "लता मंगेशकर खूबसूरत आवाज से समृद्ध हैं। वह भारतीय संगीत जगत की शान हैं और एक जीवंत किंवदंती हैं।"
दिवंगत फिल्म निर्माता-निर्देशक यश चोपड़ा को समर्पित यश चोपड़ा स्मृति पुरस्कार की स्थापना टी. सुब्बारामी रेड्डी की टीएसआर संस्था द्वारा की गई है। यह पुरस्कार प्रति वर्ष कला और संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को दिया जाता है। पुरस्कार के रूप में 10 लाख रुपये का चेक और प्रशस्तिपत्र दिया जाता है।
1942 में अपने गायन करियर की शुरुआत करने वाली लता मंगेशकर सात दशकों से अधिक समय से गा रही हैं। 36 भारतीय और विदेशी भाषाओं में गायन के अलावा वह हिन्दी फिल्मों में एक हजार से अधिक गीत गा चुकी हैं।


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