क्या आज मन्नत में गौरी खान का जन्मदिन मना पाएंगे आर्यन खान? 12.30 बजे होगा फैसला - जेल या बेल
शाहरूख खान की पत्नी, गौरी खान, 8 अक्टूबर को आम तौर पर अपना 51वां जन्मदिन मनातीं लेकिन इस साल मन्नत में सन्नाटा है और हर किसी को शाहरूख खान के बेटे आर्यन खान के घर लौटने का इंतज़ार है। आर्यन की ज़मानत याचिका पर सुनवाई, उनकी मां गौरी खान के जन्मदिन पर होनी है। समय तय किया गया है दिन के 12.30 बजे।
अब देखना है कि आर्यन खान घर लौटकर मां के साथ उनका जन्मदिन मना पाते हैं और खान परिवार की परेशानियां खत्म हो पाती हैं या नहीं। गौरतलब है कि आर्यन खान को वैसे तो जेल भेजने का फैसला कोर्ट ने दे दिया था।

लेकिन कोर्ट ने ये फैसला दिया गुरूवार शाम 7 बजे के बाद। ऐसे में आर्यन खान के वकील, सतीश मानेशिंदे ने दलील पेश करते हुए कहा कि 7 बजे के बाद बिना कोविड रिपोर्ट के जेल जाना मुमकिन नहीं होगा। ऐसे में अदालत ने एक रात और आर्यन को NCB की कस्टडी में रखने को कहा और उनकी ज़मानत याचिका पर शुक्रवार दिन में 12.30 बजे सुनवाई का आदेश दिया।
यानि कि आज ये तय होगा कि NCB की कस्टडी से निकलकर आर्यन खान अब जेल जाएंगे या फिर उनकी ज़मानत पर कोर्ट उनके पक्ष में फैसला देगी और आर्यन, वापस अपने घर मन्नत पहुंचकर आखिरकार अपनी मां गौरी खान को जन्मदिन का तोहफा दे पाएंगे।
अभी तक आर्यन खान NCB की कस्टडी में थे जहां से उन्हें Judicial कस्टडी में भेज दिया गया है। उनकी अंतरिम ज़मानत याचिका खारिज तक दी गई है और ज़मानत याचिका पर सुनवाई आज है। इन सब बातों का मतलब क्या है और आर्यन के वकील ने क्या क्या दलीलें पेश की ये हम आपको बताते हैं यहां।

2 अक्टूबर से NCB की कस्टडी
आर्यन खान को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने 2 अक्टूबर को एक शिप पर चल रही रेव पार्टी से हिरासत में लिया था। आर्यन और उनके दोस्तों पर ड्रग्स लेने का आरोप था। हालांकि, आर्यन खान के पास से ना ही कोई ड्रग्स बरामद हुई और ना ही आर्यन खान ने ड्रग्स का सेवन किया था। आर्यन से NCB ने 2 अक्टूबर से पूछताछ शुरू की और इस पूछताछ में आर्यन ने दो बातें कुबूल कीं - पहली ये कि वो 4 सालों से ड्रग्स का सेवन कर रहे हैं और दूसरी ये कि उनके पिता शाहरूख खान ने उन्हें आगाह कर रखा था कि शहर में हर जगह NCB छापे मार रही है इसलिए जिस भी जगह जाएं सोच समझ कर जाएं।

कस्टडी बढ़ाने की डिमांड
दो बातें कुबूल करने को बाद NCB ने 3 अक्टूबर को आर्यन खान को गिरफ्तार कर लिया गया। उसी दिन उनकी कोर्ट में पेशी हुई और NCB ने उनकी कस्टडी की डिमांड 4 अक्टूबर तक मांगी। NCB का कहना था कि आर्यन खान के फोन से कुछ आपत्तिजनक तस्वीरें और कोड नेम मिले हैं जिनसे बिट कॉईन, क्रिप्टो करेंसी और ड्रग्स सिंडिकेट का पता मिल सकता है। 4 अक्टूबर को वापस आर्यन खान की कोर्ट में पेशी हुई और NCB ने एक बार फिर 7 अक्टूबर तक के लिए आर्यन की कस्टडी मांगी और कोर्ट ने मंज़ूर कर दी।

कोर्ट ने दी Judicial कस्टडी
7 अक्टूबर को जब आर्यन खान अपने केस की सुनवाई के लिए कोर्ट पहुंचे तो एक बार फिर से NCB ने 11 अक्टूबर तक के लिए आर्यन खान की कस्टडी मांगी। लेकिन इस बार कोर्ट ने NCB को झटका देते हुए आर्यन को 14 दिन की Judicial कस्टडी में सौंप दिया। इसका मतलब है कि आर्यन खान अब मुंबई की जेल में रहेंगे और NCB को जब भी उनसे पूछताछ करनी होगी, उन्हें कोर्ट से परमिशन लेनी पड़ेगी।

वकील ने की अंतरिम बेल की अपील
जैसे ही आर्यन खान को कोर्ट ने 14 दिन की Judicial कस्टडी में भेजने का फैसला किया वैसे ही आर्यन खान के वकील सतीश मानेशिंदे ने उनकी अंतरिम ज़मानत की अपील की। अंतरिम ज़मानत का मतलब है कि आरोपी को तुरंत ही ज़मानत पर घर भेजा जा सकता है। सतीश मानेशिंदे का कहना था कि आर्यन को सेक्शन 27 के तहत गिरफ्तार किया गया था लेकिन इतने दिन में उनके खिलाफ ना ही कोई जांच हुई और ना ही कुछ सुबूत मिला। तो आगे भी ऐसा क्या नया हो जाएगा। आर्यन पूरी तरह इस केस में सहयोग देने को तैयार थे। लेकिन कोर्ट ने आर्यन की अंतरिम ज़मानत भी खारिज कर दी।

आज होगी ज़मानत की सुनवाई
अब आर्यन खान केस में उनकी ज़मानत याचिका पर आज सुनवाई होगी। आर्यन खान के वकील सतीश मानेशिंदे पहले ही अपनी दलील पेश करते हुए कह चुके हैं कि इस केस में आर्यन खान के खिलाफ कोई सुबूत नहीं मिला है। ऐसे में उनके क्लाईंट को कस्टडी में बंदी बनाकर रखने का क्या मतलब है? आर्यन की ओर से मानेशिंदे ने कहा कि ना ही मैंने अपने फोन से छेड़छाड़ की और ना ही सहयोग में कमी रखी है, तो मुझे कस्टडी में क्यों रखा जा रहा है?

होगा फैसला जेल या बेल
सतीश मानेशिंदे ने साफ कहा कि आर्यन को कस्टडी में रखना का एक ही मकसद था - असली मुजरिम को ढूंढना। लेकिन जब तक असली मुजरिम नहीं मिल जाता तब तक आर्यन कस्टडी में नहीं रह सकते हैं। बाकी के लोगों (आर्यन के दोस्त अरबाज़ मर्चेंट) से हमारा कोई लेना देना नहीं है। अब देखना है कि ज़मानत याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट क्या वाकई मन्नत में जश्न मनाने की वजह देती है या नहीं।


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