हंसी का हीरो आज सलाखों के पीछे! जानिए उस फिल्म का नाम जिसने बिगाड़ी एक्टर की किस्मत, पहुंचाया जेल
Rajpal Yadav cheque bounce case: 2000 के दशक के आसपास बॉलीवुड देखने वाले दर्शकों के लिए राजपाल यादव का नाम हंसी और मनोरंजन का दूसरा नाम हुआ करता था। 'हलचल', 'फिर हेरा फेरी', 'भागम भाग', 'चुप चुप के' और भूल भुलैया जैसी सुपरहिट फिल्मों में उनकी मौजूदगी ही दर्शकों को हंसाने के लिए काफी होती थी। लेकिन आज वही अभिनेता अपनी ज़िंदगी के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं।

हाल ही में राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण करना पड़ा। यह कदम तब उठाया गया जब दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें बकाया रकम चुकाने के लिए और समय देने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही करीब 15 साल पुराने इस कानूनी विवाद का एक अहम अध्याय खत्म हो गया।
आत्मसमर्पण से पहले इमोशनल हुए राजपाल यादव
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जेल जाने से ठीक पहले राजपाल यादव भावनात्मक रूप से टूट गए थे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनके पास अब कोई रास्ता नहीं बचा है। न्यूज एक्स की रिपोर्ट के अनुसार, राजपाल यादव ने कहा, 'मेरे पास पैसे नहीं हैं और कोई विकल्प भी नहीं दिख रहा। इस इंडस्ट्री में मुश्किल वक्त में इंसान अकेला रह जाता है। इस संकट से मुझे खुद ही लड़ना होगा।'
उनके इस बयान के बाद फिल्म इंडस्ट्री और राजनीति जगत से कई लोग उनके समर्थन में सामने आए।
एक फिल्म की वजह से बिगड़ा मामला
राजपाल यादव की कानूनी परेशानियों की जड़ साल 2010 में है। उस समय उन्होंने अपनी बतौर डायरेक्टर फिल्म 'अता पता लापता' के प्रोडक्शन के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब ₹5 करोड़ का कर्ज लिया था। हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा सकी, जिससे एक्टर की आर्थिक स्थिति बिगड़ती चली गई।
कर्ज चुकाने में असफल रहने के कारण राजपाल यादव के दिए गए कई चेक बाउंस हो गए। इसके बाद उनके खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
कोर्ट का फैसला और बढ़ती मुश्किलें
अप्रैल 2018 में एक निचली अदालत ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी को धारा 138 के तहत दोषी करार देते हुए छह महीने की जेल की सजा सुनाई। अभिनेता ने इस फैसले के खिलाफ कई बार अपील की, लेकिन मामला सालों तक खिंचता चला गया।
इस दौरान बकाया राशि बढ़कर लगभग ₹9 करोड़ तक पहुंच गई। हालांकि राजपाल यादव ने बीच-बीच में रकम चुकाने की कोशिश की और 2025 में ₹75 लाख भी जमा किए, लेकिन कोर्ट द्वारा तय की गई समय सीमा का लगातार उल्लंघन होता रहा।
आखिरकार 4 फरवरी 2026 को जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने राजपाल यादव की अंतिम याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने एक हफ्ते का और समय मांगा था। कोर्ट ने साफ कहा कि किसी की पहचान या पेशे के आधार पर बार-बार राहत नहीं दी जा सकती और तुरंत सरंडर का आदेश दिया।
अब बात करते हैं फिल्म के बारे में-
'अता पता लापता' की कहानी
फिल्म 'अता पता लापता' की कहानी माधव चतुर्वेदी नाम के एक शख्स के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पुलिस के पास यह शिकायत लेकर पहुंचता है कि उसके घर से सब कुछ चोरी हो गया है। हालांकि, जांच के दौरान इस बात पर शक जताया जाता है कि यह कथित चोरी असल में बीमा का पैसा हासिल करने के लिए खुद ही रची गई हो सकती है।
कहानी तब नया मोड़ लेती है जब इस मामले में मीडिया की एंट्री होती है। मीडिया के बढ़ते दबाव के चलते प्रशासन को केस की गहराई से पड़ताल करनी पड़ती है, जिससे कई चौंकाने वाले और दिलचस्प पहलू सामने आते हैं।
'अता पता लापता' की स्टार कास्ट
इस फिल्म में राजपाल यादव के साथ विजय राज, आशुतोष राणा, मनोज जोशी, दिवंगत विक्रम गोखले, मुश्ताक खान और दिवंगत एक्टर असरानी अहम रोल में नजर आए थे।
'अता पता लापता' के प्रोड्यूसर और डायरेक्टर
अता पता लापता का डायरेक्शन खुद राजपाल यादव ने किया था। फिल्म की कहानी और स्क्रिप्टिंग में संजय कुमार, संदीप नाथ, एम. सलीम, संजय शुभंकर, प्रदीप सिंगरोले, गोपाल तिवारी के साथ राजपाल यादव का भी अहम रोल रहा।


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