तोमर को अवार्ड और केजरीवाल पर बवाल?
सोमवार को 60वें नेशनल फिल्म अवार्ड की घोषणा हुई हैं जिसमें अभिनेता इरफान खान को बेस्ट एक्टर का अवार्ड मिला है पान सिंह तोमर के लिए। वह पान सिंह तोमर जो कि एक मशहूर धावक से नामी गिरामी डकैत बन जाता है। जिसके चरित्र को सजीवता से पर्दे पर जिया है इरफान खान जिसके लिए वो बधाई के पात्र हैं। फिल्म को देखने के बाद दर्शकों ने तालियां बजायीं और अब सरकार की ओर से इरफान खान को सम्मानित किया जा रहा है।
सोचने वाली बात यह है कि जिस पान सिंह तोमर के लिए आज इरफान खान को अवार्ड मिला है, उसी तोमर ने पर्दे पर चिल्ला-चिल्लाकर कहा था कि जंगल में बागी रहते हैं, डकैत तो संसद में रहते हैं...। जबकि यही बात जब 'आप' पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने नोएडा के जनसभा में कही थी तो संसद में ही बवाल मच गया था क्यों? मालूम हो कि केजरीवाल ने कहा था कि संसद मे तो बलात्कारी, डकैत और कातिल बैठे हैं।

इधर केजारीवाल के मुंह से यह शब्द निकले नहीं कि एक-दूसरे को जमकर गरियाने वाले सारे नेतागण एक हो गये।। सबने कहना शुरू कर दिया कि केजरीवाल ने संसद का अपमान किया है। इसलिए उनके ऊपर देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाये।
सोचिए कितना फर्क है दोनों ही बातों में। जब फिल्म का नायक संवाद बोले तो लोग सीट पर उछल-उछल कर तालियां और सीटी बजाते हैं, उसे नेशनल अवार्ड देकर सम्मानित किया जाता है और जब कोई आम आदमी ऐसी बातों का प्रयोग करे तो उसे तमाम विशेषणों से अंलकृत करके माफी मांगने को कहा जाता है क्यों?
एक ही देश में एक ही मंच पर इतना विरोधाभाष क्यों हैं? आखिर क्यों आज पान सिंह तोमर उन लोगों की पहली पसंद बन गया जो कि अरविंद केजरीवाल के साथ एक सुर में मोर्चो खोले बैठे थे? है किसी के पास इस सवाल का जवाब ..अगर हां तो अपना जवाब नीचे लिखे कमेंट बॉक्स में दर्ज करायें।


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