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    इन गानों का मतलब तो पता नहीं लेकिन नचाते बहुत हैं

    By डॉ. मुकुल श्रीवास्तव
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    कहते है, कभी कभी कोई गीत, सुबह सुबह आप सुन ले तो वो गीत आपके जहन पर पूरा दिन रहता है। हम सारा दिन वो गीत, गाते गुनगुनाते रहते है। लेकिन उन गीतों का क्या,जिनके बोलों का कोई सीधा अर्थ नहीं निकलता फिर भी वो हमारी जबान पर चढ़ जाते हैं अगर ऐसा नहीं है तो गीतों से होने वाले संचार का कोई मतलब नहीं रहेगा आज गीतों की कहानी में थोडा ट्विस्ट है।

    वाकई ये गानों की दुनिया एकदम निराली है क्या आपने कभी सुना है कि किसी शब्द का कोई अर्थ न हो फिर भी गानों में उनका इस्तेमाल होता है चकरा गए न, मै कोई पहेली नहीं बुझा रहा हूँ आपने कई ऐसे गाने सुने होंगे जिनके कुछ बोलों का कोई मतलब नहीं होता है लेकिन गानों के लिये बोल जरुरी होते हैं किशोर कुमार की आवाज़ में ये गाना याद करिए "ईना मीना डीका ,डाई डम नीका" किसी शब्द का मतलब समझ में आया ?

    बिना अर्थ वाले गाने भी करते हैं नाचने को मजबूर...

    फिर भी ऐसे गाने जब भी बजते हैं हमारे कदम थिरकने लगते हैं. अब इस तरह के गानों से कम से कम ये तो सबक मिलता है कि इस जिन्दगी में कोई चीज़ बेकार नहीं बस इस्तेमाल करने का तरीका आना चाहिए वैसे भी क्रियेटिविटी का पहला रूल है हर विचार अच्छा होता है और ये हमारे गीतकारों की क्रियेटिविटी ही है कि वो गानों के साथ लगातार प्रयोग करते आये हैं।

    कभी धुन को शब्दों में ढाल देते हैं और कभी ऐसे शब्दों को गीत में डाल देते हैं कि हम गुनगुना उठते हैं अई ईया सुकू सुकू (फिल्म:जंगली ) ताजातरीन फिल्म कमीने का "ढेन टणेन" धुन को शब्द बनाने का बेहतरीन प्रयास है फ़िल्मी गानों के ग्लोबल होने का कारण शायद गीतकारों की प्रयोगधर्मिता ही है।

    गानों के शब्दों का अर्थ भले ही न हो लेकिन फिर भी दिल को लुभाते हैं

    अर्थहीन शब्द भी मीनिंगफुल

    जिन्दगी में कितना कुछ है जो हम महसूस कर सकते हैं लेकिन एक्सप्रेस नहीं कर सकते और इन फीलिंग्स को एक्सप्रेस करने के लिए जब इन अजब गज़ब से शब्दों का सहारा लेकर कोई गीत रच दिया जाता है तो ये अर्थहीन शब्द भी मीनिंगफुल हो जाते हैं।

    जिन्दगी भी तो कभी एक सी नहीं रहती

    जिन्दगी भी तो कभी एक सी नहीं रहती ,गाने भी हमारी जिन्दगी के साथ बदलते रहे .आज की इस लगातार सिकुड़ती दुनिया में जहाँ एस ऍम एस भाषा के नए व्याकरण को बना रहा है, ऐसे में अगर गाने शब्दों की पारंपरिक दुनिया से निकल कर भावनाओं की दुनिया में पहुँच रहे हैं तो क्यों न गानों की इस बदलती दुनिया का जश्न मनाया जाए क्योंकि ये अजाब गज़ब गाने अब हमारी जिन्दगी का हिस्सा हैं।

    आईये स्लाइडों के जरिये डालते हैं ऐसे ही गानों पर एक नजर...

    छई छपा छई छपाक के छई (हु तु तु)

    पानी के साथ खेल का इससे सुन्दर बयान क्या हो सकता है।

    याहू चाहे कोई मुझे जंगली कहे ( जंगली)

    गानों में इस तरह के प्रयोग की शुरुवात जंगली फिल्म से हुई। आप अभी तक याहू को नहीं भूले होंगे और ये सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है।

    “ढेन टणेन”( कमीने)

    इस गाने के किसी भी शब्दों का अर्थ खोजने अगर आप चलेंगे तो शायद आप कभी नहीं खोज पायेंगे लेकिन इस गाने पर बच्चे, बूढ़े और जवान सभी आपको नाचते जरूर मिल जायेंगे।

    रम प् पम प् पम ए जी ओ जी ( राम लखन)

    राम लखन फिल्म का गाना नायक की अलमस्ती को कुछ ऐसे ही शब्दों में बयां कर रहा है "रम प् पम प् पम ए जी ओ जी करता हूँ जो मैं वो तुम भी करो जी" असल में इस तरह के शब्दों का काम गानों की बोली में भावना को डालना होता है हम हवा को देख नहीं सकते सिर्फ महसूस कर सकते हैं।

    डम डम डिगा डिगा मौसम भीगा भीगा ( छलिया)

    डम डम डिगा डिगा मौसम भीगा भीगा ( छलिया)

    गीतकार जब भावनाओं को नए तरीके से महसूस कराना चाहता है तो वह इस तरह के शब्दों का सहारा लेता है लेकिन यह काम बगैर संगीतकार के सहयोग के नहीं हो सकता है .जिन्दगी में भी अगर मेहनत सही दिशा में की जाए तभी सफल होती है और हर काम खुद नहीं करने की कोशिश करनी चाहिए.. अगर आप मेरी बात समझ रहे हैं तो सुनिए ये गाना "डम डम डिगा डिगा मौसम भीगा भीगा"।

    English summary
    You might not remember the name of the film but you will always recollect that weird song from that movie. All it has is just few meaningless words and random beats. But, these are songs that usually hit the music charts. Have a Look.
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