..................... Who is daiva Panjurli and Guliga in Rishab Shetty Kantara Chapter 1 and what is bhoot kola - Hindi Filmibeat

कौन हैं Kantara Chapter 1 में नजर आने वाले दैव 'पंजुरली' और 'गुलिगा'? क्यों 'भूत कोला' को माना जाता है पवित्र?

Kantara Chapter 1

कांतारा: चैप्टर 1, जब से रिलीज हुई है, कमाई के मामले में झंडे गाड़ रही है। इस फिल्म को लोग सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक एक्सपीरिएंस बता रहे हैं। इस फिल्म को देखने वाले लोग उन प्राचीन लोकदेवताओं की दुनिया में चले जाते हैं, जिनका अस्तित्व आज भी कर्नाटक के कई गांव में जीवित है।

इस कहानी में दर्शक उन प्राचीन लोकदेवताओं की दुनिया में प्रवेश करते हैं, जिनका अस्तित्व आज भी कर्नाटक के तटीय इलाकों में जीवित है। फिल्म में ऋषभ शेट्टी ने पंजुरली और गुलिगा जैसे दैवी रक्षकों के बारे में जिस गहराई से दिखाया है, वह सिनेमा से कहीं आगे जाकर अध्यात्म से कनेक्ट करती है।

कौन हैं पंजुरली

फिल्म की जड़ें पंजुरली की कथा से शुरू होती हैं, जो एक जंगली सूअर की आत्मा है। लोककथाओं के अनुसार, देवी पार्वती को एक बार एक छोटा, अनाथ सूअर का बच्चा मिला जिसे उन्होंने प्यार से पाला। जैसे-जैसे वो बड़ा हुआ, उसकी जंगली प्रवृत्ति बढ़ती गई और वह विनाश करने लगा। तब भगवान शिव ने उसे पृथ्वी पर भेज दिया ताकि वह इंसानों और जंगलों की रक्षा कर सके।

धरती पर आने के बाद पंजुरली एक रक्षक देवता बन गए, जो किसानों, फसलों और सत्य की रक्षा करते हैं। फिल्म में उनका कैरेक्ट इतना सजीव है कि दर्शक को लगता है मानो जंगल खुद सांस ले रहा हो और हर पेड़ में उनकी आत्मा बसती हो। पंजुरली की मौजूदगी हमें यह याद दिलाती है कि जब हम प्रकृति की रक्षा करते हैं, तो वही शक्ति हमें सुरक्षा देती है।

कौन हैं गुलिगा

पंजुरली की करुणा और दया से उलट गुलिगा का जन्म क्रोध से हुआ। कहा जाता है कि पार्वती जी एक बार एक पत्थर भगवान शिव के पास लेकर आईं लेकिन शिव जी ने उस पत्थर को गुस्से में फेंक दिया, और उसी की राख से गुलिगा प्रकट हुए। देवी पार्वती ने उन्हें पृथ्वी पर भेजा ताकि वह अधर्म और अन्याय का अंत कर सके।

ऋषभ शेट्टी ने गुलिगा को किसी नकारात्मक शक्ति के रूप में नहीं बल्कि दैव जो कि न्याय के दूत हैं उस रूप में प्रेंजेंट किया है। जब वह किसी इंसान में प्रवेश करते हैं, तो उसकी आवाज, उसकी चाल और उसकी दृष्टि सबमें एक दहकती हुई शक्ति आती है, जो डर भी पैदा करती है और भक्ति भी। गुलिगा का हर सीन इस बात की याद दिलाता है कि न्याय, चाहे कितना भी कठोर हो, दिव्यता से ही जन्म लेता है।

जब पंजुरली और गुलिगा आमने-सामने आए

फिल्म की आत्मा पंजुरली और गुलिगा के इस टकराव में बसती है। दोनों की शक्तियां अलग हैं- एक प्रेम और दया का प्रतीक है, तो दूसरा क्रोध और न्याय का। किंवदंतियों के अनुसार, जब दोनों में पहली बार संघर्ष हुआ, तो धरती और आकाश कांप उठे। तभी देवी दुर्गा ने हस्तक्षेप कर उन्हें एक साथ बांध दिया, ताकि वे मिलकर धरती की रक्षा कर सकें।

भूत कोला - जहां देवता इंसानों के बीच उतरते हैं

कांतारा की असली ताकत इसकी जड़ों में है और वो है भूत कोला नाम की प्राचीन परंपरा। यह कोई एक्ट नहीं, बल्कि एक सजीव आध्यात्मिक अनुष्ठान है जो आज भी कर्नाटक के कई इलाकों में होता है। इसमें कलाकार दैव (देवता) का रूप धारण करते हैं। नृत्य और आह्वान के दौरान माना जाता है कि देवता स्वयं उनमें प्रवेश करते हैं। उस क्षण में उनका हर शब्द, हर हावभाव दिव्य माना जाता है, जो आशीर्वाद भी देते हैं और न्याय भी करते हैं।

Read more about: kantara chapter 1
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+
X