केके के लिए संगीतकार ने जब बदल दिए थे गाने के बोल
मशहूर गायक केके का 53 साल की उम्र में कोलकाता में अचानक निधन हो गया है. वो कोलकाता में एक कॉन्सर्ट में हिस्सा लेने गए थे.
वो कोलकाता के एक कॉलेज के समारोह में शिरकत करने यहां गए थे. कार्यक्रम के दौरान ही उन्होंने तबीयत ख़राब होने की बात कही थी.
कार्यक्रम से होटल लौटते ही उनको एक निजी अस्पताल ले जाया गया. वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है.
अस्पताल पहुंचे राज्य के मंत्री अरूप विश्वास ने पत्रकारों से केके की मौत की पुष्टि की. उन्होंने पत्रकारों को बताया, "डॉक्टरों का शुरुआती अनुमान है कि केके की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई है. लेकिन मूल वजह का पता लगाने के लिए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है. दफ्तर से घर लौटते समय मुझे पता चला. मुझे बताया गया है कि उनको मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था."
तमिल, तेलुगू, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बांग्ला और गुजराती फ़िल्मों में गाने वाले केके कोलकाता के गुरुदास कॉलेज के एक समारोह में शामिल होने यहां आए थे.
यह लाइव शो नज़रुल मंच पर हो रहा था. लेकिन कार्यक्रम के दौरान ही उनकी तबीयत ख़राब हुई और वे होटल लौटे.
होटल में प्रशंसकों ने उनके साथ फोटो खिंचाने का आग्रह किया था. लेकिन तबीयत बिगड़ने के कारण उन्होंने इससे मना कर दिया. तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उनको वहां के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
केके ने बॉलीवुड की कई फिल्मों के लिए गाने गाए थे. 'हम दिल दे चुके सनम' में उनका गाया 'तड़प तड़प के इस दिल से...' और 'ओम शांति ओम' में गाया 'आंखों में तेरी...' को श्रोताओं ने काफी पसंद किया था.
अगस्त 2014 में केके से बीबीसी संवाददाता ने एक लंबी बातचीत की थी. पढ़िए उस बातचीत के कुछ अंश-
गायक बनने के बारे में आपने कब और कैसे सोचा?
बचपन से ही मुझे संगीत का शौक़ था, पुराने कैसेट प्लेयर में ख़ूब गाने सुना करता था. कॉलेज में दोस्तों के साथ मिलकर परफ़ॉर्म करता था. लेकिन जब शादी होने वाली थी तो किसी दोस्त ने मार्केटिंग में जॉब लगवा दी. पर काम करते हुए मुझे लगने लगा कि मैं यहाँ क्या कर रहा हूँ. बस मुंबई चला गया. मैंने विज्ञापनों में जिंग्लस का काम शुरू किया और हज़ारों जिंग्ल्स गाए.
बॉलीवुड का सफ़र कैसे शुरू हुआ?
विज्ञापनों में काम करते-करते मुझे फ़िल्म माचिस में गाने का मौक़ा मिला- छोड़ आए हम वो गलियाँ. कहने को तो दो ही लाइनें थीं पर विशाल भारद्वाज की फ़िल्म थी. फिर एआर रहमान ने मौक़ा दिया फ़िल्म सपने में. लेकिन टर्निंग प्वाइंट आया 1999 में.
फ़िल्म 'हम दिल दे चुके सनम' के लिए इस्माइल दरबार ने मुझे 'तड़प तड़प के इस दिल के लिए' गाना गंवाया. आमतौर पर इस तरह के गाने के लिए संगीतकार किसी सीनियर गायक को ही लेते हैं.
लेकिन इस्माइल ने मुझ पर भरोसा किया और मैंने भी दिल से गा दिया. वो गाना काफ़ी हिट हुआ. इसी साल मेरी एलबम भी रिलीज़ हुई. इसके गाने 'जैसे याद आएँगे वो पल' लोकप्रिय हो गए. आज भी कॉलेज वग़ैरह में जाता हूँ तो ये गाने बजते हैं.
गाने के बोल पर आजकल काफ़ी बहस होती है. कभी ऐसा हुआ कि आपने बोल की वजह से गाने से मना कर दिया हो?
एक बार एक नए संगीतकार ने मुझसे गाना गंवाया. अचानक मुझे लगा कि ये कैसे बोल हैं. मैं गाना छोड़ कर चला गया. फिर बाद में फ़ोन आया कि गाने के बोल बदल दिए हैं आप आ जाइए. संगीतकार की पहली फ़िल्म थी और प्रोड्यूसर बड़ा था, तो संगीतकार भी न नहीं कह पा रहा था. अब शायद लोगों को पता है कि मैं ऐसे गाने नहीं गाता.
आपके लिए अच्छे सिंगर की परिभाषा क्या है?
मेरे हिसाब से अच्छा सिंगर वही है जो किसी संगीतकार के गाने को अपना बना के गा सके. हो सकता है गाना ख़ुशनुमा हो और आपका मूड कुछ और हो.. इसलिए मैं एक दिन में एक ही गाने की रिकॉर्डिंग रखता हूँ. जब तक गायक ख़ुद गाने को महसूस नहीं कर सकता तब तक श्रोता को कैसे अच्छा लगेगा.
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