हॉलीवुड में बॉलीवुड बोले तो नाचने का, गाने का, ड्रामा करने का!
[बॉलीवुड समाचार] हिंदी फिल्मों का स्तर बढ़ रहा है, उनकी गहराई बढ़ रही है, पर पहचान और कद शायद आज भी वही है। बॉलीवुड के लिए हमेशा से एक बड़ा चैलेंज रहा है हॉलीवुड में अपनी पहचान बनाना। शायद इसलिए आस्कर, गोल्डन ग्लोब जैसे पुरस्कार आज भी हमारी प्रतिष्ठा रहते हैं और कान्स जैसे फिल्म फेस्टिवल हमारी ज़रूरत।

ऐसा नहीं कि बॉलीवुड में अच्छी फिल्में नहीं बनतीं लेकिन उनका हश्र बॉक्स ऑफिस और ओवरसीज़ सिनेमा में अच्छा नहीं रहता। अभय देओल आजकल अपने इंटरनेशनल प्रोजेक्ट द लवर्स के काम के सिलसिले में यूएस में हैं और वो हॉलीवुड में बॉलीवुड की इमेज को लेकर काफी हतप्रभ दिखे।
उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि हॉलीवुड में संगीत और गानों का इतना महत्त्व नहीं है। इसलिए सारी बॉलीवुड फिल्में इसी स्तर पर एक ही पैमाने में आंक ली जाती हैं। बॉलीवुड फिल्में मतलब एक माचो सा, स्मार्ट सा हीरो, एक सुंदर सी हीरोइन, थोड़ा नाच, थोड़ा गाना और दि एंड के पहले हाई वोल्टेज ड्रामा।
अभय ने आगे बताया कि इनमें से ज़्यादातर लोगों ने बॉलीवुड फिल्में देखी भी नहीं होती है पर उनकी भी राय यही होती है। हां, बॉलीवुड से लोग परिचित ज़रूर हैं और वो इसके बारे में जिज्ञासा भी रखते हैं। पर सारी बातें बस नाच गाने पर ही रह जाती हैं।


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