ईस्ट से वेस्ट तक दस साल में

ईस्ट से वेस्ट तक दस साल में

ओम पुरी की ब्रिटिश फ़िल्म 'ईस्ट इज़ ईस्ट' का सीक्वेल 'वेस्ट इज़ वेस्ट' दस साल बाद आया है.

हिंदी फ़िल्मों के जाने-माने अभिनेता ओम पुरी की ब्रिटिश फ़िल्म ‘वेस्ट इज़ वेस्ट' का प्रीमियर बुधवार को लंदन के लेस्टर स्क्वायर में हुआ.

ये फ़िल्म 1999 में आई फ़िल्म 'ईस्ट इज़ ईस्ट’ का सीक्वेल है जो काफ़ी चर्चित और सफल हुई थी.

'वेस्ट इज़ वेस्ट' के प्रीमियर के मौके पर बीबीसी ने फ़िल्म के मुख्य कलाकार ओम पुरी, इला अरुण और इसके लेखक अयूब ख़ान-दीन से बात की.

ओंम पुरी

ओम पुरी ने दोंनो फ़िल्मों में सत्तर के दशक में ब्रिटेन में बसे एक पाकिस्तानी, जॉर्ज ख़ान, की भूमिका निभाई है.

अपने किरदार के बारे में ओम पुरी कहते हैं, “दस साल बाद जॉर्ज ख़ान की भूमिका फिर से करना मुझे बहुत अच्छा लगा. ‘वेस्ट इज़ वेस्ट’ में जॉर्ज के किरदार में कई बदलाव आए हैं. ‘ईस्ट इज़ ईस्ट’ में जॉर्ज बहुत ही क्रूर, और तानाशाह किस्म का व्यक्ति था. लेकिन सीक्वेल में वो पहले की अपेक्षा नरम, समझदार और परिपक्व हो गया है.”

ओम पुरी कहते हैं कि उन्हें इस किरदार को करने में ज़्यादा मुश्किल नहीं हुई. वो कहते हैं, “ये किरदार निभाना बहुत मुश्किल नहीं था क्योंकि इसकी स्क्रिप्ट बहुत बढ़िया है. जो कुछ आपको जानना है, वो उसमें था. हां, मुझे ब्रितानी उच्चारण पाने के लिए थोड़ी मेहनत करनी पड़ी.”

निजी ज़िंदगी पर आधारित कहानी

‘ईस्ट इज़ ईस्ट’ और ‘वेस्ट इज़ वेस्ट’ की कहानी पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश लेखक अयूब ख़ान-दीन ने लिखी है. दोंनो ही कहानियां काफ़ी कुछ अयूब की निजी ज़िंदगी पर आधारित हैं.

अयूब कहते हैं, “फ़िल्म के माता-पिता मेरे अपने माता-पिता पर आधारित हैं. ‘वेस्ट इज़ वेस्ट’ का मुख्य किरदार साजिद ख़ान है जो जॉर्ज ख़ान का सबसे छोटा बेटा है. साजिद वैसा ही है जैसा मैं बारह-तेरह साल की उम्र में था. साजिद की ही तरह मुझे स्कूल में नस्लवाद का सामना करना पड़ा, मैं स्कूल से भाग जाता था, मैंने दुकान से सामान भी चुराया. हालांकि मैं पकड़ा नहीं गया लेकिन मेरे माता-पिता ने मुझे एक साल के लिए पाकिस्तान भेजने का फ़ैसला किया. उस एक साल में मैंने अपने पिता की पहली पत्नी, उनकी बेटियों और बाकी रिश्तेदारों को बहुत परेशान किया.”

इला अरुण

जानी-मानी गायिका और अभिनेत्री इला अरुण फ़िल्म में ओम पुरी की पहली पत्नी बनी हैं जिनके पास ओम पुरी का किरदार अपने सबसे छोटे बेटे, साजिद, को पाकिस्तान भेजता है.

ये इला अरुण की पहली अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म है. इस बारे में वो कहती हैं, “मुझे अब भी यक़ीन नहीं हो रहा है. ये बिल्कुल अलग ही अनुभव है. मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मैं किसी अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म में अभिनय करुंगी और उसे इतना पसंद किया जाएगा.”

फ़िल्म के लेखक अयूब ख़ान-दीन कहते हैं कि इसका एक तीसरा भाग भी बनेगा जिसपर वो अगले दो साल में काम करेंगे.

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