रियल लाईफ में भी हीरो विवेक ओबराय

विवेक का कहना है, "मुझे लगता है कि जरूरतमंद लोगों की मदद करना मेरा कर्तव्य है। मुझे लगता है कि दूसरों के लिए अच्छा काम करने से आंतरिक खुशी मिलती है और मैं पूरी तरह से इसमें विश्वास करता हूं। दुनिया में खुशियां फैलाने के लिए हर किसी को अपनी व्यस्तता से समय निकालना चाहिए।"
अपनी मां के एनजीओ 'द यशोधरा ओबेराय फाउंडेशन' (वाईओएफ) का हिस्सा होने के अलावा वह 'कैंसर पेशेंट्स एड एसोसिएशन' (सीपीएए) के ब्रांड एम्बेस्डर भी हैं। विवेक का कहना है, "आज-कल लोगों को बहुत कम समय के लिए कुछ याद रहता है। जब मैं किसी एनजीओ के बारे में बात करता हूं तो लोगों में उसके प्रति जागरूकता पैदा होती है और इस तरह से मदद देने वाले हाथ बढ़ जाते हैं।"
विवेक फिलहाल अपनी नई फिल्म 'प्रिंस-इट्स शो टाइम' के प्रदर्शन का इंतजार कर रहे हैं। पिछले पांच सालों में उनकी यह एक ऐसी फिल्म है जिसमें मुख्य अभिनेता केवल वही हैं। कूकी गुलाटी के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक चोर की कहानी है। यह चोर जब एक सुबह सोकर उठता है तो उसे यह समझ नहीं आता कि उसके बाजु में गोली किस तरह लगी, वह अपनी याददाश्त खो चुका होता है। यह फिल्म नौ अप्रैल को प्रदर्शित होने जा रही है।


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