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    मैं जानता हूं कि ट्यूबलाइट बाहुबली 2 BOX OFFICE को बड़ा झटका देगी!

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    विवेक ओबेरॉय काफी समय परदे पर दिखने वाले हैं यशराज फिल्म्स की बैंक चोर में। आजकल विवेक अपनी फिल्म का प्रमोशन कर रहे हैं लेकिन उनकी बातें सुनकर आपको लगेगा कि वो अपनी फिल्म का कम और ट्यूबलाइट का प्रमोशन ज़्यादा कर रहे हैं।

    विवेक ने हाल ही में बाहुबली 2 के बॉक्स ऑफिस पर बात करते हुए कहा कि मैं चाहता हूं कि फिल्म का रिकॉर्ड टूटे और मैं जानता हूं कि ट्यूबलाइट ऐसा करेगी।

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    विवेक ओबेरॉय ने आगे कहा कि मैं जानता हूं कि ट्यूबलाइट में 500 करोड़ वाली फिल्म बनने की क्षमता है और ये सारे रिकॉर्ड तोड़कर बॉलीवुड को भी गर्व करने का मौका देगी।

    ये पहली बार नहीं है कि जब विवेक सलमान खान की बात कर रहे हैं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विवेक ने कहा कि पिछली बार जब मैंने प्रेस को बुलाया था तो मेरी तशरीफ लग गई थी।

    विवेक उस वाकये की बात कर रहे थे जब सलमान ने उन्हें 42 कॉल किए थे और विवेक ने मीडिया को बुलाकर ये बताया था। और ये सब हुआ था ऐश्वर्या राय के चक्कर में

    बहरहाल, विवेक ने आगे कहा कि मेरी बात जिसको भी समझ नहीं आई वो ट्यूबलाइट है। वैसे विवेक ने सलमान की दबंग 3 पर भी बात कर डाली। बात लंबी है, इसलिए पढ़िए यहां।

    लेकिन विवेक को हम बता ही देते हैं कि बॉलीवुड में बाहुबली जैसी फिल्म नहीं बन सकती।

    बॉलीवुड को जागने की ज़रूरत है

    बॉलीवुड को जागने की ज़रूरत है

    अब बाहुबली की सफलता के बाद बॉलीवुड में अलार्म बज चुका है। आखिर अपनी इज़्जत बचाने के लिए बॉलीवुड को कुछ चीज़ें तो बदलनी ही पड़ेंगी। जानिए फिलहाल क्यों नहीं बन सकती बाहुबली जैसी ब्लॉकबस्टर -

     महंगी फीस

    महंगी फीस

    सलमान खान से लेकर शाहरूख खान तक और सुशांत सिंह राजपूत से लेकर करीना कपूर तक सबकी फीस अगर आप सुन लेंगे तो आपके होश उड़ जाएंगे। अक्षय कुमार हर दिन का एक करोड़ चार्ज करते हैं तो ऋतिक अपने 40 करोड़ की फीस के बाद, एक भी दिन ज़्यादा शूट करते पर हर रोज़ की फीस लेते हैं!

    क्लैश पर क्लैश

    क्लैश पर क्लैश

    हमारे यहां आजकल वापस से हीरो और हीरो के लड़ने का चलन शुरू हो गया है। बाजीराव मस्तानी और दिलवाले जैसी फिल्मों के लिए तो ये क्लैश बहुत ही घाटे का सौदा रहा है। लेकिन फिर भी हमारे यहां क्लैश बंद नहीं हो रहे हैं।

    हर किसी को चाहिए तारीख

    हर किसी को चाहिए तारीख

    हर स्टार को आजकल छुट्टी या त्योहार चाहिए। अब देश त्योहार ज़्यादा मनाना तो शुरू नहीं कर देगा। नतीजा हो रहा है कि फिल्में कम रिलीज़ हो रही हैं या फिर आगे बढ़ा दी जाती हैं। रईस तो सुलतान के साथ जुलाई 2016 में रिलीज़ होते होते जनवरी 2017 में खिसक गई। लिहाज़ा फिल्म में दर्शकों की दिलचस्पी घट गई।

     कंटेंट कहां है?

    कंटेंट कहां है?

    आजकल फिल्मों में कंटेंट कम और मसाला ज़्यादा बिक रहा है। जिन फिल्मों में कंटेंट है भी तो भी किसी ना किसी कारण से दर्शक उसे नकार ही देते हैं। पिछले साल अलीगढ़, धनक, वेटिंग जैसी शानदार फिल्मों को दर्शक ही नहीं मिले।

    भंसाली को हम पीट देते हैं

    भंसाली को हम पीट देते हैं

    वास्तव में अगर बाहुबली से तुलना की जाए तो हमारे पास एक ही इंसान है जो हर फ्रेम को खूबसूरती से परदे पर उतारता है। वो है संजय लीला भंसाली लेकिन उन्हें हम आए दिन फिल्में बनाने पर या तो मारते पीटते हैं, या उनका सेट जला देते हैं या उनकी फिल्म बैन करवाने पर तुल जाते हैं।

    कितना ज़्यादा मसाला

    कितना ज़्यादा मसाला

    बाहुबली मसाला, ड्रामा, रोमांस, एक्शन का भरपूर डोज़ थी। लेकिन हमारे यहां हर चीज़ की अति करने की आदत हो जाती है। अगर दबंग बन रही है तो सलमान की शर्ट अपने आप फट जाती है और अगर सिंघम बन रही है तो अजय देवगन की बाईक अपने आप उड़ जाती है।

     स्टारडम पर टिकी हैं फिल्में

    स्टारडम पर टिकी हैं फिल्में

    हमारे यहां फिल्में स्टार के नाम पर बिक जाती है। इसलिए मोहनजोदड़ो जैसी शानदार फिल्म के लिए आशुतोष गोवारिकर ने कोई रिसर्च करना ज़रूरी नहीं समझा। नतीजा ये हुआ कि फिल्म में दिलचस्पी होने के बावजूद ये फिल्म दर्शकों को ज़्यादा खींच नहीं पाई। जबकि फिल्म के पास ऋतिक रोशन जैसा एक्टर था, मोहनजोदड़ो जैसी तगड़ी स्क्रिप्ट थी और एआर रहमान का म्यूज़िक था।

    कितना करोगे प्रमोशन

    कितना करोगे प्रमोशन

    अगर आप ध्यान से देखें तो बाहुबली को प्रमोट करने ना ही कोई स्टार किसी सीरियल में गया और ना ही फिल्म को लेकर बहुत ज़्यादा प्रमोशन किया गया। फिल्म की केवल सोशल मार्केटिंग बड़े ही ध्यान से की गई। ऐसे में फिल्म की तरफ लोगों का ध्यान गया और इसके बारे में दिलचस्पी बढ़ी।

    प्लान करके बनाया गया सीक्वल

    प्लान करके बनाया गया सीक्वल

    फिल्म का सीक्वल प्लान करके बनाया गया। यानि कि डायरेक्टर को पता था कि उसे फिल्म दो पार्ट में बनानी है। ये नहीं कि दबंग सुपरहिट हो गई तो चलो दबंग 2 बना लेते हैं। ऐसे में फिल्म का आईडिया इतने अच्छे से डेवेलप हो ही नहीं सकता। और ना ही फिल्म सीक्वल लग सकती है।

     एक फिल्म में पांच साल

    एक फिल्म में पांच साल

    बाहुबली बनाने में पांच साल का समय लगा। इतने में अक्षय कुमार 20 फिल्में कर जाते हैं। तो फिल्में भी अच्छी होने के बावजूद औसत ही रह जाती हैं। वहीं आमिर खान 2 साल लेकर फिल्म बनाते हैं तो वो मेहनत उनकी कमाई में दिखाई देती है।

    English summary
    Viveik Oberoi wants Tubelight to shatter Baahubali records.

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