प्रेमानंद महाराज से गुरु दीक्षा लेने के बाद विराट-अनुष्का की बदलेगी जिंदगी! अब नहीं कर पाएंगे ये सारे काम

Virat Kohli Anushka Sharma Premanand Maharaj Guru Diksha: विराट कोहली और अनुष्का शर्मा हाल ही में एक बार फिर वृंदावन पहुंचे, जहां उन्होंने प्रेमानंद महाराज के आश्रम में जाकर उनका आशीर्वाद लिया। यह दौरा विराट कोहली की विजय हजारे ट्रॉफी के जरिए घरेलू क्रिकेट में वापसी की चर्चाओं से कुछ दिन पहले हुआ।

Virat Kohli Anushka Sharma Premanand Maharaj Guru Diksha

श्री हित राधा केली कुंज में दोनों ने प्रेमानंद महाराज के प्रवचन सुने, जिनमें उन्होंने भक्ति, जीवन के उद्देश्य और सांसारिक सफलता से ऊपर उठने की बात कही। इस साल यह दोनों का वृंदावन का तीसरा दौरा था।

विराट अनुष्का ने ली गुरु दीक्षा

इस बार लोगों का ध्यान सिर्फ उनकी मौजूदगी पर ही नहीं, बल्कि उनके सादे और आध्यात्मिक रूप पर भी गया। दोनों के माथे पर चंदन लगा था, कपड़े बेहद सादे थे और गले में तुलसी कंठी माला दिखाई दी। साथ ही उनके हाथ में नाम जप करने के लिए माला और माला का बैग भी था। जिससे पता चलता है कि उन्होंने प्रेमानंद जी महाराज से गुरु दीक्षा ले ली है और अब वो संसार में रहकर आध्यात्म की ओर रुख करेंगे।

कैसे बनती है तुलसी की कंठी माला

अब आपको बताते हैं कि विराट अनुष्का ने गले में कंठी माला पहनी हुई है। लेकिन क्या आपको इस माला के महत्व के बारे में पता है? तुलसी कंठी माला तुलसी के पौधे की लकड़ी से बनाई जाती है और इसे गले में पहना जाता है। आमतौर पर यह दो या तीन धागों में होती है। इसे भगवान विष्णु और उनके अवतार भगवान कृष्ण और राम के भक्त पहनते हैं।

क्या होता है फायदा

हिंदू मान्यताओं में तुलसी को बहुत पवित्र माना जाता है। इसे देवी लक्ष्मी का रूप और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि तुलसी माला पहनने से मन को शांति मिलती है, नकारात्मकता दूर होती है और व्यक्ति का ध्यान भक्ति और अनुशासन की ओर बढ़ता है।

आयुर्वेद और वैदिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी माला शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी मानी जाती है। कहा जाता है कि यह ग्रहों के संतुलन में मदद करती है और मानसिक शांति देती है।

क्या-क्या हैं नियम

तुलसी कंठी माला को केवल फैशन के लिए नहीं पहना जाता। इसे पहनने से पहले शुद्ध किया जाता है और भगवान को अर्पित किया जाता है। जो लोग इसे धारण करते हैं, उनसे साफ-सुथरी आदतें, सादा जीवन और नियमित पूजा-पाठ की उम्मीद की जाती है। इसे एक आस्था और जिम्मेदारी के रूप में देखा जाता है।

माला पहनते समय कुछ नियम भी माने जाते हैं। अशुद्ध कार्यों के दौरान या मांसाहार, प्याज, लहसुन और शराब का सेवन करते समय इसे नहीं पहनना चाहिए। माला को साफ रखना चाहिए और जमीन पर गिरने नहीं देना चाहिए।

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