दिन में 80 सिगरेट पीने की लत ने बॉलीवुड के इस एक्टर की तबाह कर दी थी जिंदगी, शरीर में ऐसी-ऐसी जगह हुआ था कैंसर
विनोद खन्ना अपने समय के मशहूर एक्टर्स में से एक थे। जिन्होंने अपनी एक्टिंग की बदौलत बॉलीवुड इंडस्ट्री पर राज किया था। उनकी फिल्मों का क्रेज दर्शकों में आज भी साफ देखने को मिल जाता है। विनोद खन्ना ने अपने करियर में कई सुपरहिट फिल्में दी है और अपनी काबिलीयत के दम पर उन्होंने अपना नाम उस समय के सबसे महंगे एक्टर्स में शामिल कर लिया था।

लेकिन विनोद खन्ना ने अपने करियर के पीक पर अचानक ही बॉलीवुड की चका चौंद को छोड़ अमेरिका के ओरेगन में आधात्मिक गुरु ओशो के कम्यून में शामिल होने का फैसला ले लिया था। उनके इस फैसले को सुन फैंस को बड़ा झटका दिया था। हलाकि विनोद खन्ना ने दोबारा बॉलीवुड में शानदार वापसी की थी। मगर विनोद खन्ना की मौत के सालों बाद उनकी पत्नी ने उनकी निजी जिंदगी से जुड़ा एक बड़ा राज खोला है जिसे शायद कम लोग ही जानते होंगे। आइए जानते हैं कि क्या बताया कविता खन्ना ने...
विनोद खन्ना की पत्नी कविता खन्ना ने अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से अपने पति की बीमारी के बारे में बात की है उन्होंने बताया कि उनके पति 2001 में लंग कैंसर से जूझ रहे थे। वह सालाना चैकअक के लिए जाते थे, लेकिन डॉक्टर्स ने उन्हें बताया कि उनके फेफड़ों में कुछ पैच आए हैं। वह दिन में लगभग 40 से 80 सिगरेट पिया करते थे। हम मुंबई के MRI स्पेशलिस्ट के पास गए तब उन्होंने बताया कि इन्हें फेफड़ों का कैंसर है।
कविता ने बताया कि वह अपनी बीमारी को प्राइवेट रखना चाहते थे। कविता ने बताया कि वह आध्यात्मिक गुरु श्री-श्री रविशंकर के पास गए। उन्होंने AIIMS दिल्ली में ऑन्कोलॉजी के हेड से सलाह ली थी। उन्होंने जानकारी ली थी कि क्या सर्जरी टाली जा सकती है या नहीं। मेडिकल क्लीयरेंस मिलने के बाद विनोद खन्ना ने ऋषिकेश के आश्रम में समय बिताया था।
इसके बाद हम जर्मनी गए। वहां एक शाम उनके कंधे में तेज दर्द उठा। दो दिनों तक वह दर्द में करहाते रहे। बाद में गुरुदेव उनसे मिलने के लिए आए उन्होंने एक्सरे करवाने की सलाह दी अच्छी बात यह थी कि एक्सरे में कोई धब्बा नहीं आया उनका कैंसर ठीक हो चुका था। कविता ने आगे बताया कि लगभग 1 दशक बाद मालूम हुआ कि उन्हें ब्लैडर कैंसर हो गया है। उनकी हालत काफी गंभीर थी। अगर वह एलोपैथिक ट्रीटमेंट करवाते हैं तो दो साल बाद उनके जिंदा रहने की 25 % चांस होंगे, लेकिन विनोद ने अलग रास्ता चुना उन्होंने गुरुदेव को कहा कि वह अपनी जिंदगी पूरी जी चुके हैं। मेरे जाने का समय आ गया है मैं जाने के लिए तैयार हूं। मैं अपने शरीर को टॉर्चर नहीं करना चाहता। उन्होंने आश्रम में पंचकर्म की थेरेपी करवाई थी। दो साल बाद जब स्कैन करवाया तब उनका कैंसर गायब था।


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