सिर्फ हीरो नहीं विलेन की भी लव स्टोरी होती है- रितेश

रितेश से इंटरव्यू के दौरान हमने पूछा कि बॉलीवुड में दो तरह के विलेन रहे हैं एक तो मोगैम्बो और गब्बर जैसे आइकॉनिक और एक शाहरुख खान जैसे विलेन जिन्हें हीरो से ज्यादा प्यार मिला, तो एक विलेन में आप किस तरह के विलेन के रुप में दर्शकों को नज़र आएंगे? इसपर रितेश का जवाब था- "ये आइकॉनिक शब्द बहुत ही खतरनाक सा है। हर वो इंसान जो कि ये सोचकर काम करता है कि वो आइकॉनिक चीज बना रहा है वो अक्सर असफल हो जाता है। मुझे नहीं लगता कि मैंने कभी ये सोचकर कोई फिल्म की है या बनाई है कि मैं कुछ आइकॉनिक बना रहा हूं।"
"लेकिन सच तो ये है कि लोगों का प्यार मिलने से चीजें आइकॉनिक बन जाती है। जहां विलेन की बात आती है तो मैंने प्राण साहब, अमरीश पुरी जी याद आते हैं। जहां तक शाहरुख खान की बात है तो जब डर आई उस वक्त मैं युवा था और उस किरदार से मैं खुद को काफी रिलेट कर सकता था। डर मेरी पसंदीदा फिल्मों में से एक है। अगर गब्बर की बात करें तो वो विलेन है लेकिन उसकी कहानी अगर आप देखें तो कहीं ना कहीं उसकी जिदंगी में कुछ ऐसा हुआ होगा कि वो विलेन बन गया। लेकिन गब्बर की कहानी कभी नहीं दिखाई गयी। लेकिन एक विलेन में विलेन की कहानी भी आपको दिखाई जाएगी। आपको ये महसूस होगा कि अगर ये विलेन बना है तो क्यों बना है।
तो देखते हैं रितेश देशमुख की ये पहल उनके करियर को किस मकाम तक लेकर जाती है। अगर एक विलेन फिल्म को दर्शकों ने प्यार दिया तो हो सकता है कि आने वाले समय में रितेश ऐसी अलग किरदारों वाली और भी फिल्में करते नज़र आएं।


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