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    कॉमेडी है विद्या बालन की पहली पसंद

    By Neha Nautiyal
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    पीएम तिवारी

    बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए विशेष

    विद्या बालन की नई फ़िल्म एक थ्रिलर है

    अभिनेत्री विद्या बालन ने अपने गंभीर अभिनय के लिए भले ही सराहना और अवार्ड बटोरे हों, उनकी पहली पसंद कॉमेडी है.

    सुजय घोष की फिल्म ‘कहानी’ की शूटिंग कर रही विद्या के लिए कोलकाता दूसरा घर बन गया है. यहां इस फिल्म की शूटिंग के अलावा उन्होंने पंडालों का दौरा कर दुर्गापूजा का भी आनंद लिया.

    इस दौरान उन्होंने विभिन्न विषयों पर लंबी बातचीत की. पेश हैं प्रमुख अंशः-

    आपकी कई फिल्मों की शूटिंग कोलकाता में हो रही है. क्या यह महानगर आपके लिए लकी साबित हो रहा है ?

    हां, कोलकाता मेरे लिए दूसरे घर की तरह है. मैंने अपने फिल्मी सफ़र की शुरूआत बंगाल से ही की थी. ‘भालो थेके’ मेरी पहली फिल्म थी. शरत चंद्र के उपन्यास पर आधारित ‘परिणीता’ में भी दुर्गापूजा के दृश्य थे. इसलिए कोलकाता और बंगाल मेरे लिए हमेशा खास रहेंगे.

    आपने अपनी हालिया कई फिल्मों में गंभीर अभिनय के लिए सराहना और अवार्ड बटोरे हैं. आपको कैसी फिल्में पसंद हैं ?

    कॉमेडी मेरी पहली पसंद है. मुझे ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्मों की तरह पारिवारिक कॉमेडी बेहद पसंद है. उनकी फिल्म गोलमाल तो मुझे सबसे प्रिय है. इसके अलावा मुझे डेविड धवन की कॉमेडी फिल्में भी पसंद हैं. हाल में मैंने तमाम फिल्मों में इतनी गंभीर भूमिकाएँ निभाई हैं कि अब कॉमेडी करना चाहती हूं. मुझे ऐसी भूमिकाएं अच्छी लगती हैं.

    क्या गंभीर भूमिकाएं ऊर्जा को सोख लेती हैं ?

    मुझे लगता है कि एक अभिनेता को अपने निजी जीवन को फिल्मों में निभाए जा रहे चरित्र से अलग रखने की कला आनी चाहिए. मैं भी धीरे-धीरे यह सीख रही हूं. कुछ भूमिकाएं मुझे जरूर थका देती हैं. मैं सोचने लगती हूं कि आखिर असली जिंदगी में भी तो लोग इन परिस्थितियों से गुजरे होंगे.

    परिणीता में अभिनय का मौक़ा कैसे मिला ?

    मैं इसके लिए खुद को भाग्यशाली मानती हूं कि अपने करियर की शुरूआत में ही मुझे ऐसी महान फिल्म में काम करने का मौक़ा मिला. मैंने इसमें अपना सर्वश्रेष्ठ अभिनय किया था. लेकिन इस बात की कल्पना भी नहीं की थी कि इसे इतनी कामयाबी मिलेगी.

    फिल्मों में नेगेटिव रोल का आफ़र मिले तो करेंगी ?

    निगेटिव रोल के लिए तैयार

    मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है. अगर मैं चरित्र से संतुष्ट हो जाऊंगी तो जरूर करूंगी. इसके अलावा मैंने अभिनय में अब तक इसका कोई पैमाना नहीं तय किया है कि कैसी भूमिकाएँ करनी है और कैसी नहीं. मैं बस बढ़िया भूमिकाएं चाहती हूं. वह चाहे सकारात्मक हो या नकारात्मक.

    बालीवुड के अब तक का सफ़र कैसा रहा है ?

    एक शब्द में कहूं तो संघर्षपूर्ण. मुझे लंबे अरसे तक उपेक्षा की पीड़ा झेलनी पड़ी. ऐसे में परिवार के लोगों और मित्रों ने मेरा साहस बंधाया. उस दौरान एक समय ऐसा भी था जब मैं आईने में अपना चेहरा देखने से डरने लगी थी. आईना देखते ही लोगों की बुरी टिप्पणियां याद आने लगती थी.

    अब कामयाबी के बाद आपका जीवन कितना बदला है ?

    मैं कुछ ज्यादा आलसी हो गई हूं. अभिनेत्री बनने का मेरा सबसे बड़ा सपना सच हो गया है. मैं उन तमाम लोगों के साथ काम कर रही हूं जिनके साथ काम करना कभी एक सपना था.

    ‘ कहानी ’ की कहानी कैसी है ?

    यह एक थ्रिलर है. मैंने इसमें एक ऐसी मां की भूमिका निभाई है जिसके बच्चे की दुर्घटना में मौत हो जाती है. वह मां अब अपने बच्चे की हत्या का बदला लेना चाहती है. इस कहानी में कई मोड़ हैं.

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