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    विद्या बालन को बदनामी से मिली इज्जत

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    एक चर्चित कहावत है ना..बदनाम हुए तो क्या नाम नहीं हुआ..जो बिल्कुल सटीक बैठती है फिल्म अभिनेत्री विद्या बालन पर। अभिनेत्री विद्या बालन इन दिनों खासा चर्चा में हैं। वजह है उनको नेशनल फिल्म अवार्ड मिलना। 'द डर्टी पिक्चर' के किरदार के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से नावाजा जा रहा है। फिल्म का रोल यानी सिल्क स्मिता ने उन्हें वहां पहुंचा दिया जहां पहुंचना हर किसी के बस में नहीं होता है।

    फिल्मों में लेट एंट्री करने वाली विद्या ने अपने आप को समझते हुए रोल चुने और उन्ही सही फैसलों की वजह से विद्या बालन चोटी की अभिनेत्रियों में शुमार होने लगी हैं। उम्र से बड़ी दिखने वाली विद्या ने सिल्वर स्क्रीन पर ग्लैमरस रोल करने की कोशिश तो की लेकिन लोगों ने उन्हें सराहा नहीं, लेकिन विद्या की समझ में आ गया कि अगर बॉलीवुड में जगह बनानी है तो खास चुनिंदा रोल ही करने होंगे और उन्होंने बोल्ड किरदारों को तरजीह दी, जिसके चलते विद्या आज द ग्रेट विद्या बन गयी हैं।

    खैर विद्या बालन के अभिनय की बात फिर कभी करेंगे लेकिन सोचने वाली बात यह है कि नेशनल फिल्म अवार्ड से वो फिल्में या वो किरदार नवाज दिये जाते हैं जिन्हें आम तौर पर हम अपने पूरे परिवार के साथ देख नहीं सकते है। द डर्टी पिक्चर एक 'ए' कार्डेडे मूवी थी जो कि वयस्कों के लिए बनायी गयी थी, फिल्म को लेकर सेंसर में भी काफी गहमा-गहमी हुई थी लेकिन आज यह फिल्म पिछले साल की सबसे बड़ी हिट बन गयी है और विद्या को अवार्ड पर अवार्ड दिला रही है।

    ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि इस तरह के किरदारों को जो कि खुले आम वयस्कता परोसते हैं उन्हें नेशनल अवार्ड से नवाजा गया है। थोड़ा पीछे चलते हैं आपको 2001 की कल्पना लाजिमी के निर्देशन में बनीं फिल्म 'दमन' याद होगी जिसमें मुख्य भूमिका अभिनेत्री रवीना टंडन ने निभायी थी। कोई संदेह नहीं कि फिल्म नारी अत्याचार की रोचक कहानी कहती थी।

    लगातार फ्लाप फिल्में देने वाली रवीना टंडन ने ग्लैमरस रोल करके सफलता हासिल की थी, उसके बाद उन्होंने 'दमन' जैसी ऑफबीट फिल्म की जिसमें उन्होंने काफी बोल्ड सींस भी दिये, जिसके बाद उनकी झोली में बेस्ट अभिनेत्री का नेशनल अवार्ड आ गया। जिस समय उनके लिए अवार्ड की घोषणा हुई थी उस समय इस बात लेकर काफी बवाल मचा था कि जिस अभिनेत्री ने आज तक एक भी फिल्म फेयर अवार्ड भी नहीं जीता वो भला नेशनल अवार्ड कैसे जीत गयीं।

    1974 में आयी फिल्म 'अंकुर' भी आपको याद होगी जिसमें एक गांव की गरीब महिला का चरित्र निभाया था अभिनेत्री शबाना आजमी ने। जिसे उसका पति शादी करके छोड़ कर चला जाता है, उस महिला के संबंध उसके गांवे के सरपंच से हो जाते है, फिल्म में कई ऐसे सींस थे जो उस जमाने के हिसाब से काफी बोल्ड थे लेकिन फिल्म के लिए अभिनेत्री शबाना आजमी को नेशनल फिल्म अवार्ड मिला।

    कुछ ऐसी ही फिल्म थी 'अर्थ' जो कि एक्स्ट्रा मैरटल रिलेशनशीप की कहानी कहती है, इस फिल्म में भी शबाना आजमी का किरदार काफी बोल्ड था लेकिन इस फिल्म के लिए भी शबाना आजमी को नेशनल अवार्ड से नवाजा गया।

    कुछ इसी तरह की फिल्म थी 1977 में आयी 'भूमिका' और 1982 में आयी फिल्म 'चक्र', जिसमें मुख्य भूमिकाएं निभायी थीं अभिनेत्री स्मिता पाटिल ने। महिला चरित्रों की कहानी कहती इन दोनों ही फिल्मों में महिला पर हुए जुर्म को दिखाया गया था जिसके लिए स्मिता पाटिल ने काफी बोल्डनेस परिचय दिया था। इन दोनों ही फिल्मों के लिए स्मिता को नेशनल अवार्ड मिला था।

    जिन फिल्मों का हमने ऊपर जिक्र किया वो सभी बेहतरीन कहानी और बेहतरीन निर्देशन का नमूना है जिनके लिए यह फिल्में आज तक जेहन में जिंदा है। लेकिन इसमें कोई शक नहीं इन फिल्मों के किरदार हद से ज्यादा बेबाक थे जिसके लिए हमारी फिल्मी अभिनेत्रियों को भी काफी बिंदास होना पड़ा और शायद इसलिए उनकी मेहनत रंग लायी ओर इन फिल्मों ने इनकी झोली में नेशनल अवार्ड दिलवा दिया।

    इसलिए विद्या बालन का यह कहना कि उन्हें बदनामी ने इज्जत दिला दी तो गलत नहीं है। आखिर उनके बोल्ड और बिंदासपन ने ही तो उन्हें सफलता की चोटी पर पहुंचाया है।

    English summary
    Actress Vidya Balan won the National Film Award For Best Actress. The Success behind this, her Bold and Dirty Character.
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