'बालिका वधु' ने कलर की रेटिंग बढाई

इस धारावाहिक में आनन्दी का किरदार अहम है। 12 वर्ष की किशोर बालिका आनंदी का विवाह उसी की उम्र के जगदीश के साथ हो जाता है। शादी के बाद आनंदी का बचपन छिन जाता है, वो ससुराल के नियमों में बंध्ा कर अपना जीवन जीने लगती है।
इस कहानी के लेखक पुरेंदू शेखर ने 16 वर्ष पहले इसकी कहानी लिखी थी। वो इस कहानी पर अहसास नाम से फिल्म बनाना चाहते थे।
शेखर राजस्थान के रहने वाले है, उनका कहना है कि राजस्थान में आज्ा भी यह प्रथा विद्यमान है। और दुख की बात है कि इस कुप्रथा के खिलाफ कोई काम नहीं हो रहा है।


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