कैमरे की नजर में सत्यजित रे

इस छायाचित्र प्रदर्शनी को सत्यजित रे: फ्रॉम स्क्रिप्ट टू स्क्रीन नाम दिया गया है। प्रदर्शनी में रे के करीबी सहयोगी निमाई घोष द्वारा लिए गए छायाचित्रों को प्रदर्शित किया गया है। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सचिव जवाहर सिरकर ने एक महीने तक चलने वाली 101 छायाचित्रों वाली इस प्रदर्शनी का मंगलवार की शाम उद्घाटन किया।
एनजीएमए के निदेशक राजीव लोचन ने कहा, " रे एक फिल्म संस्थान हैं। उनकी जगह कोई नहीं ले सकता। यह प्रदर्शनी रे और उनके काम को खोजने का एक प्रयास है। हम कृतज्ञ हैं कि घोष ने रे के जीवन के कुछ बेहद रोचक पलों को छायाचित्रों में उतारा है।"
'पाथेर पांचाली' जैसी फिल्म बनाने वाले निर्देशक से अपनी निकटता की चर्चा करते हुए घोष ने कहा, "मैं भाग्यशाली हूं। मैं अपने फोटोग्राफी करियर की शुरुआत में 1968 में रे के संपर्क में आया था। जब वह काम करते थे उस वक्त मैंने उन्हें बहुत करीब से देखा है। शूटिंग के दौरान या पटकथा लिखते समय वह एक तानाशाह जैसे दिखते थे। वह सारे कलाकारों और शूटिंग दल पर नियंत्रण रखते थे।"
प्रदर्शनी के ज्यादातर छायाचित्रों में अपनी फिल्मों की शूटिंग के दौरान रे काम में डूबे दिखाई देते हैं।
विज्ञापन निर्माण से फिल्म निर्माण का रुख करने वाले रे ने 37 फिल्मों का निर्देशन किया था। इनमें फीचर फिल्में, वृत्तचित्र और लघु फिल्में शामिल हैं।
अपनी पहली ही फिल्म 'पाथेर पांचाली' (1955) में ग्रामीण जीवन और उसके संघर्ष पर प्रकाश डालकर रे ने भारतीय फिल्मों की ओर पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित किया था। उन्हें ऑस्कर के अलावा कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिले। 1992 में उनका देहावसान हो गया था।


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