थलाईवी हिंदी फिल्म रिव्यू - कंगना रनौत को क्रिटिक्स का सलाम, कहा - भारतीय सिनेमा की बेस्ट बायोपिक
कंगना रनौत स्टारर जयललिता बायोपिक का तमिल प्रीमियर कुछ दिनों पहले ही हुआ था और क्रिटिक्स ने फिल्म की जमकर तारीफ की थी। अब 10 सितंबर को रिलीज़ होने जा रही फिल्म को हिंदी क्रिटिक्स ने भी देख लिया है और हर किसी का फिल्म के बारे में एक ही ख्याल है - बेहतरीन। सबका एक मत से मानना है कि ये फिल्म कंगना रनौत के करियर की बेस्ट फिल्म है।
वहीं क्रिटिक्स का ये भी मानना है कि भारतीय सिनेमा के इतिहास में वाकई इससे अच्छी बायोपिक दर्शकों ने आज तक नहीं देखी होगी। हर किसी का कहना है कि ये फिल्म दर्शकों को सिनेमा हॉल में देखनी ही चाहिए।

हिंदी में थलाईवी देखने के बाद क्रिटिक्स कंगना रनौत की अभिनय क्षमता को सलाम कर रहे हैं। सब सहमत हैं - कंगना रनौत से बेहतर अभिनेत्री फिलहाल हिंदी सिनेमा के पास नहीं है। जिस तरह, कंगना रनौत जयललिता के किरदार में उतर जाती हैं लगता ही नहीं है कि स्क्रीन पर आप किसी और को देख रहे हैं। फिल्म के लिए कंगना रनौत को लगातार तारीफ मिल रही है।

बस एक ही शब्द में सिमट गई फिल्म
तरण आदर्श ने अपने ट्वीट में लिखा - थलाईवी के लिए एक ही शब्द है - दमदार। हिंदी सिनेमा में रिलीज़ होने वाली अब तक की शायद सबसे सशक्त बायोपिक। ढेर सारा ड्रामा, उतना ही मज़बूत इमोशन और दिल को छू लेने वाले कलाकार। कंगना रनौत और अरविंद स्वामी केवल अवार्ड जीतने के लिए हर सीन करते नज़र आते हैं।

कंगना रनौत का करियर बेस्ट
हिंदी फिल्में बहुत ही कम ऐसे मौके देती हैं जहां कलाकार अपने अभिनय के दम पर अपने किरदार को अमर बना दें। कंगना को ये मौका मिला है इस बायोपिक में जयललिता के किरदार के साथ। उनके करियर का सबसे शानदार एक्ट। इसके लिए उन्हें अवार्ड और तारीफें दोनों भर भर के मिलेंगे।

महान एक्टर हैं अरविंद स्वामी
अरविंद स्वामी के किरदार की जितनी भी तारीफ कर दी जाए वो कम ही पड़ेगी। उन्होंने फिल्म में इतना शानदार काम किया है। बेहद शानदार। फिल्म में एक और टैलेंट जो उभरकर सामने आता है वो हैं राज अर्जुन। वो अपनी कला के बेस्ट फॉर्म में नज़र आते हैं। नासिर जिस भी सीन में आते हैं उसमें जान फूंक देते हैं।

बेस्ट बायोपिक
बजरंगी भाईजान और बाहुबली के लेखक केवी विजयेंद्र प्रसाद और रजत अरोड़ा मिलकर जयललिता के जीवन के सबसे अहम पहलुओं को एक बेहद शानदार कहानी में पिरोते हैं। फिल्म जयललिता के जीवन के हर उतार चढ़ाव, हर हार और जीत को खूबसूरती से बयान करती है।

अव्वल है डायरेक्शन
विजय का डायरेक्शन अव्वल स्तर का है। वो पहले हाफ में जयललिता की लव स्टोरी और दूसरे हाफ में उनके जीवन के राजनीतिक करियर को बड़े ही शानदार तरीके से बैलेंस करते हैं। इसके साथ ही फिल्म उस दशक की हर छोटी से छोटी डीटेल पर भी ध्यान देती है। फिल्म में आत्मा है, भव्यता है और स्टाईल है।

कंगना को देख कर कोई भी चौंकेगा
अश्विनी कुमार ने ट्वीट कर लिखा - कंगना रनौत ने जयललिता को परदे पर ऐसा जीवित किया है कि कोई भी चौंक जाएगा। शानदार। कोई दो राय नहीं कि ये कंगना के करियर का सबसे कठिन रोल था और ये कंगना के करियर की सबसे शानदार फिल्म है। इस बायोपिक को 4 स्टार मिलने ही चाहिए। अरविंद स्वामी ने तो मुझे हैरान ही कर दिया। क्या बेहतरीन एक्टर हैं। नासिर का काम भी उतना ही शानदार।

एक नहीं दो नेशनल अवार्ड
सलिल आचार्य ने ट्वीट कर लिखा - मैं फिल्म के लिए एक नहीं बल्कि दो नेशनल अवार्ड देख पा रहा हूं, एक कंगना रनौत के लिए और दूसरा अरविंद स्वामी के लिए।

बस देखते ही रहो
रघुवेंद्र सिंह ने ट्वीट कर लिखा - थलाईवी देखने के बाद मेरे पास शब्द ही नहीं बचे हैं। क्या शानदार फिल्म है। हिंदी सिनेमा में ऐसी बायोपिक अब तक बनी ही नहीं है। काश इस फिल्म का सीक्वल भी बन पाता। क्योंकि मैं चाह ही नहीं रहा कि ये इतनी अच्छी फिल्म खत्म हो जाए। कंगना रनौत के करियर की बेस्ट फिल्म यही है।

फिल्म की पूरी टीम को बधाई
रघुवेंद्र सिंह ने आगे लिखा - कंगना रनौत के हर सीन पर ताली बजाना चाहता था। वहीं अरविंद स्वामी एक लेजेंड हैं। थलाईवी का एक मुख्य स्तंभ हैं राज अर्जुन। हर एक्टर शानदार है। इतने बड़े स्तर की भव्य फिल्म, कोरोना काल में पूरी कर लेने के लिए फिल्म के प्रोड्यूसर्स को सलामी।


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