फ़िल्म 'तेरे बिन लादेन' का नाम बदला गया

बीबीसी उर्दू संवाददाता, कराची से
पाकिस्तान के युवा गायक अली ज़फर ने अपनी बॉलीवुड फिल्म 'तेरे बिन लादेन" का नाम बदल दिया और अब उसे 'तेरे बिन" के नाम से रिलीज़ किया जाएगा. अली ज़फर इस फिल्म में अभिनय कर रहे हैं और उनके मुताबिक़ इस फ़िल्म का नाम केवल पाकिस्तान के लिए बदला गया है.
भारत में बनाई गई इस फ़िल्म के निर्देशक और लेखक अभिषेक शर्मा हैं जबकि अली ज़फर इस फ़िल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं और बतौर अभिनेता यह उनकी पहली फ़िल्म है. पाकिस्तान में विभिन्न शहरों के क़रीब 15 सिनेमाघरों में 16 जुलाई को ये फ़िल्म प्रदर्शित की जाएगी.
अली ज़फर जो इन दिनों मुंबई में हैं, उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा, “पाकिस्तान में मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इस फ़िल्म के नाम को बदलने का फैसला लिया गया है ताकि कोई ग़लतफहमी पैदा न हो."
उन्होंने कहा, “फ़िल्म में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे किसी को तक़लीफ हो और किसी के विचारों ठेस पहुँचे." उनके अनुसार इस फ़िल्म में दिखाया गया है कि 2001 की घटना के बाद पूरी दुनिया में पाकिस्तानियों और मुसलमानों को पूर्वग्रह का सामना करना पड़ा.
फ़िल्म को लेकर विवाद
अली ज़फर ने बताया कि इस पूरी कहानी को हंसी मज़ाक में बयान किया गया है. ध्यान रहे कि यह फ़िल्म रिलीज़ होने से पहले पाकिस्तान में विवादों का शिकार हो गई है और इसके एक गीत 'उल्लू का पट्ठा" को स्थानीय एफ़एम स्टेशन पर चलाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.
उनके मुताबिक अधिकारियों ने इन गाने के शब्दों पर आपत्ति जताई थी लेकिन 'उल्लू का पट्ठा' कोई गाली नहीं है बल्कि इस का अर्थ यह है कि उल्लू का शागिर्द. ग़ौरतलब है कि अली ज़फर इस फ़िल्म में एक पाकिस्तानी पत्रकार की भूमिका निभा रहे हैं जो कि अमरीका जाकर फॉक्स न्यूज़ या सीएनएन जैसी बड़ी संस्थाओं में काम करने का इच्छुक है लेकिन अमरीकी दूतावास उनके वीज़ा आवेदन को रद्द कर देता है.
उसके बाद उस पत्रकार की मुलाक़ात अल क़ायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन जैसे एक व्यक्ति से होती है जिसकी मदद से वे जाली वीडियो बना कर टीवी चैनल्स को बेचते हैं और रातों रात मशहूर हो जाते हैं लेकिन अमरीकी अधिकारी उनके पीछे पड़ जाते हैं.


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