यौन संबंध :क्या समाज बदल रहा है?

By Staff
यौन संबंध :क्या समाज बदल रहा है?

भारत में यौन शिक्षा को लेकर कई बार बवाल मच चुका है और कोई सहमति नहीं बन पाई है.

लेकिन जिस समाज में यौन शिक्षा को लेकर सहमति नहीं बन रही है वह चुपचाप यौन संबंधों को लेकर खुलता जा रहा है.

कम से कम हाल ही में हुआ सर्वेक्षण और एक नई फ़िल्म का कथानक तो इसी के संकेत देता है.

इस सर्वेक्षण के मुताबिक़ भारत में हर चौथी अविवाहित नवयुवती यौनक्रिया में सक्रिय है. लेकिन इनमें से सिर्फ़ सोलह प्रतिशत निरोधक का इस्तेमाल करतीं हैं.

ये सर्वे फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनाकोलोजिकल सोसाइटीज़ ऑफ़ इंडिया और डॉक्टर धुरु शाह ने मिलकर किया है.

इस सर्वे के लिए 15 से 25 साल के बीच 3500 अविवाहित लड़कियों से सवाल किए गए.

इनमें से 41% महिलाओं ने बताया कि उन्हें सेक्स और गर्भ निरोधकों के बारे में जानकारी मीडिया से ही मिलती है.

एक तरफ़ ये सर्वे है तो दूसरी तरफ़ सतीश कौशिक की फ़िल्म 'तेरे संग' आ रही है.

इस फ़िल्म में भी कच्ची उम्र में गर्भ धारण करने के मुद्दे पर कहानी बुनी गई है. सतीश कौशिक ने इस फ़िल्म के बारे में बताया, "ये ऐसे दो लोगों की कहानी है जो एक ग़लती करते हैं और दोनों अपनी ग़लतियों से सबक लेते हुए किस तरह से इसकी ज़िम्मेदारी लेते हैं."

उन्होंने कहा कि ये फ़िल्म माता-पिता और बच्चे दोनों का पक्ष रखती है. आपको फ़िल्म काफ़ी गंभीर लग रही हो लेकिन फिल्म के निर्देशक सतीश कौशिक ऐसा नहीं मानते.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि हालांकि ये फ़िल्म कम उम्र में गर्भ धारण के बारे में है लेकिन फिर भी ये मनोरंजन से भरपूर है. इस फ़िल्म के बारे कहा जा रहा था कि हॉलीवुड फ़िल्म 'जूनो' से प्रभावित है लेकिन निर्देशक सतीश कौशिक ने इस बात से साफ़ इंकार किया है.

उन्होंने कहा, "फ़िल्म 'जूनो' दिसंबर 2007 में प्रदर्शित हुई और तब तक हम 'तेरे संग' के महत्वपूर्ण अंशों की शूटिंग पूरी कर चुके थे." इस फ़िल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं रसलान मुमताज़ जिन्हें आप 'मेरा पहला पहला प्यार' में देख चुके हैं. उनके साथ हैं नई अभिनेत्री शीना शाहबादी. शीना बीते ज़माने की लोकप्रिय अभिनेत्री साधना सिंह की बेटी हैं. फ़िल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे रसलान ख़ान ने बीबीसी को बताया कि ये फिल्म नौजवानों की ज़िम्मेदारी लेने की सीख देती है. उधर अपने फ़िल्मी सफ़र की शुरुआत कर रही शीना को उम्मीद है कि इस फ़िल्म को अच्छी शुरुआत मिलेगी.

वैसे ऐसा नहीं है कि इस विषय पर बनी यह पहली फ़िल्म है. नौजवानों की प्रेम कहानियों बॉलीवुड में कामयाबी की ऊंचाइयों की छूती रहीं हैं. बॉबी, जूली और 'लव स्टोरी' ऐसी ही कुछ फिल्में हैं.

1975 में बनी फ़िल्म जूली जिसने भी देखी है, उन्हें याद आएगा कि उस फ़िल्म की कहानी भी कुछ इसी तरह की थी.

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