Sushant Singh Rajput की बहन ने एक्टर की मौत पर लिख दी किताब, कहा- 'हमें जानना है कि उस दिन क्या हुआ था'

Sushant Singh Rajput Sister Book: सुशांत सिंह राजपूत की बहनों ने हमेशा उनका समर्थन किया है। 2020 में उनके निधन के बाद से, वे अक्सर सुशांत की यादें शेयर करती रहती हैं और उन्हें न्याय दिलाने के लिए खड़ी होती हैं। अमेरिका में उनकी बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने अपनी नई किताब, "पेन: ए पोर्टल टू एनलाइटनमेंट" में सुशांत के बारे में लिखा है।
हाल ही में श्वेता, जो इस समय अपनी किताब लॉन्च करने के लिए भारत में हैं, उन्होंने कहा, "हमें जानना है क्या हुआ हमारे प्यारे सुशांत के साथ। हम सबको जानना है और जब तक हम ये नहीं जानेंगे, हममें से किसी को भी क्लोजर नहीं मिलेगा। हमें इसका पता लगाना होगा और इसके लिए हमें न्याय मांगते रहना होगा, सीबीआई से जांच करने के लिए कहते रहना होगा और जितनी जल्दी हो सके नतीजे सामने लाने होंगे।"
श्वेता अपनी बड़ी बहन रानी दी के साथ शिव मंदिर कन्याकुमारी मंदिर गईं। इसके अलावा, उन्होंने माउंट ब्लैंक में सुशांत के अपार्टमेंट के बाहर तस्वीरें खिंचवाईं, जहां कई लोगों ने न्याय के लिए नारे लगाए।
कुछ समय पहले, श्वेता ने भी अपने भाई को उनके जन्मदिन पर याद करने के लिए इंस्टाग्राम का सहारा लिया था। उन्होंने एक मोंटाज शेयर करते हुए लिखा, "मेरे सोना सा भाई को जन्मदिन की शुभकामनाएं। मैं तुम्हें हमेशा प्यार करती रहूंगी... अनंत से अनंत तक। आशा है कि आप लाखों दिलों में रहते हैं और उन्हें अच्छा करने और अच्छा बनने के लिए प्रेरित करते हैं। आपकी विरासत उन लाखों लोगों के लिए है, जिन्हें आपने भगवान जैसा और उदार बनने के लिए प्रेरित किया है।"
अपनी किताब में, श्वेता ने उल्लेख किया है कि हालांकि सुशांत अपने व्यस्त बॉलीवुड करियर के कारण उनसे मिलने नहीं जा सके, लेकिन वह 2014 से 2017 तक हर साल उनसे मिलने के लिए भारत आती थीं। दुर्भाग्य से, वह 2018 और 2019 में नहीं आ सकीं। जनवरी 2020 में , उन्होंने "विशेष रूप से सुशांत को देखने के लिए" एक स्पेशल जर्नी की, लेकिन उनसे मिल नहीं सकी। 14 जून, 2020 को उनकी दुखद मृत्यु से ठीक चार दिन पहले, उन्होंने एक फोन कॉल के दौरान सुशांत को अमेरिका में इनवाइट किया।
श्वेता ने लिखा कि उनके पति ही थे जिन्होंने उन्हें 13 जून की रात को अमेरिका में इस खबर के बारे में इनफॉर्म किया और मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई। उन्होंने अपनी किताब में लिखा "खबर सुनते ही मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई और मैं लकवाग्रस्त होकर बिस्तर पर पड़ी रही। मैं चिल्लाई नहीं, मैं रोई नहीं। मुझे लगा मैं ऐसी जग ह पर गिर गई हूं, जहां पर मेरे शरीर और दिमाग के सारे सदमे सोख लिए गए हों और मेरे अंदर जान ही ना बची हो।"


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