छिछोरे के 2 साल: 'सुशांत से काफी मोटिवेशन मिलता था, उनकी बुद्धिमानी की कोई तुलना नहीं'

बॉलीवुड के वर्सेटाइल एक्टर, ताहिर राज भसीन मानते हैं कि नितेश तिवारी की फ़िल्म 'छिछोरे' ने उनकी ज़िंदगी बदल दी। उनकी डेब्यू फ़िल्म 'मर्दानी' को बॉक्स-ऑफिस पर जबरदस्त कामयाबी मिली और क्रिटिक्स ने भी उनके काम की जमकर तारीफ़ की, और एक बार फिर ताहिर ने फ़िल्म 'छिछोरे' में अपने काम से लोगों का दिल जीत लिया। इस फ़िल्म की शूटिंग के बेहतरीन अनुभव के लिए वह अपने प्रोड्यूसर साजिद नाडियाडवाला, डायरेक्टर नितेश और अपने को-स्टार, दिवंगत सुशांत सिंह राजपूत का तहे दिल से शुक्रिया अदा करते हैं।

फ़िल्म की रिलीज़ की दूसरी सालगिरह के मौके पर ताहिर कहते हैं, "छिछोरे की शूटिंग की मेरी सबसे प्यारी यादें फ़िल्म के उन हिस्सों से जुड़ी हैं, जिन्हें हमने IIT बॉम्बे में शूट किया था। फ़िल्म की कहानी हॉस्टल 4 पर आधारित है, जो वास्तव में मौजूद है, साथ ही कॉलेज के असली कॉरिडोर और कैंटीनों में शूटिंग करने से पूरी कास्ट को अपने कॉलेज के दिनों की याद दिलाने और फ़िल्म की कहानी से तुरंत जुड़ने में मदद मिली। यह फ़िल्म काफी चैलेंजिंग थी जिसका मैं हिस्सा बना; नितेश तिवारी पर्फेक्शनिस्ट हैं और उन्होंने मुझे डेरेक के किरदार में ढालने के लिए नेशनल लेवल के स्पोर्ट्स कोच से ट्रेनिंग दिलाई। मैंने 4 महीने तक एथलेटिक्स, फ़ुटबॉल और कबड्डी की ट्रेनिंग ली, और मैं पूरी तरह अपने किरदार में ढल गया।"

 tahir raj bhasin

युवा एक्टर कहते हैं, "सुशांत को काम करते हुए देखने और पर्दे के पीछे उनके साथ समय बिताने में मुझे बड़ी खुशी मिलती थी। यह देखकर काफी मोटिवेशन मिलता था कि वे पूरी कमिटमेंट के साथ अपने पर्सनल ग्रोथ पर ध्यान देते थे। उनकी बुद्धिमानी की कोई तुलना नहीं थी, और उन्हें बहुत से विषयों में काफी दिलचस्पी थी जिससे सेट पर मनोरंजन होता था और वे सभी का मन मोह लेते थे।

साजिद नाडियाडवाला को बेहतरीन स्क्रिप्ट्स की समझ है, और हम उनकी लीडरशिप से यह सीख सकते हैं कि वे प्रोजेक्ट को संभालते हुए एक्टर्स को भी अपनी बात रखने का मौका देते हैं। फ़िल्म के प्रीमियर के बाद जब उन्होंने डेरेक के किरदार के लिए मुझे बधाई दी, तो उस वक़्त मुझे काफी गर्व का अनुभव हुआ था।

ताहिर को गर्व है कि 'छिछोरे' उनकी फिल्मों की सूची में शामिल हैं। वे कहते हैं, "आज जब मैं छिछोरे के बारे में सोचता हूं तो मुझे एक बड़ी अचीवमेंट का एहसास होता है। बॉक्स-ऑफिस पर धमाल मचाने वाली फ़िल्म में काम करना और उस फ़िल्म के नेशनल अवॉर्ड को सेलिब्रेट करना, सचमुच एक रेयर कॉम्बिनेशन है। जब भी मैं टीवी पर 'छिछोरे' देखता हूं, तो मैं मुस्कुरा देता हूं।

फ़िल्म के क्लाइमेक्स में रिले रेस में डेरेक को दौड़ते हुए देखकर मुंबई की ह्यूमिडिटी की यादें ताज़ा हो जाती हैं, जब 500 लोग मुझे चीयर कर रहे थे और टेक के बीच में फिजियोथेरेपिस्ट मुझे शेप में लाने के लिए मेहनत करते थे, ताकि मेरा अगला टेक बेहतरीन हो। मैं यही सोच कर मुस्कुरा देता हूं कि हमारी मेहनत सफल रही!"

छिछोरे से ताहिर को नई पहचान मिली और उसके बाद से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे कहते हैं, "छिछोरे सचमुच एक धमाकेदार फ़िल्म थी। डेरेक के किरदार ने मुझे पहले की तुलना में काफी सॉफ्ट कैरेक्टर को एक्सप्लोर करने का मौका दिया। हालांकि डेरेक को 'हॉस्टल का बाप' कहा जाता था, फिर भी वह हॉस्टल 4 में अपने दोस्तों के गैंग को लेकर काफी इमोशनल था।

ऑडियंस ने भी उसके दिल की भावनाओं से जुड़ाव महसूस किया, जो इस किरदार को निभाने की असली चुनौती थी। सच कहूं तो इस फ़िल्म के बाद स्टूडियोज़ और ऑडियंस ने मुझे एक नए नजरिए से देखा, और मर्दानी के एंटी-हीरो से लेकर इस साल मैं जिस रोमांटिक हीरो की भूमिका निभा रहा हूं, उसके सफ़र में यह चैप्टर मेरे लिए हमेशा बेहद खास बना रहेगा।"

ताहिर अब 'लूप लपेटा' में तापसी पन्नू के साथ रोमांटिक लीड में दिखाई देंगे, जबकि 'ये काली आँखें' में स्वेता त्रिपाठी के साथ उनकी जोड़ी नज़र आएगी। कबीर खान की फ़िल्म '83' में भी ताहिर सुनील गावस्कर की भूमिका निभा रहे हैं।

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