सुशांत सिंह राजपूत की छिछोरे चीन में रिलीज़ को तैयार, नितेश तिवारी दंगल के बाद लाएंगे बॉक्स ऑफिस पर सुनामी
नितेश तिवारी की मल्टीस्टारर फिल्म छिछोरे आखिरकार चीन में धमाका करने को तैयार है। कई रिपोर्ट्स की मानें तो छिछोरे अब चीन में रिलीज़ होने जा रही है और सुशांत सिंह राजपूत, श्रद्धा कपूर सहित फिल्म के बाकी स्टार्स अब चीन के दर्शकों को इंटरटेन करने वाले हैं। छिछोरे winners और losers को केंद्र में रखते हुए ज़िंदगी में हार जीत की कहानी बताती है।
हालांकि, 2019 में रिलीज़ होने के बाद ये फिल्म 2020 में चीन में रिलीज़ होने वाली थी लेकिन कोरोना ने सारा प्लान बदल दिया। अब अपनी रिलीज़ के 2 सालों बाद छिछोरे चीन के बॉक्स ऑफिस पर दस्तक देने जा रही है।

नितेश तिवारी की ये दूसरी फिल्म होगी जो चीन बॉक्स ऑफिस पर रिलीज़ होगी। इससे पहले, उनकी फिल्म दंगल ने चीन बॉक्स ऑफिस पर एक ही दिन में 100 करोड़ की कमाई कर सबको चौंका दिया था। अब देखना है कि छिछोरे इस इतिहास को दोहरा पाती है या नहीं। छिछोरे ने भारत में कुल 153 करोड़ की कमाई की थी।

छिछोरे बनी थी स्लीपर हिट
छिछोरे 2019 की स्लीपर हिट थी और फिल्म को साल की बेस्ट फिल्मों में से एक कहा गया था। गौरतलब है कि दबी ज़ुबान से ही सही लेकिन ये कहा गया कि सुशांत इस बात से परेशान थे कि छिछोरे के इतना हिट होने के बावजूद उन्हें इस फिल्म के लिए ज़्यादा पहचान नहीं मिली।फिल्म के लिए सुशांत सिंह राजपूत को किसी अवार्ड में भी शामिल नहीं किया गया। हालांकि छिछोरे ने फिल्मफेयर के लिए पांच अवार्ड्स जीते थे जिसमें बेस्ट फिल्म और बेस्ट डायरेक्टर शामिल थे।

चीन में रिलीज़ होगी फिल्म
छिछोरे एक हॉस्टल में रह रहे छह दोस्तों की कहानी जिसकी मुख्य धुरी थी सुशांत सिंह राजपूत के किरदार अनी का बेटा। फिल्म की कहानी इसी हॉस्टल के छह किरदारों के बीच बंटी हुई थी। फिल्म में सुशांत एक ऐसे किरदार में थे जो अपने बेटे को ज़िंदगी की कीमत समझाता है। वो बेटा जो एक एग्ज़ाम में पास ना होने से ज़िंदगी में हारा महसूस करता है और ज़िंदगी खत्म करने की कोशिश करता है।

सुशांत का बेहतरीन करियर
इन तस्वीरों में एक हंसते मुस्कुराते सुशांत को देखकर किसी का भी दिल टूट जाएगा। सुशांत को हर कोई ऐसा ही जानता था। ज़िंदगी से लबालब भरा हुआ इंसान। सुशांत सिंह राजपूत, संभावनाओं से भरे एक एक्टर थे। यही कारण है कि अपने छोटे से करियर में उन्होंने ऐसी बुलंदी और शोहरत देखी जो कम ही लोग देख पाते हैं। वहीं उन्होंने अपने छोटे से करियर में एक से एक बेहतरीन फिल्में दीं। देखिए फिल्म के कुछ शानदार डायलॉग्स।

फिल्म ने कराई दोस्तों की पहचान
- सच्चे दोस्त वही होते हैं जो अच्छे वक्त में आपकी बजाते हैं और जब मुश्किल वक्त आता है तो वही छिछोरे आपके दरवाज़े पर खड़े नज़र आते हैं।
- तुम्हारा रिज़ल्ट डिसाइड नहीं करता है कि तुम लूज़र हो कि नहीं, तुम्हारी कोशिश ये तय करती है।
- दूसरों से हार के लूज़र कहलाने से कहीं ज़्यादा बुरा है, खुद से हार के लूज़र कहलाना।
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सक्सेस के बाद का प्लान सबके पास है, लेकिन अगर गलती से फेल हो गए तो उससे कैसे डील करना है इसकी कोई बात ही नहीं करना चाहता।
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हम हार जीत, सक्सेस फेलियर में इतना उलझ गए हैं कि ज़िंदगी जीना भूल गए हैं। ज़िंदगी में अगर कुछ सबसे ज़्यादा इंपॉर्टेंट है तो वो है खुद ज़िंदगी।
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पता नहीं क्या जादू है कॉलेज लाईफ में जहां अनजाने मिलते हैं और दोस्त बन जाते हैं। ज़िंदगी भर के लिए। और ऐसे वैसे दोस्त नहीं, कुत्ते दोस्त।
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ये काम भी कितनी चालू चीज़ है ना। जब काम को टाईम चाहिए होता है तो फैमिली एडजस्ट करती है ना। और जब फैमिली को टाईम चाहिए तो काम को तो एडजस्ट करना ही पड़ेगा।
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यादों के पुराने एलबम में, छिपा के रखे हैं हमने वो दिन। गुल्लक में पड़ी चवन्नी से बचा के रखे हैं हमने वो दिन। दोस्ती और दोस्तों से उधार के दिन थे, वो भी क्या दिन थे।
- कल की खुशियों का महंगा म्यूचुअल फंड लेके, किश्तें क्यों भर रहा है आज को दंड देके। चिंता करके क्या पाएगा, मरने से पहले मर जाएगा। सुन ये गाना काम आएगा। बस खा ले, पी ले, जी ले, ज़िंदगी है शॉर्ट। अरे पगले फिकर नॉट।
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